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‘इंसान बन कर जीएं’
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Thu, 20 Aug 2015 11:47 PM IST
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गांधी के जन्म दिवस पर सद्भावना दिवस के तहत कई कार्यक्रमों का आयोजन किया
गया। इसी क्रम में हुई भाषण, निबंध एवं सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं में
विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
एनएसएस एवं रोवर्स-रेंजर्स के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ प्रवक्ता प्रोफेसर एमसी यादव ने कहा कि देश के मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसे आयोजन बेहद जरूरी हैं। हमें चाहिए कि आपस में हिंदू-मुसलमान या सिख-ईसाई बन कर नहीं, बल्कि इंसान बनकर रहें।
एक दूसरे के सुख-दु:ख में शामिल हाें और एक अच्छा माहौल बनाएं। डा. बृजलाल ने हिंदी दोहे सुनाकर सांप्रदायिक सद्भावना का माहौल बनाने की सीख दी। स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए डा. गगन कुमार ने कहा कि अपने जीवन में जाति-धर्म एवं लिंग से ऊपर उठकर व्यवहार करें।
संचालन कर रहीं डा. सरिता सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्य बताते हुए कहा कि जाति-धर्म की भावना से ऊपर उठ कर विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना का विकास इस उद्देश्य है। उन्होंने राजीव गांधी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके कार्यकाल में भारत की उपलब्धियाें पर चर्चा की।
एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों व स्टाफ को राष्ट्र्रीय एकता और अखंडता और सहिष्णुता को बनाए रखने की शपथ दिलाई। डा. कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि समाज में सांप्रदायिक सद्भावना बनाए रखने में विद्यार्थी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कहा कि जिसके भाव अच्छे हों, उसे अभाव नहीं रहता है। डा. गगन के नेतृत्व में हुई कई प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने खुलकर प्रतिभा दिखाई। इनमें निबंध प्रतियोगिता में अर्जित तोमर अव्वल रहे। मानेंद्र पाल एवं ममता तिवारी संयुक्त रूप से द्वितीय पुरस्कार की हकदार बनीं। पशुपति नाथ व नौरीन बानो ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
भाषण में अनीश कुमार ने बाजी मारी, जबकि अर्जित तोमर को दूसरा व कीर्ति देवी को तीसरा स्थान मिला। सामान्य ज्ञान के लिए चार टीमों ए, बी, सी एवं डी में कड़ा मुकाबला हुआ। निर्णायकों ने टीम डी को पहला स्थान दिया। सी को द्वितीय द्वितीय स्थान मिला। इस दौरान डा. भैयालाल व आशीष सिंह मौजूद थे।
एनएसएस एवं रोवर्स-रेंजर्स के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ प्रवक्ता प्रोफेसर एमसी यादव ने कहा कि देश के मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसे आयोजन बेहद जरूरी हैं। हमें चाहिए कि आपस में हिंदू-मुसलमान या सिख-ईसाई बन कर नहीं, बल्कि इंसान बनकर रहें।
एक दूसरे के सुख-दु:ख में शामिल हाें और एक अच्छा माहौल बनाएं। डा. बृजलाल ने हिंदी दोहे सुनाकर सांप्रदायिक सद्भावना का माहौल बनाने की सीख दी। स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए डा. गगन कुमार ने कहा कि अपने जीवन में जाति-धर्म एवं लिंग से ऊपर उठकर व्यवहार करें।
संचालन कर रहीं डा. सरिता सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्य बताते हुए कहा कि जाति-धर्म की भावना से ऊपर उठ कर विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना का विकास इस उद्देश्य है। उन्होंने राजीव गांधी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके कार्यकाल में भारत की उपलब्धियाें पर चर्चा की।
एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों व स्टाफ को राष्ट्र्रीय एकता और अखंडता और सहिष्णुता को बनाए रखने की शपथ दिलाई। डा. कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि समाज में सांप्रदायिक सद्भावना बनाए रखने में विद्यार्थी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कहा कि जिसके भाव अच्छे हों, उसे अभाव नहीं रहता है। डा. गगन के नेतृत्व में हुई कई प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने खुलकर प्रतिभा दिखाई। इनमें निबंध प्रतियोगिता में अर्जित तोमर अव्वल रहे। मानेंद्र पाल एवं ममता तिवारी संयुक्त रूप से द्वितीय पुरस्कार की हकदार बनीं। पशुपति नाथ व नौरीन बानो ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
भाषण में अनीश कुमार ने बाजी मारी, जबकि अर्जित तोमर को दूसरा व कीर्ति देवी को तीसरा स्थान मिला। सामान्य ज्ञान के लिए चार टीमों ए, बी, सी एवं डी में कड़ा मुकाबला हुआ। निर्णायकों ने टीम डी को पहला स्थान दिया। सी को द्वितीय द्वितीय स्थान मिला। इस दौरान डा. भैयालाल व आशीष सिंह मौजूद थे।