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Hardoi News: रियल टाइम डेटा फीड न करने पर कटेगी भरण-पोषण राशि
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हरदोई। गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित निराश्रित मवेशियों के भरण-पोषण में अब लापरवाही भारी पड़ सकती है। मवेशियों के चारा, दाना और खानपान से संबंधित रियल टाइम डेटा गो-आश्रय पोर्टल पर फीड करना अनिवार्य किया गया है। प्रतिदिन डेटा अपडेट न करने पर संबंधित गो-आश्रय स्थल को मिलने वाली भरण-पोषण राशि में उस दिन की कटौती की जाएगी। डेटा फीड किए जाने की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों को सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में से एक निराश्रित मवेशियों को संरक्षित किए जाने के क्रम में जिले में 18 वृहद गो संरक्षण केंद्र और 260 अस्थाई पशु आश्रयस्थल संचालित हैं। इनमें करीब 58 हजार से अधिक निराश्रित मवेशी संरक्षित हैं। इनके भरण-पोषण के लिए शासन की तरफ से प्रति मवेशी प्रतिदिन 50 रुपये दिए जाते हैं। इससे जुटाई जानी वाली व्यवस्था का डेटा पोर्टल पर दर्ज किए जाने की अनिवार्यता दी गई है। मवेशियों के भरण-पोषण की व्यवस्था और खर्च की निगरानी की जाएगी।
गो-आश्रय पोर्टल पर मवेशियों की संख्या के साथ उनके लिए उपलब्ध कराए जा रहे चारा, दाना और खानपान का ब्योरा दर्ज करना होगा। पंचायत सचिवों की जिम्मेदारी होगी कि वह प्रतिदिन निर्धारित प्रक्रिया में वास्तविक स्थिति का डेटा समय से फीड करें। इससे गो-आश्रयों में संरक्षित मवेशियों के लिए जारी रुपये के उपयोग की निगरानी की जा सकेगी।
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शासन ने संरक्षित मवेशियों की सीसी कैमराें से निगरानी के साथ ही उनके भरण-पोषण के डेटा की रियल टाइम फीडिंग की भी अनिवार्यता दी है। इस पर जिले में काम शुरू करा दिया गया है। डेटा फीड न किए जाने के दिन के रुपये कटौती की व्यवस्था दी गई है।
- डॉ. अशोक कुमार सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में से एक निराश्रित मवेशियों को संरक्षित किए जाने के क्रम में जिले में 18 वृहद गो संरक्षण केंद्र और 260 अस्थाई पशु आश्रयस्थल संचालित हैं। इनमें करीब 58 हजार से अधिक निराश्रित मवेशी संरक्षित हैं। इनके भरण-पोषण के लिए शासन की तरफ से प्रति मवेशी प्रतिदिन 50 रुपये दिए जाते हैं। इससे जुटाई जानी वाली व्यवस्था का डेटा पोर्टल पर दर्ज किए जाने की अनिवार्यता दी गई है। मवेशियों के भरण-पोषण की व्यवस्था और खर्च की निगरानी की जाएगी।
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गो-आश्रय पोर्टल पर मवेशियों की संख्या के साथ उनके लिए उपलब्ध कराए जा रहे चारा, दाना और खानपान का ब्योरा दर्ज करना होगा। पंचायत सचिवों की जिम्मेदारी होगी कि वह प्रतिदिन निर्धारित प्रक्रिया में वास्तविक स्थिति का डेटा समय से फीड करें। इससे गो-आश्रयों में संरक्षित मवेशियों के लिए जारी रुपये के उपयोग की निगरानी की जा सकेगी।
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शासन ने संरक्षित मवेशियों की सीसी कैमराें से निगरानी के साथ ही उनके भरण-पोषण के डेटा की रियल टाइम फीडिंग की भी अनिवार्यता दी है। इस पर जिले में काम शुरू करा दिया गया है। डेटा फीड न किए जाने के दिन के रुपये कटौती की व्यवस्था दी गई है।
- डॉ. अशोक कुमार सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी