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Hardoi News: गैर इरादतन हत्या के प्रयास में एक दोषी करार, तीन साल की सजा
Sat, 23 May 2026 12:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Sat, 23 May 2026 12:07 AM IST
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हरदोई। गैर इरादतन हत्या के प्रयास के आठ साल पुराने मामले में अपर जिला जज कोर्ट संख्या-तीन प्रमेंद्र कुमार ने एक शख्स को दोषी करार दिया है। अभियुक्त को तीन साल की सजा सुनाई है।
शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के हिरौली कुतुबनगर निवासी रविंद्र ने 19 फरवरी 2018 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था 18 फरवरी 2018 को उसका पुत्र संतोष (12) गांव में ही रामनरेश के पुत्र आकाश का तिलक देखने गया था। इसी बीच रामनरेश के पुत्र ओमकार ने रात के 10 बजे मारने की नियत से उसके पुत्र के सीने में तमंचे से गोली मार दी थी। गंभीर रुप से घायल संतोष को सीएचसी शाहाबाद से तत्कालीन जिला अस्पताल रेफर किया गया था। पुलिस ने हत्या के प्रयास के आरोप में ओमकार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने ओमकार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों को पेश किया गया। इसके सात ही सात अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए थे। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई है।
कोर्ट ने माना हर्ष फायरिंग में लगी थी संतोष को गोली
पुलिस ने रविंद्र की शिकायत के आधार पर हत्या के प्रयास की प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप था कि जान से मारने की नियत से फायर किया गया था। न्यायालय के सामने हुई सुनवाई में पता चला कि तिलक समारोह में ओमकार हर्ष फायरिंग कर रहा था। इस कारण रविंद्र के पुत्र संतोष के पैर में गोली लगी थी। जिस तमंचे से गोली चलने की बात कही गई थी, उस तमंचे को भी पुलिस बरामद नहीं कर पाई थी। दोनों के बीच कोई रंजिश भी नहीं थी। कोर्ट ने पाया कि हर्ष फायरिंग में संतोष को गोली लगी है। हत्या करने का कोई इरादा नहीं था। इस कारण गैर इरादतन हत्या के प्रयास का दोषी कर देते हुए सजा सुनाई है।
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शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के हिरौली कुतुबनगर निवासी रविंद्र ने 19 फरवरी 2018 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था 18 फरवरी 2018 को उसका पुत्र संतोष (12) गांव में ही रामनरेश के पुत्र आकाश का तिलक देखने गया था। इसी बीच रामनरेश के पुत्र ओमकार ने रात के 10 बजे मारने की नियत से उसके पुत्र के सीने में तमंचे से गोली मार दी थी। गंभीर रुप से घायल संतोष को सीएचसी शाहाबाद से तत्कालीन जिला अस्पताल रेफर किया गया था। पुलिस ने हत्या के प्रयास के आरोप में ओमकार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने ओमकार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों को पेश किया गया। इसके सात ही सात अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए थे। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई है।
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कोर्ट ने माना हर्ष फायरिंग में लगी थी संतोष को गोली
पुलिस ने रविंद्र की शिकायत के आधार पर हत्या के प्रयास की प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप था कि जान से मारने की नियत से फायर किया गया था। न्यायालय के सामने हुई सुनवाई में पता चला कि तिलक समारोह में ओमकार हर्ष फायरिंग कर रहा था। इस कारण रविंद्र के पुत्र संतोष के पैर में गोली लगी थी। जिस तमंचे से गोली चलने की बात कही गई थी, उस तमंचे को भी पुलिस बरामद नहीं कर पाई थी। दोनों के बीच कोई रंजिश भी नहीं थी। कोर्ट ने पाया कि हर्ष फायरिंग में संतोष को गोली लगी है। हत्या करने का कोई इरादा नहीं था। इस कारण गैर इरादतन हत्या के प्रयास का दोषी कर देते हुए सजा सुनाई है।
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