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बसों के घेरे फुटपाथ, ट्रैफिक प्रभावित
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हरदोई। यातायात कंट्रोल के तमाम प्रयास विफल रहे हैं। साप्ताहिक बंदी के अलावा ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता, जब शहर की तमाम सड़कें-चौराहे जाम की झाम में उलझते न हों। यातायात व्यवस्था के लिए किए जाने वाले नए-नवेले प्रयोग भी फेल होते रहे हैं।
पिछले एक सप्ताह में तीन बार सोल्जर बोर्ड व सिनेमा चौराहा और दो बार नुमाइश चौराहा कई घंटे के लिए जाम रहा।
सवाल यह है कि इस जाम के लगने का कारण आम पब्लिक को भी आसानी से दिख जाता है तो फिर यातायात की जिम्मेदारी रखने वाले पुलिस-प्रशासन के अधिकारी क्यों नहीं देख पाते। शहर की मुख्य सड़कों के फुटपाथ पर प्राइवेट बसों के स्टैंड का संचालन किया जा रहा है।
घनी आबादी और अधिक ट्रैफिक वाली इन सड़कों पर चलने के लिए महज 16 से 18 फीट का गलियारा ही बचता है। इसी गलियारे से पैदल राहगीर भी गुजरते हैं और छोटे-बड़े वाहन भी।
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जागरूक वर्ग से जुड़े अभिनव अवस्थी, आकिल हुसैन, विनोद मिश्रा, नवनीत सक्सेना ने बताया कि बसों का अस्थायी स्टैंड बन जाने की वजह से इन बसों का आवागमन लगातार जारी रहता है।
लिहाजा, कम जगह में ज्यादा ट्रैफिक जाम का कारण बनता है। यही वजह है कि नुमाइश चौराहा, सोल्जर बोर्ड चौराहा, सिनेमा चौराहा और स्वर्णजयंती चौक अक्सर जाम की समस्या में उलझे नजर आते हैं।
20 हजार से ज्यादा आबादी का रोजाना आवागमन
शहर के मुख्य चौराहों में सिनेमा चौराहा, नुमाइश चौराहा, सोल्जर बोर्ड चौराहा और डीएम चौराहा से होकर गुजरने वाले राहगीरों का एक दिन का औसत लगभग 20 हजार है।
इसके बावजूद इन चौराहों से सटाकर गोपामऊ, पिहानी, सीतापुर, नैमिषारण्य, लखनऊ रूट की बसों के स्टैंड संचालित किए जा रहे हैं। एक रोड पर करीब तीन दर्जन से ज्यादा बसों के बेड़े स्टैंड से संचालित होते हैं।
जिला अस्पताल गेट पर चल रहा टैक्सी स्टैंड
जिला पुरुष व महिला अस्पतालों के गेट के बाहर सड़क के दोनों ओर टैक्सियों का संचालन किया जा रहा है। यहां से 40 से ज्यादा टैक्सियां संचालित होती हैं।
टैक्सी स्टैंड की वजह से अक्सर जिला अस्पताल आने-जाने वाली एंबुलेंस या मरीजों को लाने वाले प्राइवेट वाहनों को असुविधा होती है। इतना ही नहीं अस्पताल के आसपास स्टैंड की वजह से जाम के हालात बने रहते हैं।
बसों को सड़क के फुटपाथों से हटाकर नुमाइश मैदान में भेज दिया गया था, लेकिन अब नुमाइश का संचालन शुरू होने की वजह से बसें फिर सड़क पर आ गई हैं, इसलिए समस्या बढ़ी है। इनके संचालन को नियंत्रित करके जाम की समस्या को खत्म किया जाएगा।
-विनोद कुमार, यातायात प्रभारी, हरदोई
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पिछले एक सप्ताह में तीन बार सोल्जर बोर्ड व सिनेमा चौराहा और दो बार नुमाइश चौराहा कई घंटे के लिए जाम रहा।
सवाल यह है कि इस जाम के लगने का कारण आम पब्लिक को भी आसानी से दिख जाता है तो फिर यातायात की जिम्मेदारी रखने वाले पुलिस-प्रशासन के अधिकारी क्यों नहीं देख पाते। शहर की मुख्य सड़कों के फुटपाथ पर प्राइवेट बसों के स्टैंड का संचालन किया जा रहा है।
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घनी आबादी और अधिक ट्रैफिक वाली इन सड़कों पर चलने के लिए महज 16 से 18 फीट का गलियारा ही बचता है। इसी गलियारे से पैदल राहगीर भी गुजरते हैं और छोटे-बड़े वाहन भी।
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जागरूक वर्ग से जुड़े अभिनव अवस्थी, आकिल हुसैन, विनोद मिश्रा, नवनीत सक्सेना ने बताया कि बसों का अस्थायी स्टैंड बन जाने की वजह से इन बसों का आवागमन लगातार जारी रहता है।
लिहाजा, कम जगह में ज्यादा ट्रैफिक जाम का कारण बनता है। यही वजह है कि नुमाइश चौराहा, सोल्जर बोर्ड चौराहा, सिनेमा चौराहा और स्वर्णजयंती चौक अक्सर जाम की समस्या में उलझे नजर आते हैं।
20 हजार से ज्यादा आबादी का रोजाना आवागमन
शहर के मुख्य चौराहों में सिनेमा चौराहा, नुमाइश चौराहा, सोल्जर बोर्ड चौराहा और डीएम चौराहा से होकर गुजरने वाले राहगीरों का एक दिन का औसत लगभग 20 हजार है।
इसके बावजूद इन चौराहों से सटाकर गोपामऊ, पिहानी, सीतापुर, नैमिषारण्य, लखनऊ रूट की बसों के स्टैंड संचालित किए जा रहे हैं। एक रोड पर करीब तीन दर्जन से ज्यादा बसों के बेड़े स्टैंड से संचालित होते हैं।
जिला अस्पताल गेट पर चल रहा टैक्सी स्टैंड
जिला पुरुष व महिला अस्पतालों के गेट के बाहर सड़क के दोनों ओर टैक्सियों का संचालन किया जा रहा है। यहां से 40 से ज्यादा टैक्सियां संचालित होती हैं।
टैक्सी स्टैंड की वजह से अक्सर जिला अस्पताल आने-जाने वाली एंबुलेंस या मरीजों को लाने वाले प्राइवेट वाहनों को असुविधा होती है। इतना ही नहीं अस्पताल के आसपास स्टैंड की वजह से जाम के हालात बने रहते हैं।
बसों को सड़क के फुटपाथों से हटाकर नुमाइश मैदान में भेज दिया गया था, लेकिन अब नुमाइश का संचालन शुरू होने की वजह से बसें फिर सड़क पर आ गई हैं, इसलिए समस्या बढ़ी है। इनके संचालन को नियंत्रित करके जाम की समस्या को खत्म किया जाएगा।
-विनोद कुमार, यातायात प्रभारी, हरदोई