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कूड़े का कुंड बना प्रहलाद कुंड
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Sun, 14 Feb 2016 12:24 AM IST
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सांडी रोड स्थित ऐतिहासिक पावन प्रहलाद कुंड अव्यवस्थाओं के चलते कूड़े का कुंड बन गया है। कुड़ की सफाई को लेकर पालिका भी ध्यान नहीं दे रही है। जनप्रतिनिधि भी इस और ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। प्रहलाद कुंड के स्वामित्व वाले ट्रस्ट के प्रबंधक रविन्द्र सेठ का कहना है कि वह लोगों से कुंड में कूड़ा न डालने की अपील कर चुके है लेकिन इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है । दरअसल प्रहलाद कुंड के आस पास बाउंड्रीवाल न होने से इसका प्राकृतिक स्त्रोत एवं स्वरूप बदलता जा रहा है।
ट्रस्टी प्रबंधक रविंद्र सेठ ने बताया कि प्रहलाद कुंड ऐतिहासिक धरोहर है । कुंड के पड़ोस में ही मां श्रवण देवी मंदिर एवं यज्ञशाला है। यह कुंड कब बना और किसने बनवाया इसकी जानकारी तो नहीं है मगर सन 1890 में इसका जीर्णोद्धार कराए जाने संबंधी चर्चाएं वर्षों से चली आ रही है। देश को आजादी मिलने से पहले से यह कुंड यहां विद्यमान है और इसमें जल स्त्रोत स्वत: फूटे हैं। आस पास सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण इसका अस्तित्व बिगड़ने लगा है। वहां पर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगा है कि यहां पर किसी प्रकार का कूड़ा डालना, हवन आदि की राख डालना तथा कपड़े धोना मना है इसके बाद भी लोग वहां पर कूड़ा डालते रहते है।
जिसके कारण यह कुंड अब अपने अस्तित्व को खोने लगा है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के पास धन नहीं है अन्यथा इस ओर आवश्यक कार्य अवश्य कराया जाता। अगर जिला प्रशासन या कोई संस्था, जनप्रतिनिधि आदि इसका सुंदरीकरण कार्य, चाहरदीवारी आदि का कार्य कराना चाहें तो ट्रस्ट को खुशी होगी। कार्य होने के बाद ट्रस्ट उसकी व्यवस्थाओं को बनाए रखने का प्रयास करेगा ।
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प्रभारी अधिशाषी अधिकारी, पप्पू गुप्ताप ने कहा कि नगर पालिका प्रहलाद कुंड के विकास कार्यों को लेकर वे उच्चाधिकारियों से बात करने के बाद ही कुछ कह सकेंगे । वहींं, भाजयुमो जिलाध्यक्ष संदीप सिंह ने कहा कि
स्वच्छता अभियान के तहत युवा मोर्चा के कार्यकर्ता कुंड को साफ कराने का प्रयास कर सकते हैं लेकिन कुंड की गहराई अमापित है व लंबे समय से कुंड में कचरा है। जिससे किसी प्रकार की गैस आदि की संभावना को देखते हुए बिना प्रशासन एवं संबंधित ट्रस्ट के सहयोग से कार्य हो पाना काफी मुश्किल है।
भाजपा सांसद अंशुल वर्मा ने कहा कि रहलाद कुंड के सुंदरीकरण के लिए सांसद निधि से धन देने के लिए जिलाधिकारी को पत्र दिया था। इस संबंध में एक बार फिर उनसे बात की जाएगी। विकास कार्यों के लिए वे हमेशा तत्पर हैं। शहर के पार्कों एवं प्रहलाद कुंड को पूर्व से ही प्राथमिकता पर सजाने संवारने के लिए पत्र दे चुके है लेकिन जिला प्रशासन से सिर्फ आवास विकास के दो पार्कों के लिए कार्य कराने की अनुमति दी गई है।
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ट्रस्टी प्रबंधक रविंद्र सेठ ने बताया कि प्रहलाद कुंड ऐतिहासिक धरोहर है । कुंड के पड़ोस में ही मां श्रवण देवी मंदिर एवं यज्ञशाला है। यह कुंड कब बना और किसने बनवाया इसकी जानकारी तो नहीं है मगर सन 1890 में इसका जीर्णोद्धार कराए जाने संबंधी चर्चाएं वर्षों से चली आ रही है। देश को आजादी मिलने से पहले से यह कुंड यहां विद्यमान है और इसमें जल स्त्रोत स्वत: फूटे हैं। आस पास सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण इसका अस्तित्व बिगड़ने लगा है। वहां पर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगा है कि यहां पर किसी प्रकार का कूड़ा डालना, हवन आदि की राख डालना तथा कपड़े धोना मना है इसके बाद भी लोग वहां पर कूड़ा डालते रहते है।
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जिसके कारण यह कुंड अब अपने अस्तित्व को खोने लगा है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के पास धन नहीं है अन्यथा इस ओर आवश्यक कार्य अवश्य कराया जाता। अगर जिला प्रशासन या कोई संस्था, जनप्रतिनिधि आदि इसका सुंदरीकरण कार्य, चाहरदीवारी आदि का कार्य कराना चाहें तो ट्रस्ट को खुशी होगी। कार्य होने के बाद ट्रस्ट उसकी व्यवस्थाओं को बनाए रखने का प्रयास करेगा ।
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प्रभारी अधिशाषी अधिकारी, पप्पू गुप्ताप ने कहा कि नगर पालिका प्रहलाद कुंड के विकास कार्यों को लेकर वे उच्चाधिकारियों से बात करने के बाद ही कुछ कह सकेंगे । वहींं, भाजयुमो जिलाध्यक्ष संदीप सिंह ने कहा कि
स्वच्छता अभियान के तहत युवा मोर्चा के कार्यकर्ता कुंड को साफ कराने का प्रयास कर सकते हैं लेकिन कुंड की गहराई अमापित है व लंबे समय से कुंड में कचरा है। जिससे किसी प्रकार की गैस आदि की संभावना को देखते हुए बिना प्रशासन एवं संबंधित ट्रस्ट के सहयोग से कार्य हो पाना काफी मुश्किल है।
भाजपा सांसद अंशुल वर्मा ने कहा कि रहलाद कुंड के सुंदरीकरण के लिए सांसद निधि से धन देने के लिए जिलाधिकारी को पत्र दिया था। इस संबंध में एक बार फिर उनसे बात की जाएगी। विकास कार्यों के लिए वे हमेशा तत्पर हैं। शहर के पार्कों एवं प्रहलाद कुंड को पूर्व से ही प्राथमिकता पर सजाने संवारने के लिए पत्र दे चुके है लेकिन जिला प्रशासन से सिर्फ आवास विकास के दो पार्कों के लिए कार्य कराने की अनुमति दी गई है।
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