फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   paasee voton mein bantavaara, savarn-pichhadon ka sahaara

पासी वोटों में बंटवारा, सवर्ण-पिछड़ों का सहारा

Tue, 15 Feb 2022 11:03 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Feb 2022 11:03 PM IST
विज्ञापन
paasee voton mein bantavaara, savarn-pichhadon ka sahaara
हरदोई। सांडी सीट पर इस बार विकास के मुद्दे नदारद हैं। राजनीतिक दलों के प्रत्याशी यहां विकास के बजाय जातीय समीकरण फिट करने में पसीना बहा रहे हैं।
विज्ञापन

यहां पासी वोटों में बंटवारे के चलते प्रत्याशी सवर्ण व पिछड़ा वोटरों के सहारे अपनी नैया पार लगाने की कोशिश में हैं। इस सीट पर करीब एक लाख गैर यादव पिछड़ा व साठ हजार सवर्ण मतदाता हैं, जो चुनाव की दिशा बदल सकते हैं।
1967 में गोपामऊ से बदलकर अस्तित्व में आई अहिरोरी सीट से कांग्रेस के मन्नीलाल विधायक चुने गए। उन्होंने 11,862 वोट हासिल कर निर्दलीय जगदीश को तीन हजार वोटों से पराजित किया।
विज्ञापन

1969 में परमाईलाल ने निर्दलीय मैदान में उतर कर कांग्रेस के मन्नीलाल को कड़े संघर्ष के बाद 237 वोट से हराया। 1977 में मन्नीलाल ने 15,698 वोट हासिल कर परमाईलाल को 3,426 वोट से मात दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

1977 में आपातकाल के बाद लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए तो परमाईलाल लोकसभा चुनाव लड़े और जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव में मन्नीलाल 18,630 वोट हासिल कर जनता पार्टी के शंभूदयाल को 7,340 वोट से हराकर तीसरी बार विधायक बने।
1980 में परमाईलाल ने 4,336 वोट से जीत दर्ज कर भाजपा का जिले में खाता खोला। उन्होंने 19952 वोट हसिल कर कांग्रेस (आई) के सत्यपाल को धूल चटाई।
1985 में लोकदल से चुनाव मैदान में उतरकर परमाईलाल ने 29,165 वोट हासिल कर कांग्रेस के मन्नीलाल को 12,097 वोट से शिकस्त दी। 1989 में जनता दल के हुए परमाईलाल ने 32,471 वोट के हासिल कर श्यामप्रकाश को हराया।
1991 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे परमाईलाल और भाजपा के रामसेवक के बीच कांटे की टक्कर हुई। परमाईलाल ने 20,565 वोट हासिल कर रामसेवक को 615 से हराया।
वह मुलायम सरकार में लघु सिंचाई उपमंत्री बने। परमाईलाल के निधन के बाद 1993 में पहली बार मैदान में उतरी सपा ने उनकी पत्नी जदुरानी को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने 36,431 वोट हासिल कर भाजपा के रामसेवक पर 11,467 वोट से बड़ी जीत हासिल की।
1996 में बसपा के श्यामप्रकाश ने 52,253 वोट हासिल कर बीजेपी के मीतन प्रसाद को 23,631 वोट के बडे़ अंतर से करारी शिकस्त दी। सपा की जदुरानी 28078 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
2002 में ससुर-सास की विरासत संभालने उतरीं सपा की ऊषा वर्मा ने 47,799 वोट हासिल कर बसपा के श्यामप्रकाश को 4,080 वोट से पराजित किया। 2004 के लोकसभा चुनाव में ऊषा वर्मा हरदोई सीट से सांसद चुनी गईं।
रिक्त हुई अहिरोरी सीट पर बसपा छोड़ सपा से उतरे श्यामप्रकाश ने जीत दर्ज की। 2007 में बसपा से युवा प्रत्याशी वीरेंद्र वर्मा ने 45,276 वोट हासिल कर सपा के प्रभाष कुमार को 7,787 वोट से हरा दिया।
2012 में अस्तित्व में आई सांडी (सुरक्षित) सीट पर परमाईलाल की बहू राजेश्वरी ने सपा से मैदान में उतरकर 66,245 वोट हासिल कर बसपा के वीरेंद्र कुमार को 6,650 वोट से हराकर जीत दर्ज की।
2017 में सांडी में त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिला। भाजपा के प्रभाष कुमार 71,801 वोट के साथ सपा के गठबंधन से उतरे कांग्रेस प्रत्याशी ओमेंद्र वर्मा को 20,225 वोट से हरा कर विधानसभा पहुंचे। बसपा के वीरेंद्र कुमार तीसरे स्थान पर रहे।
चारों प्रमुख दलों के पासी प्रत्याशी मैदान में
सांडी पासी बहुल सीट होने के चलते चारों प्रमुख राजनीतिक दलों ने पासी प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। यहां जिले के दो बड़े राजनीतिक परिवार चुनावी मैदान में हैं। भाजपा प्रत्याशी प्रभाष कुमार के पिता कुबेर की पासी समाज में अच्छी पैठ रही है।
प्रभाष मौजूदा विधायक हैं और उनके भाई मिश्रिख से सांसद व चाचा रामपाल वर्मा आठ बार विधायक व राज्यमंत्री रह चुके हैं। वहीं सपा प्रत्याशी ऊषा वर्मा तीन बार सांसद व एक बार विधायक रह चुकी हैं।
वह ससुर परमाईलाल की राजनीतिक विरासत संभाल रही हैं। पासियों के बड़े नेता परमाई छह बार विधायक और दो बार सांसद रहे।
158 सांडी विधानसभा सीट 2008 में हुए परिसीमन में बिलग्राम की सांडी ब्लाक व सदर सीट के सुरसा व अहिरोरी का हिस्सा जोड़कर बनी थी। इस सीट पर 2012 में हुए पहले चुनाव में सपा की राजेश्वरी विधायक बनीं थी।
कुबेर और परमाई रहे पासियों के चहेते
कुबेर व परमाईलाल की जिले में तूती बोलती थी। वह दोनों पासी समाज के बड़े नेता रहे हैं। कुबेर कोथावां ब्लाक से दो बार प्रमुख रहे हैं। रामपाल वर्मा आठ बार विधायक और राज्यमंत्री रह चुके हैं।

बेटा विधायक व भतीजे अशोक रावत दो बार सांसद रहे। साथ ही परिजन तमाम राजनीतिक पदों पर आसीन हैं। वहीं परमाईलाल छह बार विधायक व दो बार सांसद रह चुके हैं।
पत्नी जदुरानी एक बार, बड़ी बहू राजेश्वरी दो बार विधायक रहीं। छोटी बहू ऊषा वर्मा तीन बार सांसद व एक बार विधायक रहीं।
ये प्रत्याशी हैं मैदान में
भाजपा से प्रभाष कुमार, सपा से ऊषा वर्मा, कांग्रेस से आकांक्षा वर्मा, बसपा से कमल वर्मा, बहुजन पार्टी से रंजीत सिंह खालसा, आप से स्वर्णकांत, निर्दलीय प्रदीप वर्मा, रामसागर, अनूप कुमार, कमल वर्मा, अरविंद कुमार, शिवकुमार।
अनुमानित जातीय आंकड़े
पासी-56,000, जाटव-45,000, ठाकुर-32,000, ब्राह्मण-20,000, लोधी-21,000, यादव-17,000, तेली-12,000, वैश्य-10,000, केशवाहा/मौर्य/शाक्य/सैनी-25,000,
धोबी-12,000, मुस्लिम-20,000, पाल-10,000, निषाद/कश्यप/केवट-10,000, बाल्मीकि-4,000, कायस्थ/भुर्जी-5,000
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed