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ढाई वर्ष से लापता पति-पत्नी की हत्या का खुलासा
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हरदोई। शाहाबाद कोतवाली पुलिस ने ढाई वर्ष पहले अलग-अलग स्थानों से पति और पत्नी के शव मिलने की घटना का खुलासा कर दिया है। बेटी के जेवरों को लेकर विवाद होने पर ससुर ने दामाद की हत्या कर शव फेंक दिया था। परिवार को बर्बाद करने का आरोप लगाने पर बेटी की भी ईंटों से सिर कूंचकर हत्या कर दी थी। मामले में आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
शाहजहांपुर के कटरा थाना क्षेत्र के ग्राम मढ़िया भमौरी निवासी सेवाराम ने तीन दिसंबर 2019 को कोर्ट के आदेश पर शाहाबाद कोतवाली में पुत्र दिलीप कुमार को मारपीट कर गायब कर देने की रिपोर्ट चार लोगों के विरुद्ध दर्ज कराई थी। एसपी अनुराग वत्स ने बताया कि शाहाबाद कोतवाल शिवशंकर सिंह को जांच के निर्देश दिए गए थे। एसपी ने बताया कि दिलीप की ससुराल शाहाबाद कोतवाली क्षेेत्र के ग्राम हसनापुर में थी। अप्रैल 2018 में दिलीप के भाइयों की शादी थी। 20 अप्रैल को वह कार्ड देने ससुराल हसनापुर आया था। इसी दौरान पत्नी के जेवरों को लेकर दिलीप का विवाद ससुर रामलड़ैते से हो गया।
ससुर से हुई मारपीट में दिलीप की मौत हो गई तो रामलड़ैते ने दो करीबियों लालू पुत्र तानाशाह निवासी ग्राम हर्रई कोतवाली शाहाबाद और राजेंद्र निवासी कोडना सरैया के साथ मिलकर दिलीप का शव सेहरामऊ के निकट रेलवे ट्रैक पर डाल दिया था। सेहरामऊ पुलिस ने अज्ञात में शव बरामद कर अंतिम संस्कार कर दिया। दिलीप की पत्नी सोनी ने पिता रामलड़ैतेे से नाराजगी जताई। इस पर रामलड़ैते ने पुत्र ब्रजेश और पत्नी रामबेटी के साथ मिलकर पुत्री सोनी की ईंटों से सिर कुचलकर हत्या कर दी और शव ग्राम आगापुर में गन्ने की पत्तियों के बीच डाल दिया। 13 मई 2018 को सोनी का शव शाहाबाद कोतवाली पुलिस को पड़ा मिला, लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। शाहाबाद कोतवाली पुलिस ने दोनों घटनाओं में रामलड़ैते, लालू और राजेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पूरी घटना को हत्या, साक्ष्य मिटाने, हत्या का षड्यंत्र रचने की धाराओं में तरमीम किया गया है।
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सोचा था कि कारनामा कभी नहीं खुलेगा
दामाद दिलीप और बेटी सोनी की हत्या करने के बाद रामलड़ैते ने हसनापुर में मकान और खेत बेच दिया था। इसके बाद वह पत्नी रामबेटी के साथ उन्नाव जनपद के बांगरमऊ कस्बे के मोहल्ला प्रेमगंज में रहने लगा था। रामलड़ैते तक पहुंचने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। रामलड़ैते समझ रहा था कि उसके कारनामे कभी खुलेंगे नहीं, लेकिन ढाई साल बाद पुलिस ने पूरी घटना का खुलासा कर दिया। एसपी ने खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। पूरी घटना में खास बात यह भी है कि मृतकों की आठ माह की पुत्री को हत्यारोपी लखनऊ में मेडिकल कालेज के पास सड़क किनारे छोड़ आए थे, जिसका पता लगाने की कोशिश पुलिस कर रही है।
कर्ज से हुई शुरुआत ने तबाह कर दिया परिवार
सूत्रों के मुताबिक रामलड़ैते ने कुछ वर्ष पहले अलग-अलग लोगों से कर्ज ले लिया था। कर्ज चुकाने के लिए उसने दामाद दिलीप से पुत्री सोनी के जेवर मांग लिए थे। जेवर गिरवी रखने और जरूरत पर वापस दिला देने की बात कही थी, लेकिन रामलड़ैते ने जेवर बेच दिए। 20 अप्रैल को दिलीप पत्नी सोनी के साथ ससुराल कार्ड देने आया था और इसी दौरान उसने गिरवी जेवर वापस उठाने को कहा था। इस पर विवाद हो गया और फिर दिलीप की हत्या कर दी गई। दिलीप की हत्या का मामला छिपाने के लिए लगभग एक माह बाद सोनी की भी हत्या कर दी गई।
