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खुले स्कूल, शुरू हुई पढ़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Thu, 02 Jul 2015 12:27 AM IST
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ग्रीष्मावकाश के बाद खुले विद्यालयों में इस बार
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शिक्षा सत्र में परिवर्तन के कारण अलग माहौल दिखाई दिया। विद्यालयों में
पहले दिन मौज-मस्ती के स्थान पर विद्यार्थियों को कक्षाओं में पढ़ाई करनी
पड़ी। वहीं परिषदीय विद्यालयों में प्रथम दिन उपस्थिति कम रही।
ग्रीष्मावकाश के बाद बुधवार को सभी परिषदीय, अशासकीय सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त विद्यालय खुल गए। स्कूल खुलने से घर का माहौल भी बदला नजर आया। उधर, जहां बच्चे सुबह घरों के बिस्तर पर सोते नजर आते थे, आज कोई मोजा, तो टाई की खोज में जुटा हुआ था।
परिवार के सदस्य बच्चोें को विद्यालय जाने के लिए तैयारी करने में सहयोग कर रहे थे। माताओं ने रसोई घर का दायित्व संभाल रखा था, क्योंकि उन्हें विद्यालय जाने वाले अपने लाड़ले के लिए टिफन जो तैयार करना था। इसके बाद सुबह चौराहों, गली के बाहर नुक्कड़ों पर विद्यार्थियों की बैग और बोतल लिए अभिभावकों के साथ लाइन लगी हुई थी।
बस इंतजार था स्कूल वाहन आने का। स्कूल वाहन आते ही बच्चे विद्यालय के लिए रवाना हो गए। अवकाश के बाद स्कूल पहुंचे बच्चोें ने सबसे पहले पहुंच कर गुरुजनों को नमन किया। इसके बाद अपने सहपाठियों के साथ अवकाश के दिनों की याद ताजा की, पर अबकी विद्यार्थियों को शिक्षा सत्र के परिवर्तित होने के कारण बदला हुआ माहौल मिला।
उनको मौज मस्ती के स्थान पर कक्षा में जाकर पढ़ाई करनी पड़ी, वहीं अवकाश के दिनों में दिया गया होमवर्क दिखाना पड़ा। अबकी शिक्षा सत्र एक अप्रैल से ही शुरू हो गया था, जिससे अप्रैल में प्रवेश के उपरांत कक्षाएं शुरू कर दी गई थी। उधर, माध्यमिक विद्यालयों में ग्रीष्म अवकाश के बाद हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों ने विद्यालय पहुंच कर अंक पत्र प्राप्त किए, वहीं इंटर के विद्यार्थियों ने स्थानांतरण प्रमाण पत्र प्राप्त कर उनको भर कर जमा किया।
स्कूलों में कक्षा 11 की कक्षाएं को छोड़कर अन्य कक्षाओं में शिक्षण कार्य किया गया। विद्यार्थी व टीचर शिक्षण कार्य में व्यस्त दिखाई दिए।
ग्रीष्मावकाश के बाद बुधवार को सभी परिषदीय, अशासकीय सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त विद्यालय खुल गए। स्कूल खुलने से घर का माहौल भी बदला नजर आया। उधर, जहां बच्चे सुबह घरों के बिस्तर पर सोते नजर आते थे, आज कोई मोजा, तो टाई की खोज में जुटा हुआ था।
परिवार के सदस्य बच्चोें को विद्यालय जाने के लिए तैयारी करने में सहयोग कर रहे थे। माताओं ने रसोई घर का दायित्व संभाल रखा था, क्योंकि उन्हें विद्यालय जाने वाले अपने लाड़ले के लिए टिफन जो तैयार करना था। इसके बाद सुबह चौराहों, गली के बाहर नुक्कड़ों पर विद्यार्थियों की बैग और बोतल लिए अभिभावकों के साथ लाइन लगी हुई थी।
बस इंतजार था स्कूल वाहन आने का। स्कूल वाहन आते ही बच्चे विद्यालय के लिए रवाना हो गए। अवकाश के बाद स्कूल पहुंचे बच्चोें ने सबसे पहले पहुंच कर गुरुजनों को नमन किया। इसके बाद अपने सहपाठियों के साथ अवकाश के दिनों की याद ताजा की, पर अबकी विद्यार्थियों को शिक्षा सत्र के परिवर्तित होने के कारण बदला हुआ माहौल मिला।
उनको मौज मस्ती के स्थान पर कक्षा में जाकर पढ़ाई करनी पड़ी, वहीं अवकाश के दिनों में दिया गया होमवर्क दिखाना पड़ा। अबकी शिक्षा सत्र एक अप्रैल से ही शुरू हो गया था, जिससे अप्रैल में प्रवेश के उपरांत कक्षाएं शुरू कर दी गई थी। उधर, माध्यमिक विद्यालयों में ग्रीष्म अवकाश के बाद हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों ने विद्यालय पहुंच कर अंक पत्र प्राप्त किए, वहीं इंटर के विद्यार्थियों ने स्थानांतरण प्रमाण पत्र प्राप्त कर उनको भर कर जमा किया।
स्कूलों में कक्षा 11 की कक्षाएं को छोड़कर अन्य कक्षाओं में शिक्षण कार्य किया गया। विद्यार्थी व टीचर शिक्षण कार्य में व्यस्त दिखाई दिए।