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Hardoi News: नाबालिग से दुष्कर्म में दोषी को सात साल का कारावास
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। नाबालिग से दुष्कर्म के दस साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मनमोहन सिंह ने दोषी प्रताप को सात साल की सजा सुनाई है। बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। मल्लावां कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 27 जुलाई 2016 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसकी पुत्री (17) अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई करती थी। 25 जुलाई 2016 को हाईस्कूल का अंकपत्र लेने गौसगंज के एक विद्यालय में गई थी। दो दिन बीत जाने के बाद भी घर न आने पर उसकी तलाश की गई। पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के आठ माह बाद पुलिस ने किशोरी को खोज लिया था।
पुलिस ने उसे ले जाने वाले तिरहटिया निवासी प्रताप को भी गिरफ्तार किया था। बयान में किशोरी ने कहा था कि घटना के दिन वह अंक पत्र लेकर घर जा रही थी। तिरहटिया मोड़ पर प्रताप ने उसे जबरन पकड़ लिया था और इसके बाद किसी शहर ले गया था। यहां दुष्कर्म किया था। शिकायत करने पर नाना-नानी की हत्या करने की धमकी दी थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए थे।
11 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि अभियुक्त नाबालिग को बहलाकर ले गया था और उसके साथ दुष्कर्म किया था। अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्काें को सुनने और पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने पाया कि दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था।
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साक्ष्य से ऐसा प्रतीत नहीं हाे रहा है कि आरोपी किशोरी को जबरन अपने साथ ले गया था। बहलाकर ले जाने की धाराओं में दोष मुक्त करते हुए दुष्कर्म की धाराओं मेें सजा सुनाई है।
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हरदोई। नाबालिग से दुष्कर्म के दस साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मनमोहन सिंह ने दोषी प्रताप को सात साल की सजा सुनाई है। बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। मल्लावां कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 27 जुलाई 2016 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसकी पुत्री (17) अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई करती थी। 25 जुलाई 2016 को हाईस्कूल का अंकपत्र लेने गौसगंज के एक विद्यालय में गई थी। दो दिन बीत जाने के बाद भी घर न आने पर उसकी तलाश की गई। पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के आठ माह बाद पुलिस ने किशोरी को खोज लिया था।
पुलिस ने उसे ले जाने वाले तिरहटिया निवासी प्रताप को भी गिरफ्तार किया था। बयान में किशोरी ने कहा था कि घटना के दिन वह अंक पत्र लेकर घर जा रही थी। तिरहटिया मोड़ पर प्रताप ने उसे जबरन पकड़ लिया था और इसके बाद किसी शहर ले गया था। यहां दुष्कर्म किया था। शिकायत करने पर नाना-नानी की हत्या करने की धमकी दी थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए थे।
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11 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि अभियुक्त नाबालिग को बहलाकर ले गया था और उसके साथ दुष्कर्म किया था। अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्काें को सुनने और पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने पाया कि दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था।
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साक्ष्य से ऐसा प्रतीत नहीं हाे रहा है कि आरोपी किशोरी को जबरन अपने साथ ले गया था। बहलाकर ले जाने की धाराओं में दोष मुक्त करते हुए दुष्कर्म की धाराओं मेें सजा सुनाई है।