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Hardoi News: 43 डिग्री में भट्ठी बना मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी वार्ड, तड़प रहे मरीज
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फोटो-19- टीनशेड के नीचे वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावों के बीच इमरजेंसी वार्ड की हालत अत्यंत दयनीय है। 43 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में इमरजेंसी वार्ड का ट्राएज एरिया और ग्रीन जोन भट्टी बना हुआ है। इन वार्डों में भर्ती घायल और गंभीर रोगी पसीने से तर-बतर होने को मजबूर हैं। वहीं गर्मी से निपटने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं हैं। वार्ड सिर्फ पंखों के भरोसे चल रहे हैं जबकि मरीजों के लिए रखे कूलर भी गर्म हवाएं ही फेंक रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की बदइंतजामी का खामियाजा मरीज और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है और डॉक्टर व स्टाफ इमरजेंसी में भी एसी कक्षों में सुकून से ड्यूटी करने की खानापूर्ति कर रहे हैं।
दृश्य-1-
टिनशेड के नीचे उबल रहे मरीज, बिन पानी बेअसर कूलर
इमरजेंसी का ग्रीन जोन टिनशेड के नीचे ही बना हुआ है। इसमें 12 बेड पड़े हुए हैं। वार्ड में एसी तो लगा नहीं है, पूरे वार्ड में सिर्फ तीन कूलर लगे हैं लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण इनमें पानी तक नहीं भरा जाता। पानी के अभाव में ये कूलर ठंडी हवा देने के बजाय सीधे आग उगल रहे हैं। जिम्मेदार कर्मचारियों की मनमानी का आलम यह है कि तीमारदार खुद हाथ का पंखा करके अपने मरीजों को राहत देने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। तीमारदार अनीता ने बताया कि दिन में टिनशेड काफी गर्म हो जाता है। बिस्तर पर लेटना मुश्किल हो जाता है। बिना ठंडी हवा के मरीज तड़पने को मजबूर हैं।
दृश्य-2-
ट्राएज एरिया में पसीने से तर-बतर गंभीर मरीज, रेंग रहे पंखे
ऐसा ही कुछ हाल इमरजेंसी के मुख्य ट्राएज एरिया का भी है। एक्सीडेंट और गंभीर हालत में तड़पते हुए जो मरीज सबसे पहले यहां पहुंचते हैं उन्हें राहत मिलने के बजाय गर्मी का पहला झटका लगता है। वार्ड में लगे पंखों की हवा ही नहीं लगती है। मरीजों के लिए यहां पर भी कूलर लगाए गए हैं लेकिन उनमें भी पानी नहीं भरा जाता। घावों पर मक्खियां भिनभिना रही हैं और पसीने के कारण संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
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डॉक्टर और स्टाफ के लिए व्यवस्थाएं चाक-चौबंद
एक तरफ जहां मरीज पसीने से तर-बतर होकर तड़प रहे हैं वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर और स्टाफ के कक्षों में सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और स्टाफ के केबिनों में एसी चल रहे हैं। बाहर चाहे कितनी भी चिलचिलाती धूप या गर्मी हो लेकिन केबिन के अंदर का तापमान डॉक्टरों को पूरा सुकून दे रहा है।
इमरजेंसी वार्ड को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। वार्डों में लगे कूलरों में पानी भरवाने के भी निर्देश दिए गए हैं अगर कहीं कार्यों में लापरवाही हो रही है तो इसकी जानकारी करवाकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करवाई जाएंगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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दृश्य-1-
टिनशेड के नीचे उबल रहे मरीज, बिन पानी बेअसर कूलर
इमरजेंसी का ग्रीन जोन टिनशेड के नीचे ही बना हुआ है। इसमें 12 बेड पड़े हुए हैं। वार्ड में एसी तो लगा नहीं है, पूरे वार्ड में सिर्फ तीन कूलर लगे हैं लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण इनमें पानी तक नहीं भरा जाता। पानी के अभाव में ये कूलर ठंडी हवा देने के बजाय सीधे आग उगल रहे हैं। जिम्मेदार कर्मचारियों की मनमानी का आलम यह है कि तीमारदार खुद हाथ का पंखा करके अपने मरीजों को राहत देने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। तीमारदार अनीता ने बताया कि दिन में टिनशेड काफी गर्म हो जाता है। बिस्तर पर लेटना मुश्किल हो जाता है। बिना ठंडी हवा के मरीज तड़पने को मजबूर हैं।
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दृश्य-2-
ट्राएज एरिया में पसीने से तर-बतर गंभीर मरीज, रेंग रहे पंखे
ऐसा ही कुछ हाल इमरजेंसी के मुख्य ट्राएज एरिया का भी है। एक्सीडेंट और गंभीर हालत में तड़पते हुए जो मरीज सबसे पहले यहां पहुंचते हैं उन्हें राहत मिलने के बजाय गर्मी का पहला झटका लगता है। वार्ड में लगे पंखों की हवा ही नहीं लगती है। मरीजों के लिए यहां पर भी कूलर लगाए गए हैं लेकिन उनमें भी पानी नहीं भरा जाता। घावों पर मक्खियां भिनभिना रही हैं और पसीने के कारण संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
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डॉक्टर और स्टाफ के लिए व्यवस्थाएं चाक-चौबंद
एक तरफ जहां मरीज पसीने से तर-बतर होकर तड़प रहे हैं वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर और स्टाफ के कक्षों में सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और स्टाफ के केबिनों में एसी चल रहे हैं। बाहर चाहे कितनी भी चिलचिलाती धूप या गर्मी हो लेकिन केबिन के अंदर का तापमान डॉक्टरों को पूरा सुकून दे रहा है।
इमरजेंसी वार्ड को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। वार्डों में लगे कूलरों में पानी भरवाने के भी निर्देश दिए गए हैं अगर कहीं कार्यों में लापरवाही हो रही है तो इसकी जानकारी करवाकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करवाई जाएंगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

फोटो-19- टीनशेड के नीचे वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद

फोटो-19- टीनशेड के नीचे वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद