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Hardoi News: ड्रिफकेस एप पर घर बैठे बनेगा ओपीडी का पर्चा, नहीं लगानी हाेगी लाइन
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज में अब आभा आईडी के बिना ओपीडी पर्चा नहीं बन रहा है। इसके लिए मरीज व तीमारदार पंजीकरण काउंटर पर घंटों लाइन लगा रहे हैं। हालांकि, मरीजों की सहूलियत के लिए ड्रिफकेस एप पर पर्चा बनाने की सुविधा है। एप पर पंजीकरण करने के बाद टोकन नंबर दिखाकर पर्चा मिल जाएगा।
मरीजों के इलाज के लिए आभा आईडी अनिवार्य किए जाने के बाद से मेडिकल कॉलेज पंजीकरण काउंटरों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। वैसे भी मेडिकल कॉलेज के पंजीकरण काउंटर पर रोजाना अभी दो से ढाई हजार मरीजों के पर्चे बनाए जा रहे हैं। आभा आईडी न होने पर मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। हालांकि, शुरुआती दिनों में कर्मचारी काउंटर से आभा आईडी जनरेट किए दे रहे हैं लेकिन आने वाले दिनों में मरीजों को ड्रिफकेस एप पर ही पर्चा बनवाना होगा।
मरीज व तीमारदार को अपने एंड्रायड फोन पर ड्रिफकेस एप डाउनलोड करने के बाद उसमें मांगी जाने वाली जानकारी भरकर टोकन नंबर लेना होगा। इस नंबर को मेडिकल कॉलेज के पंजीकरण काउंटर पर दिखाकर पर्चा मिल जाएगा और इसके बाद मरीज चिकित्सीय परामर्श ले सकते हैं।
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एप पर अभी नहीं बन रहे अधिक पर्चे
आभा आईडी होने के बाद भी प्रतिदिन 100 से 125 पर्चे ही ऑनलाइन बन रहे हैं जबकि पूरे दिन अस्पताल में दो से ढाई हजार लोग पर्चे बनवाते हैं। इसके लिए मरीज और तीमारदार सुबह सात बजे के पहले लाइन लगा लेते हैं जबकि पर्चा काउंटर आठ बजे खुलता है। लोग पूरे दिन घंटों लाइन लगाते हैं लेकिन मोबाइल के माध्यम से एप के जरिये पर्चा नहीं बनवा रहे हैं। हालांकि, महिला अस्पताल की स्थिति बेहतर है। महिला चिकित्सालय में ड्रिफकेस एप की अनिवार्यता पहले से ही लागू कर दी गई है। रोजाना 200 के करीब ऑनलाइन पर्चे बनाए जा रहे हैं।
एप पर ऐसे करें पंजीकरण
एंड्रायड मोबाइल के प्ले स्टोर से ड्रिफकेस एप को डाउनलोड कर लें। एप में मोबाइल नंबर दर्ज कर लॉगिन करें, ओटीपी आने के बाद आगे बढ़े और अपना नाम, पता और आभा आईडी दर्ज करें। आभा आईडी दर्ज करने के बाद उसमें पूछी जाने वाली जानकारियों को भर दें, इसके बाद एक टोकन नंबर आएगा। इसको ही अस्पताल में दिखाने के बाद काउंटर से निर्धारित शुल्क देकर बिना नंबर लगाए पर्चा मिल जाएगा।
मरीजों की सहूलियत के लिए ही आभा आईडी को लागू किया गया है। मरीजों के इलाज की विस्तृत जानकारी ऑनलाइन मिल जाएगी और उपचार में आसानी होगी। मरीज ऑनलाइन पंजीकरण एप के माध्यम से कर सकते हैं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मरीजों के इलाज के लिए आभा आईडी अनिवार्य किए जाने के बाद से मेडिकल कॉलेज पंजीकरण काउंटरों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। वैसे भी मेडिकल कॉलेज के पंजीकरण काउंटर पर रोजाना अभी दो से ढाई हजार मरीजों के पर्चे बनाए जा रहे हैं। आभा आईडी न होने पर मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। हालांकि, शुरुआती दिनों में कर्मचारी काउंटर से आभा आईडी जनरेट किए दे रहे हैं लेकिन आने वाले दिनों में मरीजों को ड्रिफकेस एप पर ही पर्चा बनवाना होगा।
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मरीज व तीमारदार को अपने एंड्रायड फोन पर ड्रिफकेस एप डाउनलोड करने के बाद उसमें मांगी जाने वाली जानकारी भरकर टोकन नंबर लेना होगा। इस नंबर को मेडिकल कॉलेज के पंजीकरण काउंटर पर दिखाकर पर्चा मिल जाएगा और इसके बाद मरीज चिकित्सीय परामर्श ले सकते हैं।
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एप पर अभी नहीं बन रहे अधिक पर्चे
आभा आईडी होने के बाद भी प्रतिदिन 100 से 125 पर्चे ही ऑनलाइन बन रहे हैं जबकि पूरे दिन अस्पताल में दो से ढाई हजार लोग पर्चे बनवाते हैं। इसके लिए मरीज और तीमारदार सुबह सात बजे के पहले लाइन लगा लेते हैं जबकि पर्चा काउंटर आठ बजे खुलता है। लोग पूरे दिन घंटों लाइन लगाते हैं लेकिन मोबाइल के माध्यम से एप के जरिये पर्चा नहीं बनवा रहे हैं। हालांकि, महिला अस्पताल की स्थिति बेहतर है। महिला चिकित्सालय में ड्रिफकेस एप की अनिवार्यता पहले से ही लागू कर दी गई है। रोजाना 200 के करीब ऑनलाइन पर्चे बनाए जा रहे हैं।
एप पर ऐसे करें पंजीकरण
एंड्रायड मोबाइल के प्ले स्टोर से ड्रिफकेस एप को डाउनलोड कर लें। एप में मोबाइल नंबर दर्ज कर लॉगिन करें, ओटीपी आने के बाद आगे बढ़े और अपना नाम, पता और आभा आईडी दर्ज करें। आभा आईडी दर्ज करने के बाद उसमें पूछी जाने वाली जानकारियों को भर दें, इसके बाद एक टोकन नंबर आएगा। इसको ही अस्पताल में दिखाने के बाद काउंटर से निर्धारित शुल्क देकर बिना नंबर लगाए पर्चा मिल जाएगा।
मरीजों की सहूलियत के लिए ही आभा आईडी को लागू किया गया है। मरीजों के इलाज की विस्तृत जानकारी ऑनलाइन मिल जाएगी और उपचार में आसानी होगी। मरीज ऑनलाइन पंजीकरण एप के माध्यम से कर सकते हैं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज