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नवरात्र : दर्शन करने से ही मां कालिका श्रद्धालु की पूरी करतीं मनोकामनाएं
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फोटो 25: मंदिर में मां कालिका का पूजन करते पुजारी उमाशंकर शुक्ल। संवाद
बेनीगंज। नवरात्र पर मां के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। ब्लॉक कोथावां भवानीपुर गांव के पास स्थित मां कालिका देवी मंदिर दिव्य और प्राचीन है। ऐसी मान्यता है कि यहां पर आते ही मन को शांति मिलती है। दर्शन मात्र से ही मां कालिका श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करती हैं।
आदि गंगा गोमती नदी के किनारे स्थित मंदिर की दिव्यता देखते ही बनती है। मां कालिका माता के पुजारी उमाशंकर शुक्ल ने बताया कि पौराणिक मान्यता है कि मां का स्वरूप चतुर्भुज है और स्वयंभू है। मां कालिका सिंह पर सवार हैं। बताया कि परिवार की आठवीं पीढ़ी लगातार मां की सेवा करती आ रही है। पूर्वजों के अनुसार गुरु वशिष्ठ से श्रापित होकर उद्दलक ऋषी ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। उद्दलक श्रषि की तपस्या से प्रसन्न होकर मां कलिका देवी ने दर्शन दिए थे। तभी से मां कालिका यहां पर विराजमान हैं। बताया कि नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना होती है।
डॉ. शेषमणि शुक्ला ने बताया कि ऐसे साक्ष्य मिलते हैं कि पानीपत के युद्ध के बाद पेशवा बाजीराव द्वितीय ने यहां पर माता की साधना और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। आनंदपुर निवासी राकेश तिवारी ने बताया कि मां कालिका देवी के दरबार में जाने मात्र ही से ही सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। आसपास के गांव की बेटियों के बड़े पुत्र की देवाई संस्कार भी यहीं पर होते हैं। जरौआ प्रधान कपिल सिंह ने बताया कि मां कलिका सिकरवार क्षत्रियों की कुल देवी हैं, मां कालिका के दरबार से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता, सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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आदि गंगा गोमती नदी के किनारे स्थित मंदिर की दिव्यता देखते ही बनती है। मां कालिका माता के पुजारी उमाशंकर शुक्ल ने बताया कि पौराणिक मान्यता है कि मां का स्वरूप चतुर्भुज है और स्वयंभू है। मां कालिका सिंह पर सवार हैं। बताया कि परिवार की आठवीं पीढ़ी लगातार मां की सेवा करती आ रही है। पूर्वजों के अनुसार गुरु वशिष्ठ से श्रापित होकर उद्दलक ऋषी ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। उद्दलक श्रषि की तपस्या से प्रसन्न होकर मां कलिका देवी ने दर्शन दिए थे। तभी से मां कालिका यहां पर विराजमान हैं। बताया कि नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना होती है।
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डॉ. शेषमणि शुक्ला ने बताया कि ऐसे साक्ष्य मिलते हैं कि पानीपत के युद्ध के बाद पेशवा बाजीराव द्वितीय ने यहां पर माता की साधना और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। आनंदपुर निवासी राकेश तिवारी ने बताया कि मां कालिका देवी के दरबार में जाने मात्र ही से ही सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। आसपास के गांव की बेटियों के बड़े पुत्र की देवाई संस्कार भी यहीं पर होते हैं। जरौआ प्रधान कपिल सिंह ने बताया कि मां कलिका सिकरवार क्षत्रियों की कुल देवी हैं, मां कालिका के दरबार से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता, सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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