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अब मोदी के गांव से होगी चौका चेतना की शुरुआत
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 06 Apr 2015 12:47 AM IST
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नेचुरोपैथ डा. राजेश मिश्रा द्वारा चौका चेतना शिविर
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लगाकर लोगों को स्वस्थ रहने के बारे में न केवल जानकारी दी जाएगी, बल्कि
चौका के महत्व एवं शुद्धता के बारे में जागरूक किया जाएगा। यह शिविर उनके
द्वारा सांसद आदर्श ग्राम योजना में सांसदों द्वारा चुने गए गांवों में
लगाए जाएंगे।
शिविर की शुरुआत 7 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बतौर सांसद गोद लिए गए बनारस के गांव जयापुर से होगी। जिसके बाद सोनिया गांधी सहित अन्य सांसदों द्वारा गोद लिए गांवोें में भी शिविर लगाए जाएंगे। पत्रकारों को बताया कि जिस तादाद से बीमारियां बढ़ रहीं और लोगों को काफी कम उम्र से ही कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा, इसके पीछे सबसे अहम कारण खानपान है।
स्वस्थ रहना है तो खानपान ठीक रखना होगा। खानपान की शुरुआत रसोई से होती है और रसोई का अहम हिस्सा है चौका, इसलिए वे चौका चेतना शिविरों का आयोजन होगा। चौका चेतना में वे लोगों को बताएंगे चौका चार चीजों से बना है जिसमें क्षेत्र, दृव्य, काल, भाव है।
मतलब साफ है कि हमारे रसोई घर का क्षेत्र शुद्ध होने के साथ जहां बैठकर भोजन करते हैं, वो स्थान शुद्ध हो और जो भोजन कर रहे, उसके दृव्य ईमानदारी का हो। भोजन का समय निश्चित हो और भोजन पकाने से लेकर परोसने एवं खाने के प्रति रुचि अच्छी हो।
कहा कि ऐसा करने से विश्वास है कि स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी, क्योंकि जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन। बताया कि आयोजन के प्रथम चरण में बनारस, लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ मंडल के जिलों को लिया गया है।
शिविर की शुरुआत 7 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बतौर सांसद गोद लिए गए बनारस के गांव जयापुर से होगी। जिसके बाद सोनिया गांधी सहित अन्य सांसदों द्वारा गोद लिए गांवोें में भी शिविर लगाए जाएंगे। पत्रकारों को बताया कि जिस तादाद से बीमारियां बढ़ रहीं और लोगों को काफी कम उम्र से ही कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा, इसके पीछे सबसे अहम कारण खानपान है।
स्वस्थ रहना है तो खानपान ठीक रखना होगा। खानपान की शुरुआत रसोई से होती है और रसोई का अहम हिस्सा है चौका, इसलिए वे चौका चेतना शिविरों का आयोजन होगा। चौका चेतना में वे लोगों को बताएंगे चौका चार चीजों से बना है जिसमें क्षेत्र, दृव्य, काल, भाव है।
मतलब साफ है कि हमारे रसोई घर का क्षेत्र शुद्ध होने के साथ जहां बैठकर भोजन करते हैं, वो स्थान शुद्ध हो और जो भोजन कर रहे, उसके दृव्य ईमानदारी का हो। भोजन का समय निश्चित हो और भोजन पकाने से लेकर परोसने एवं खाने के प्रति रुचि अच्छी हो।
कहा कि ऐसा करने से विश्वास है कि स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी, क्योंकि जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन। बताया कि आयोजन के प्रथम चरण में बनारस, लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ मंडल के जिलों को लिया गया है।