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अफसरों की लापरवाही ने छत के सपने पर लगाया ग्रहण

Wed, 16 Dec 2020 10:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 16 Dec 2020 10:45 PM IST
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officers mistake, no house to applicable person
बेचेलाल और उसके परिजन व पीछे मकान। संवाद - फोटो : HARDOI
हरदोई। आवासहीनों के सर्वे के दौरान ग्राम सचिवों ने पात्रों की जीओ टैगिंग नहीं की। इसके कारण प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत पांच ब्लॉकों में चिह्नित एक भी पात्र का डाटा ऑनलाइन नहीं दिख रहा। सभी पात्र आवास के इंतजार में हैं।
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प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत प्रत्येक पात्र को मकान बनवाने के लिए एक लाख बीस हजार रुपये की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। योजना के तहत पात्रों के चयन का आधार वर्ष 2011 में हुई सामाजिक, जातिगत और आर्थिक जनगणना थी। लेकिन इसके बाद भी बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोग खुले आसमान के नीचे गुजर कर रहे हैं। इस पर शासन ने दोबारा सर्वे कराया। इसमें ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया, जिनका नाम वर्ष 2011 की सूची में नहीं था।
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सर्वे के दौरान ग्राम सचिवों को निर्देश दिए गए थे कि सूची बनाने के बाद सभी पात्रों की जीओ टैगिंग भी कर दी जाए। लेकिन सर्वे के दौरान पांच विकास खंडों के ग्राम सचिवों ने डाटा अपलोड करने में गलती कर दी। पात्रों का सर्वे कर नाम तो अपलोड कर दिया, लेकिन जीओ टैगिंग नहीं की। जीओ टैग बिना कोई भी डाटा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत नजर ही नहीं आ रहा है। ऐसे में पात्रों को लाभान्वित नहीं किया जा सकता। (ब्यूरो)
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एक ब्लॉक में सिर्फ तीन का डाटा
जनपद के पांच विकास खंडों में आवासहीनों के सर्वे का पूरा डाटा शून्य हो गया है। इनमें भरावन, बावन, टड़ियावां, सांडी, पिहानी शामिल हैं। इसके अलावा सुरसा विकास खंड में सिर्फ तीन ही पात्रों का डाटा उपलब्ध है। इन तीन पात्रों के बैंक खातों में प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त के रूप में चालीस हजार रुपये भेजे जा चुके हैं।
आवासों की कमी नहीं, बड़ा है लक्ष्य
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत भरावन विकास खंड में 1036, बावन में 1239, टड़ियावां में 1441, सांडी में 1921 और पिहानी में 1928 के साथ ही सुरसा में 1347 पात्रों को लाभ देने का लक्ष्य है। अब बड़ा सवाल ये है कि जब डाटा ही नहीं है, तो लक्ष्य हासिल कैसे होगा।
इन्होंने बताई अपनी पीड़ा
ग्राम पंचायत बावन के निवासी गुड्डू सक्सेना के परिवार में पत्नी और बच्चों समेत सात लोग हैं। कभी मजदूरी करते हैं तो कभी चाट की ठेली लगाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। कच्ची दीवारों पर पड़ी टिन और तिरपाल ही सहारा हैं। आवासीय योजनाओं के लाभ से वह वंचित हैं।
भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत कटियार निवासी बेचेलाल भूमिहीन हैं। मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। मकान के नाम पर कच्ची दीवारें और उन पर पड़ी टिन शेड ही है। इसके नीचे किसी तरह गुजर बसर हो जाती है। परेशानियां बहुत हैं, लेकिन निराकरण करने वाला कोई नहीं।
बावन विकास खंड के सराय निवासी राधेश्याम के पास मकान के नाम पर झोपड़ी और कुछ ईंटें हैं। छत पर टिन शेड भी नहीं है। पुआल और पन्नी को इस तरह से तान लिया है कि किसी तरह रात गुजर जाती है। परिवार में तीन बच्चे हैं। पत्नी का निधन हो चुका है।

जल्द निकलेगा रास्ता
ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक राजेंद्र कुमार श्रीवास ने बताया कि इस तरह की समस्या प्रदेश के कई जनपदों में है। शासन को इससे अवगत कराया जा चुका है। ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान इस मुद्दे पर भारत सरकार के जिम्मेदारों से भी बात की है। जल्द ही कोई रास्ता निकल आएगा और सभी पात्रों को आवास मिल जाएंगे।
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