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अंग्रेजों को भारत का स्वतंत्रता इतिहास पढ़ा रहा मल्लावां का लाल

Sun, 07 Feb 2021 11:14 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 07 Feb 2021 11:14 PM IST
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Mallavan's Lal was teaching British India's independence history
अरुण कुमार। संवाद - फोटो : HARDOI
हरदोई। भारत पर राज करने वाले जिन अंग्रेजों का इतिहास जानने के लिए हमारे पूर्वज लालायित रहते थे, आज उन्हीं के बच्चों को हरदोई का लाल हिंदुस्तान की आजादी के आंदोलन की गाथा पढ़ा रहा है।
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उन्हें यह भी बता रहा है कि किस तरह कभी न डूबने वाला बर्तानिया साम्राज्य का सूर्य यहां के वीर जवानों और आजादी के दीवानों ने अस्त कर दिया। हम यहां बात कर रहे हैं इंग्लैंड के लंदन नॉटिंघम यूनिवर्सिटी में इतिहास पढ़ा रहे मल्लावां विकास खंड के ग्राम कलेनापुर निवासी अरुण कुमार की।
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अरुण कुमार की इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई मल्लावां में ही हुई। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई इतिहास विषय से दिल्ली विश्वविद्यालय से की। इतिहास से ही परास्नातक भी दिल्ली विश्वविद्यालय से किया।
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दिल्ली विश्वविद्यालय का टॉपर होने पर उन्हें स्वर्ण पदक भी मिला। वर्ष 2019 में इंग्लैंड की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर के रूप में सेवा देेने चले गए। अरुण कुमार वहां भारत के स्वतंत्रता का इतिहास पढ़ाते हैं। वे स्वतंत्रता आंदोलन में मल्लावां के स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान भी बताते हैं। वह ब्रिटिश साम्राज्य के इतिहास पर भी व्याख्यान देते हैं।
इंग्लैंड में पढ़ाने के अनुभव के बारे में अरुण कुमार ने फोन पर बताया कि पहले अंग्रेजी को लेकर थोड़ी परेशानी होती थी, क्योंकि स्नातक तक की पढ़ाई हिंदी मीडियम से ही की थी। बीए द्वितीय वर्ष में इंग्लिश सीखने, बोलने की ललक जागी और अगले चार साल में खुद को अंग्रेजी में पारंगत कर लिया।
बताया कि इस दौरान अंग्रेजी के अखबार पढ़े, अंग्रेजी फिल्में देखीं और अंग्रेजी साहित्य पढ़ा तो राह थोड़ी आसान हुई। अब अंग्रेजी बोलने और समझने में कोई दिक्कत नहीं होती। अरुण के पिता महेश चंद्र पूर्व सैनिक हैं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह गांव में रहकर खेती कर रहे हैं।
लंदन में पीएचडी शोध का पुरस्कार भी मिला
अरुण कुमार बताते हैं कि वर्ष 2018 में उन्हें लंदन में पीएचडी शोध के लिए पुरस्कार भी मिला। उनके शोध का विषय उपनिवेशक और साम्राज्य था। जर्मन हिस्टोरिकल इंस्टीट्यूट ऑफ लंदन से इनाम के रूप में उन्हें 1000 ब्रिटिश पाउंड भी मिले थे।

भारत में ज्यादा सामाजिक लोग
भारत और इंग्लैंड के माहौल में अंतर को लेकर अरुण ने बताया कि इंग्लैंड के लोग अपने काम से ज्यादा मतलब रखते हैं इसलिए सामाजिक जीवन बहुत जीवंत नहीं है, जबकि भारत में लोग सामाजिक हैं। यह भी कहते हैं कि इंग्लैंड में अच्छी बात यह है कि कानून का पालन हर कोई करता है और सबके लिए कानून समान है। बाकी कुछ फर्क तो नजरिए का भी है।
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