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कराएं मलेरिया की जांच ताकि न आए जीवन पर आंच
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कराएं मलेरिया की जांच ताकि न आए जीवन पर आंच
- विश्व मलेरिया दिवस आज : डॉक्टरों ने बताए बचाव के उपाय
- तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड हैं लक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड लगे, अत्यधिक पसीना आना, मिचली व उल्टी जैसे लक्षण दिखें तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत आशा से संपर्क करें या पास के स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। ये सलाह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओम प्रकाश तिवारी ने दी। उन्होंने कहा कि मलेरिया से बचाव जरूरी है।
सीएमओ ने बताया कि मलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक करने से उद्देश्य से हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इस साल इस दिवस की थीम है, मलेरिया रोग के बोझ को कम करने और जीवन बचाने के लिए नवाचार का उपयोग करें। राष्ट्रीय बेक्टरजनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार पंकज ने बताया कि मलेरिया में थकान की वजह से एनीमिया, दौरा या चेतना की हानि की स्थिति बन जाती है। गर्भावस्था में मलेरिया का होना गर्भवती के साथ-साथ भ्रूण और नवजात के लिए भी खतरा है। जिला मलेरिया अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया है कि मलेरिया का मच्छर सामान्यत: शाम और सुबह के बीच काटता है। मच्छर के काटने के बाद इसका परजीवी लीवर के जरिये लाल रक्त कोशिकाओं तक पहुंचता है और संक्रमण पूरे शरीर में फैलने लगता है। यह रक्त कोशिकाओं को तोड़ने लगता है। संक्रमित रक्त कोशिकाएं हर 48 से 72 घंटे में फटती रहती हैं और जब भी फटती हैं बुखार, ठंड लगना और पसीना आने जैसे लक्षण भी सामने आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का परामर्श है कि गर्भवती को मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाना चाहिए।
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- विश्व मलेरिया दिवस आज : डॉक्टरों ने बताए बचाव के उपाय
- तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड हैं लक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड लगे, अत्यधिक पसीना आना, मिचली व उल्टी जैसे लक्षण दिखें तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत आशा से संपर्क करें या पास के स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। ये सलाह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओम प्रकाश तिवारी ने दी। उन्होंने कहा कि मलेरिया से बचाव जरूरी है।
सीएमओ ने बताया कि मलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक करने से उद्देश्य से हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इस साल इस दिवस की थीम है, मलेरिया रोग के बोझ को कम करने और जीवन बचाने के लिए नवाचार का उपयोग करें। राष्ट्रीय बेक्टरजनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार पंकज ने बताया कि मलेरिया में थकान की वजह से एनीमिया, दौरा या चेतना की हानि की स्थिति बन जाती है। गर्भावस्था में मलेरिया का होना गर्भवती के साथ-साथ भ्रूण और नवजात के लिए भी खतरा है। जिला मलेरिया अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया है कि मलेरिया का मच्छर सामान्यत: शाम और सुबह के बीच काटता है। मच्छर के काटने के बाद इसका परजीवी लीवर के जरिये लाल रक्त कोशिकाओं तक पहुंचता है और संक्रमण पूरे शरीर में फैलने लगता है। यह रक्त कोशिकाओं को तोड़ने लगता है। संक्रमित रक्त कोशिकाएं हर 48 से 72 घंटे में फटती रहती हैं और जब भी फटती हैं बुखार, ठंड लगना और पसीना आने जैसे लक्षण भी सामने आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का परामर्श है कि गर्भवती को मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाना चाहिए।
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