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पीने लायक नहीं रहा जिले का पानी
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
Updated Thu, 08 Sep 2016 11:48 PM IST
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गंदे पानी की आपूर्ति
- फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। जिले का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। उसमेें नाइट्रेट, टीडीएस और आयरन सहित कई तत्वों की अधिकता हो गई है। इससे लोग पेट, त्वचा और कैंसर जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ये आंकड़े दो साल पहले कराई गई गांवों के पानी की जांच के हैं। जिस कदर जिले में कैंसर रोगी बढ़ रहे हैं उससे साबित होता है कि हालात और गंभीर हो गए हैं।
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जिले में जल निगम सहित, यूपी एग्रो व अन्य संस्थाओं के 65 हजार हैंडपंप लगे हैं। सभी नगर निकायों के अलावा 10 ग्राम पंचायतों में पानी की टंकियां बनी हैं। जल निगम ने वर्ष 2013-14 में हैंडपंपों के पानी की जांच कराई थी। सभी ग्राम पंचायतों के पांच-पांच हैंडपंपों से पानी के नमूने लाने की जिम्मेदारी एक एनजीओ को दी गई थी।
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जांच में प्रत्येक नमूने मेें नाइट्रेट, टीडीएस और आयरन अधिक पाया गया था। उन्नाव से सटे ब्लॉकों माधौगंज, मल्लावां, बेहंदर, संडीला के अलावा बावन व टोडरपुर के कुछ नमूनों में फ्लोराइड भी अधिक मिला था। कई अन्य तत्वों की मात्रा भी कई जगह अधिक मिली थी। जिस कदर फसलों में रासायनिक तत्वों का उपयोग बढ़ रह है उससे निसंदेह अब तक नाइट्रेट की मात्रा पानी में कहीं अधिक बढ़ गई होगी। इसके बावजूद जल निगम के अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं।
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लोगों को जागरूकता करना तो दूर पिछले दो साल से हैंडपंप और ट्यूबवेल के पानी की जांच ही नहीं कराई गई है। नगर पालिका और नगर पंचायतों को और भी लापरवाही बरत रही हैं। जलनिगम के रिकार्ड के अनुसार किसी भी नगर पालिका और नगर पंचायत ने एक बार भी ट्यूबवेल व टंकी के पानी की जांच नहीं कराई।
कितना घातक है नाइट्रेट
रासायनिक उर्वरक, सूक्ष्म जीवों द्वारा सड़ाए गए पदार्थों और जीवों द्वारा उत्सर्जित पदार्थों से भूगर्भ जल में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ रही है। सब्जियों की फसलों में डीएपी, यूरिया और कीटनाशक के अधिक छिड़काव के कारण भी भूगर्भ जल में नाइट्रेट बढ़ रहा है। नाइट्रेट की अधिकता से नवजात शिशुओं में मेथमोग्लोबिनिमिया रोग, महिला पुरुषों में आंतों का कैंसर, हृदय की बीमारियां और पेट संबंधी बीमारियां हो जाती हैं।
आयरन की अधिकता बना रही पेट रोगी
पानी में आयरन की अधिकता लोगों को पेट का रोगी बना रही है। दो साल पहले हुुई जांच में ज्यादातर ब्लॉकों में पानी में आयरन जरूरत से ज्यादा पाई गई। इसकी अधिकता से हीमोक्रोमेटोटिस बीमारी भी होती है। इसके अलावा फ्लोराइड अधिक होने से दांत, जोड़ों में अकड़न और हड्डियां टेढ़ी हो जाती हैं।
आर्सेनिक टेस्ट की सुविध ही नहीं
पानी में आर्सेनिक, संखिया की मात्रा शरीर के लिए सबसे घातक होती है। आर्सेनिक की जांच की जल निगम की प्रयोगशाला में सुविधा ही नहीं है। पानी में 0.05 से अधिक आर्सेनिक होने पर लोग त्वचा और कैंसर रोग की चपेट में आ जाते हैं। जिले में इस समय त्वचा और कैंसर रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे साबित होता है कि जिले के पानी में आर्सेनिक की मात्रा भी अधिक हो गई है।
एनजीओ को लगाया गया
ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप ओर ट्यूबवेलों से पानी के नमूने लेने के लिए एक एनजीओ को लगाया गया है। ये एनजीओ सभी ग्राम पंचायतों में पांच पांच हैंडपंपों के पानी के नमूने लेकर जल निगम की प्रयोगशाला को देगी। इसके अलावा एनजीओ लोगों को जागरूक भी करेगा।
प्रधानों को दिए गए उपकरण हो गए रद्दी
करीब दो साल पहले सभी प्रधानों को पानी की जांच के लिए उपकरण की एक किट दी गई थी। पानी की जांच कैसे की जाए, इसका प्रशिक्षण भी प्रधानों को दिया गया था। जांच की रिपोर्ट जल निगम को आनी थी। एक भी प्रधान ने पानी की जांच नहीं कराई। अब तो उपकरण भी रद्दी हो गए हैं।
इनसेट
500 रुपये में कराएं पानी की जांच
अगर किसी को जल निगम के हैंडपंपों के पानी में कोई कमी महसूस होती है तो वह जलनिगम की प्रयोगशाला में उस हैंडपंप के पानी की जांच करा सकता है। निजी हैंडपंप और सबमर्सिबल के पानी की जांच भी 500 रुपये शुल्क देकर जल निगम की प्रयोगशाला में कराई जा सकती है।
वर्जन
लोगों को शुद्ध पेयजल मिले इसका पूरा प्रयास किया जाएगा। अगर जल निगम और नगरीय निकाय पेयजल की जांच में लापरवाही बरत रहे हैं तो उनसे जवाब मांगेंगे। सभी निकायों और गांवों में पेयजल स्रोतों की जांच कराई जाएगी। एक एनजीओ को जिम्मेदारी दी गई है। जो भी रिपोर्ट जाएगी उसके आधार पर आगे काम किया जाएगा। - विवेक वार्ष्णेय डीएम हरदोई