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तो सरकारी धान नहीं कूटेंगी मिलें
ब्यूूराे/अमर उजाला, हरदाेई
Updated Fri, 02 Oct 2015 11:42 PM IST
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राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार को
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चेताया कि अगर अवलंबन शुल्क होल्डिंग चार्ज नहीं हटाए गए तो इस साल प्रदेश
में राइस मिले सरकारी धान की कुटाई नहीं करेगी। कहा कि प्रदेश में चावल
उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
एसोसिएशन के लगातार चौथी बार अध्यक्ष बने राकेश अग्रवाल ने कहा कि देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली अनाज योजना का चावल अहम हिस्सा होने के बाद भी सरकारें इस ओर गंभीर नहीं है। पूरे देश में धान एवं चावल खरीद की एक समान नीति नहीं हैं। कहा कि यूपी के समीपवर्ती प्रदेशों में ही अलग नीतियां है और वहां की नीतियां जहां धान के उत्पादन को बढ़ावा दे रहीं, वहीं चावल उद्योग को मजबूत कर रही है।
प्रदेश में हरदोई, शाहजहांपुर सहित तमाम जिलों से धान और चावल दिल्ली, कर्नाटक के व्यापारियों द्वारा खरीदा जाता है। यहां का चावल गैर प्रदेशों में निजी स्तर पर पसंद किया जाता है। कहा कि यहां नियमों की आड़ में जहां वसूली की जाती है वहीं गोदामों की कमी से राइस मिलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जब सरकारी धान की कुटाई करने के बाद उसके डिलीवरी की अंतिम 30 जून तय होने के बाद इस तिथि के बाद डिलीवरी न लेने एवं धान का सरकारी मूल्य ब्याज समेत वसूलने का प्रावधान है, तो फिर राइस मिलर्स पर चावल की लाटवार अवलंबन शुल्क लगाने का क्या औचित्य है।
ज्ञात हो कि प्रदेश में करीब 45 सौ राइस मिले हैं, जिसमें 150 मिलें हरदोई में है। बताया कि इस साल सरकार ने लेबी चावल खत्म कर दिया है। ऐसे में बाजार में गिरावट रहेगी। कहा कि लेबी चावल में मिलर्स खुद धान खरीदता है और उससे चावल बनाकर सरकार को बेंचता है।
इसके लिए मिलर्स बड़े पैमाने पर धान की खरीद करते थे और बाजारों में बाहर के मिलर्स भी खरीद करते थे, जिससे बाजार में अच्छे किस्म के धान की खरीद के लिए प्रतिस्पर्धात्मक तेजी आती थी। बताया कि प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग धान खरीद एवं चावल डिलीवरी की तिथियां तय की गई जो उचित नहीं है। बताया कि इस ओर अन्य प्रदेशों के मुकाबले प्रदेश में ज्यादा समस्याएं हैं।
एसोसिएशन के लगातार चौथी बार अध्यक्ष बने राकेश अग्रवाल ने कहा कि देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली अनाज योजना का चावल अहम हिस्सा होने के बाद भी सरकारें इस ओर गंभीर नहीं है। पूरे देश में धान एवं चावल खरीद की एक समान नीति नहीं हैं। कहा कि यूपी के समीपवर्ती प्रदेशों में ही अलग नीतियां है और वहां की नीतियां जहां धान के उत्पादन को बढ़ावा दे रहीं, वहीं चावल उद्योग को मजबूत कर रही है।
प्रदेश में हरदोई, शाहजहांपुर सहित तमाम जिलों से धान और चावल दिल्ली, कर्नाटक के व्यापारियों द्वारा खरीदा जाता है। यहां का चावल गैर प्रदेशों में निजी स्तर पर पसंद किया जाता है। कहा कि यहां नियमों की आड़ में जहां वसूली की जाती है वहीं गोदामों की कमी से राइस मिलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जब सरकारी धान की कुटाई करने के बाद उसके डिलीवरी की अंतिम 30 जून तय होने के बाद इस तिथि के बाद डिलीवरी न लेने एवं धान का सरकारी मूल्य ब्याज समेत वसूलने का प्रावधान है, तो फिर राइस मिलर्स पर चावल की लाटवार अवलंबन शुल्क लगाने का क्या औचित्य है।
ज्ञात हो कि प्रदेश में करीब 45 सौ राइस मिले हैं, जिसमें 150 मिलें हरदोई में है। बताया कि इस साल सरकार ने लेबी चावल खत्म कर दिया है। ऐसे में बाजार में गिरावट रहेगी। कहा कि लेबी चावल में मिलर्स खुद धान खरीदता है और उससे चावल बनाकर सरकार को बेंचता है।
इसके लिए मिलर्स बड़े पैमाने पर धान की खरीद करते थे और बाजारों में बाहर के मिलर्स भी खरीद करते थे, जिससे बाजार में अच्छे किस्म के धान की खरीद के लिए प्रतिस्पर्धात्मक तेजी आती थी। बताया कि प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग धान खरीद एवं चावल डिलीवरी की तिथियां तय की गई जो उचित नहीं है। बताया कि इस ओर अन्य प्रदेशों के मुकाबले प्रदेश में ज्यादा समस्याएं हैं।