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पराली जलाने से रोकने को नायब ने दिया नायाब तरीका
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नायब सिंह।संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। पराली जलाने के कारण होने वाले प्रदूषण को लेकर किसानों पर कार्रवाई होता देखकर एक प्रगतिशील किसान ने इससे बचने का नायाब तरीका ढूंढा है। उन्होंने खेतों की पराली गोशाला में मवेशियों के लिए निशुल्क भेज दी। वहीं लगभग 150 किसानों को पराली के ढेर निशुल्क उपलब्ध करा चुके हैं। इसको लेकर वह प्रशासन को भी सुझाव दे चुके हैं।
बावन विकास खंड के ऐजा निवासी नायब सिंह के परिवार में अलग-अलग नामों से लगभग 90 एकड़ कृषि भूमि है। नायब सिंह मौसम के हिसाब से खेतों में फसल तैयार करते हैं। प्रगतिशील किसान के रूप में उनकी पहचान पूरे इलाके में है। इन दिनों खेतों में तैयार धान की फसल की कटाई के दौरान पराली जलाने को लेकर सख्ती हुई और जुर्माने की कार्रवाई होने लगी।
कृषि विभाग के उपनिदेशक ने प्रगतिशील किसानों और कंबाइन मशीन चालकों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान वहां मौजूद रहे नायब सिंह ने कुछ सुझाव दिए। नायब ने खुद ही इन सुझावों पर अमल करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने खेत में बची पराली ट्रैक्टर ट्राली के जरिये निजी खर्चे पर बावन गोशाला भेज दी।
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इसके बाद जो पराली उनके खेत में बची थी, उसके अलग-अलग ढेर बनवाए। 150 किसान चार से लेकर 40 बोझे तक पराली उनके यहां से निशुल्क ले गए। किसानों ने इस पराली का उपयोग जमीन पर बिस्तर बिछाने से पहले डालने के लिए किया, तो कुछ किसानों ने हरे चारे के साथ पराली के चारे को भी मवेशियों को खाने के लिए दिया। नायब सिंह का नायाब तरीका किसानों के लिए प्रेरणादायी है। इस तरह से पराली का प्रयोग होने से प्रदूषण भी नहीं होगा।
ये भी दिए सुझाव
- मनरेगा मजदूरों से पराली के बोझ बनवाने का कार्य लिया जाए। इससे मजदूरों को रोजगार भी मिलेगा।
- किसानों के खेतों से गोशालाओं तक पराली ले जाने की व्यवस्था गोशालाओं के संचालक व जिम्मेदार करें।
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बावन विकास खंड के ऐजा निवासी नायब सिंह के परिवार में अलग-अलग नामों से लगभग 90 एकड़ कृषि भूमि है। नायब सिंह मौसम के हिसाब से खेतों में फसल तैयार करते हैं। प्रगतिशील किसान के रूप में उनकी पहचान पूरे इलाके में है। इन दिनों खेतों में तैयार धान की फसल की कटाई के दौरान पराली जलाने को लेकर सख्ती हुई और जुर्माने की कार्रवाई होने लगी।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक ने प्रगतिशील किसानों और कंबाइन मशीन चालकों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान वहां मौजूद रहे नायब सिंह ने कुछ सुझाव दिए। नायब ने खुद ही इन सुझावों पर अमल करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने खेत में बची पराली ट्रैक्टर ट्राली के जरिये निजी खर्चे पर बावन गोशाला भेज दी।
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इसके बाद जो पराली उनके खेत में बची थी, उसके अलग-अलग ढेर बनवाए। 150 किसान चार से लेकर 40 बोझे तक पराली उनके यहां से निशुल्क ले गए। किसानों ने इस पराली का उपयोग जमीन पर बिस्तर बिछाने से पहले डालने के लिए किया, तो कुछ किसानों ने हरे चारे के साथ पराली के चारे को भी मवेशियों को खाने के लिए दिया। नायब सिंह का नायाब तरीका किसानों के लिए प्रेरणादायी है। इस तरह से पराली का प्रयोग होने से प्रदूषण भी नहीं होगा।
ये भी दिए सुझाव
- मनरेगा मजदूरों से पराली के बोझ बनवाने का कार्य लिया जाए। इससे मजदूरों को रोजगार भी मिलेगा।
- किसानों के खेतों से गोशालाओं तक पराली ले जाने की व्यवस्था गोशालाओं के संचालक व जिम्मेदार करें।