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शाहजहांपुर के कटरा थाना क्षेत्र के ग्राम मढ़िया भमौरी निवासी सेवाराम ने तीन दिसंबर 2019 को कोर्ट के आदेश पर शाहाबाद कोतवाली में पुत्र दिलीप कुमार को मारपीट कर गायब कर देने की रिपोर्ट चार लोगों के विरुद्ध दर्ज कराई थी। एसपी अनुराग वत्स ने बताया कि शाहाबाद कोतवाल शिवशंकर सिंह को जांच के निर्देश दिए गए थे। एसपी ने बताया कि दिलीप की ससुराल शाहाबाद कोतवाली क्षेेत्र के ग्राम हसनापुर में थी। अप्रैल 2018 में दिलीप के भाइयों की शादी थी। 20 अप्रैल को वह कार्ड देने ससुराल हसनापुर आया था। इसी दौरान पत्नी के जेवरों को लेकर दिलीप का विवाद ससुर रामलड़ैते से हो गया।
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ससुर से हुई मारपीट में दिलीप की मौत हो गई तो रामलड़ैते ने दो करीबियों लालू पुत्र तानाशाह निवासी ग्राम हर्रई कोतवाली शाहाबाद और राजेंद्र निवासी कोडना सरैया के साथ मिलकर दिलीप का शव सेहरामऊ के निकट रेलवे ट्रैक पर डाल दिया था। सेहरामऊ पुलिस ने अज्ञात में शव बरामद कर अंतिम संस्कार कर दिया। दिलीप की पत्नी सोनी ने पिता रामलड़ैतेे से नाराजगी जताई। इस पर रामलड़ैते ने पुत्र ब्रजेश और पत्नी रामबेटी के साथ मिलकर पुत्री सोनी की ईंटों से सिर कुचलकर हत्या कर दी और शव ग्राम आगापुर में गन्ने की पत्तियों के बीच डाल दिया। 13 मई 2018 को सोनी का शव शाहाबाद कोतवाली पुलिस को पड़ा मिला, लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। शाहाबाद कोतवाली पुलिस ने दोनों घटनाओं में रामलड़ैते, लालू और राजेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पूरी घटना को हत्या, साक्ष्य मिटाने, हत्या का षड्यंत्र रचने की धाराओं में तरमीम किया गया है।
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सोचा था कि कारनामा कभी नहीं खुलेगा
दामाद दिलीप और बेटी सोनी की हत्या करने के बाद रामलड़ैते ने हसनापुर में मकान और खेत बेच दिया था। इसके बाद वह पत्नी रामबेटी के साथ उन्नाव जनपद के बांगरमऊ कस्बे के मोहल्ला प्रेमगंज में रहने लगा था। रामलड़ैते तक पहुंचने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। रामलड़ैते समझ रहा था कि उसके कारनामे कभी खुलेंगे नहीं, लेकिन ढाई साल बाद पुलिस ने पूरी घटना का खुलासा कर दिया। एसपी ने खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। पूरी घटना में खास बात यह भी है कि मृतकों की आठ माह की पुत्री को हत्यारोपी लखनऊ में मेडिकल कालेज के पास सड़क किनारे छोड़ आए थे, जिसका पता लगाने की कोशिश पुलिस कर रही है।
कर्ज से हुई शुरुआत ने तबाह कर दिया परिवार
सूत्रों के मुताबिक रामलड़ैते ने कुछ वर्ष पहले अलग-अलग लोगों से कर्ज ले लिया था। कर्ज चुकाने के लिए उसने दामाद दिलीप से पुत्री सोनी के जेवर मांग लिए थे। जेवर गिरवी रखने और जरूरत पर वापस दिला देने की बात कही थी, लेकिन रामलड़ैते ने जेवर बेच दिए। 20 अप्रैल को दिलीप पत्नी सोनी के साथ ससुराल कार्ड देने आया था और इसी दौरान उसने गिरवी जेवर वापस उठाने को कहा था। इस पर विवाद हो गया और फिर दिलीप की हत्या कर दी गई। दिलीप की हत्या का मामला छिपाने के लिए लगभग एक माह बाद सोनी की भी हत्या कर दी गई।