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Hardoi News: माता सती का गिरा है यहां पर कान, नाम पड़ा श्रवण देवी शक्तिपीठ

Sat, 14 Oct 2023 11:29 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Oct 2023 11:29 PM IST
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Mata Sati's ear fell here, it was named Shravan Devi Shaktipeeth
संवाद न्यूज एजेंसी
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हरदोई। माता सती का यहां पर कान गिरा है और इसी वजह से शक्तिपीठ का नाम श्रवण देवी पड़ा है। मान्यता है कि श्रवण देवी शक्तिपीठ में श्रद्धा, विश्वास पूजन-अर्चन करते हैं उन भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार प्रजापति राजा दक्ष के यहां यज्ञ में भगवान शंकर के अपमान को सहन न कर माता पार्वती क्रोधित हो गईं और यज्ञ कुंड में कूद कर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। ध्यान में मग्न भगवान शंकर को जब माता पार्वती के सती होने की जानकारी हुई तो वह क्रोधित हो उठे। उन्होंने सती हुई पार्वतीजी के जले शरीर को लेकर चारों ओर नृत्य शुरू कर दिया।
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भगवान शंकर के क्राेध को किसी के भी वश में शांत कराने की क्षमता न देख, तब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के अंग-प्रत्यंग काटना शुरू किया। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माता सती का जो अंग जहां गिरा वहीं उसी नामानुसार सिद्धपीठ बन गया। माता सती जी के शरीर का कान भाग इस स्थल पर गिरा था। इससे इसका नाम श्रवण देवी शक्तिपीठ नाम हो गया। इसका उल्लेख भागवत के 529वें नाम के रूप में मिलता है।
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पुजारी रामविलास ने बताया कि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार जब विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के अंग काटे तो यहां पर माता सती का कर्ण भाग गिरा था। इसी स्थल पर एक पीपल का एक प्राचीन वृक्ष था, उसी में श्रवण देवी जी की प्राचीन लाल पत्थर की मूर्ति प्राप्त हुई थी। उस समय के पीपल वृक्ष में स्वयं देवी-देवताओं की आकृतियां बनती-बिगड़ती रहती थीं। पुराना पीपल का वृक्ष गिर गया है।

मंदिर करीब 130 साल पुराना है और स्थल का विकास साल 1880 में सेठ सामालिया प्रसाद ने कराया था। बताया जाता है कि जब देवीजी उनके स्वप्न में आईं तो इस मंदिर का विकास करवाया गया। सिद्धपीठ मंदिर के बारे में कहा जाता है कि नवरात्र में ही नहीं बल्कि पूरे साल यहां पर अपनी मनोकामना लेकर आने वाले मां का आशीर्वाद लेकर ही जाते हैं।
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