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बंदर बने परेशानी का सबब, फसलों की रखवाली हुई मुश्किल
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फोटो-17- खेत में फसल नष्ट करते बंदर। संवाद
- फोटो : HARDOI
नगर व क्षेत्र में बंदरों का आतंक दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। बंदरों की बढ़ती तादात से सबसे ज्यादा समस्या किसानों को हो रही है। किसानों का कहना है कि बंदर खेत में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई बार बंदर हमला कर लोगों को घायल भी कर चुके हैं।
छुट्टा मवेशियों के साथ ही बंदरों की बढ़ती तादात ने कस्बा निवासी लोगों समेत क्षेत्र के किसानों को परेशान कर रखा है। लोगों को कहना है कि अक्सर बंदर घरेलू चीजें उठा ले जाते हैं। यही नहीं हमला कर लोगों को घायल भी कर देते हैं। वहीं, ग्रामीण अंचल के किसानों का कहना है क्षेत्र में छुट्टा मवेशियों की संख्या पर्याप्त है।
उनसे फसल बचाना मुश्किल होता है। भगाने पर पूरे का पूरे झुंड हमलावर हो जाता है। ऐसे में अपनी जान बचाकर भागना पड़ता है। बताया कि पहले सब सामान्य था, लेकिन लगभग दस साल पहले यहां बंदरों का दखल शुरू हुआ।
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देखते ही देखते बंदरों की तादात कई गुना बढ़ गई है। किसानों ने बताया कि वह बंदरों की पकड़वाने के लिए अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
पाली निवासी राजकुमार ने बताया कि बंदरों द्वारा लगातार फसल बर्बाद की जाती है। इससे परेशान होकर उन्होंने खेत परती/खाली छोड़ दिया है।
बताया कि सिर्फ पाली ही नहीं अतरजी, बेगराजपुर, गुपलापुर, ददेउरा, बाबरपुर, भगवंतपुर, सहजनपुर, निजामपुर, लौकहा व थरिया आदि गांवों में भी स्थिति काफी खराब हो चली है। बंदरों से परेशान कुछ किसानों ने गेहूं, धान व गन्ना की खेती करना छोड़ दिया है। मजबूरन लोग पिपरमिंट की खेती करने लगे हैं।
पाली निवासी मोहन कश्यप का कहना है कि बंदर फसलों को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। प्रशासन को किसानों को इससे निजात दिलाने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए। जल्द ही इसको लेकर निर्णय न लिया गया तो क्षेत्र में खेती करना भी मुश्किल हो जाएगा।
पाली निवासी भारती देवी ने बताया कि घरों में सामान बचाने के लिए महिलाओं को व खेतों में फसल बचाने को किसानों को मोर्चा संभालना पड़ता है। भगाने पर कई बार बंदर हमला भी कर देते हैं, ऐसे में खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
पाली कस्बा निवासी सिरकी कश्यप का कहना है कि बंदर झुंड में खेतों में तैयार खड़ी फसल पर धावा बोलते हैं। कुछ ही देर में फसल को तहस नहस कर देते हैं। बताया कि उन्होंने तीन बीघा खेत में पत्ता गोभी की सब्जी की थी, जिसे बंदरों के झुंड ने पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। प्रशासन से मांग है कि बंदरों को पकड़ कर कहीं दूर जंगलों में छुड़वाया जाए।
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छुट्टा मवेशियों के साथ ही बंदरों की बढ़ती तादात ने कस्बा निवासी लोगों समेत क्षेत्र के किसानों को परेशान कर रखा है। लोगों को कहना है कि अक्सर बंदर घरेलू चीजें उठा ले जाते हैं। यही नहीं हमला कर लोगों को घायल भी कर देते हैं। वहीं, ग्रामीण अंचल के किसानों का कहना है क्षेत्र में छुट्टा मवेशियों की संख्या पर्याप्त है।
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उनसे फसल बचाना मुश्किल होता है। भगाने पर पूरे का पूरे झुंड हमलावर हो जाता है। ऐसे में अपनी जान बचाकर भागना पड़ता है। बताया कि पहले सब सामान्य था, लेकिन लगभग दस साल पहले यहां बंदरों का दखल शुरू हुआ।
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देखते ही देखते बंदरों की तादात कई गुना बढ़ गई है। किसानों ने बताया कि वह बंदरों की पकड़वाने के लिए अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
पाली निवासी राजकुमार ने बताया कि बंदरों द्वारा लगातार फसल बर्बाद की जाती है। इससे परेशान होकर उन्होंने खेत परती/खाली छोड़ दिया है।
बताया कि सिर्फ पाली ही नहीं अतरजी, बेगराजपुर, गुपलापुर, ददेउरा, बाबरपुर, भगवंतपुर, सहजनपुर, निजामपुर, लौकहा व थरिया आदि गांवों में भी स्थिति काफी खराब हो चली है। बंदरों से परेशान कुछ किसानों ने गेहूं, धान व गन्ना की खेती करना छोड़ दिया है। मजबूरन लोग पिपरमिंट की खेती करने लगे हैं।
पाली निवासी मोहन कश्यप का कहना है कि बंदर फसलों को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। प्रशासन को किसानों को इससे निजात दिलाने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए। जल्द ही इसको लेकर निर्णय न लिया गया तो क्षेत्र में खेती करना भी मुश्किल हो जाएगा।
पाली निवासी भारती देवी ने बताया कि घरों में सामान बचाने के लिए महिलाओं को व खेतों में फसल बचाने को किसानों को मोर्चा संभालना पड़ता है। भगाने पर कई बार बंदर हमला भी कर देते हैं, ऐसे में खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
पाली कस्बा निवासी सिरकी कश्यप का कहना है कि बंदर झुंड में खेतों में तैयार खड़ी फसल पर धावा बोलते हैं। कुछ ही देर में फसल को तहस नहस कर देते हैं। बताया कि उन्होंने तीन बीघा खेत में पत्ता गोभी की सब्जी की थी, जिसे बंदरों के झुंड ने पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। प्रशासन से मांग है कि बंदरों को पकड़ कर कहीं दूर जंगलों में छुड़वाया जाए।