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‘मनुष्य को भुगतना पड़ता कर्मों का फल’
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 03 Mar 2015 12:33 AM IST
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श्रीमद्भागवत महापुराण एवं साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन कथा व्यास
पंडित सुधाकर पांडेय ने सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं को कथा का
रसास्वादन कराते हुए कहा कि मानव द्वारा किए गए शुभ-अशुभ कर्मों का फल हर
हाल में भुगतना पड़ता है।
कथा व्यास ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा जी ने जितने चने के दाने कृष्ण भगवान के हिस्से के चबाए थे, उतने ही वर्षों सुदामा जी को दरिद्रता भोगनी पड़ी। इतना ही नहीं रामावतार में भगवान श्रीराम को भी ब्रह्मदोष का शिकार होना पड़ा। श्रीराम को लगा वहीं दोष हत्याहरण तीर्थ पर मुचित हुआ था।
आचार्य गिरजा शंकर शुक्ल ने बताया कि सच्चे भाव से ही ईश्वर के दर्शन प्राप्त होते हैं, जबकि प्राणी जन्म लेने से पूर्व परमात्मा से यह वादा करके आता है कि जन्म के बाद वह सुंस्कृति कार्यों को ही करेगा। पर, जन्म के बाद माया मोह में फंसकर प्रभु से किए गए वादों को भूलकर स्वार्थ की भावना के चलते अपने रास्ते से विचलित हो जाता है, जिससे उसे अनेकानेक कष्ट भोगने पड़ते है।
कथा के समापन के बाद कार्यक्रम में भाग लेने आए संत विद्वानों ने हवन कुंड में आहुतियां दी तथा विश्व के कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर चंद्रप्रकाश मिश्र, लक्ष्मी नारायन तिवारी, दयाशंकर पांडेय, सतीश नरायन तिवारी और कृष्ण कुमार आदि लोग मौजूद थे। इस दौरान भंडारे का आयोजन किया गया।
कथा व्यास ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा जी ने जितने चने के दाने कृष्ण भगवान के हिस्से के चबाए थे, उतने ही वर्षों सुदामा जी को दरिद्रता भोगनी पड़ी। इतना ही नहीं रामावतार में भगवान श्रीराम को भी ब्रह्मदोष का शिकार होना पड़ा। श्रीराम को लगा वहीं दोष हत्याहरण तीर्थ पर मुचित हुआ था।
आचार्य गिरजा शंकर शुक्ल ने बताया कि सच्चे भाव से ही ईश्वर के दर्शन प्राप्त होते हैं, जबकि प्राणी जन्म लेने से पूर्व परमात्मा से यह वादा करके आता है कि जन्म के बाद वह सुंस्कृति कार्यों को ही करेगा। पर, जन्म के बाद माया मोह में फंसकर प्रभु से किए गए वादों को भूलकर स्वार्थ की भावना के चलते अपने रास्ते से विचलित हो जाता है, जिससे उसे अनेकानेक कष्ट भोगने पड़ते है।
कथा के समापन के बाद कार्यक्रम में भाग लेने आए संत विद्वानों ने हवन कुंड में आहुतियां दी तथा विश्व के कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर चंद्रप्रकाश मिश्र, लक्ष्मी नारायन तिवारी, दयाशंकर पांडेय, सतीश नरायन तिवारी और कृष्ण कुमार आदि लोग मौजूद थे। इस दौरान भंडारे का आयोजन किया गया।