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मानकों की अनदेखी और गलत शटरिंग से गिरा था लिंटर का जाल
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4 फरवरी को अमर उजाला में प्रकाशित खबर। संवाद
- फोटो : HARDOI
हरदोई। टोडरपुर केे निर्माणाधीन बीज गोदाम के लिंटर का जाल मानकों में अनदेखी और गलत शटरिंग के कारण गिरा था। यह खुलासा हुआ है जांच टीम की रिपोर्ट से। इसमें कार्यदायी संस्था के सहायक और अवर अभियंता के साथ-साथ ठेकेदार को भी दोषी माना गया है। टीम ने अपनी रिपोर्ट डीएम को भेज दी है।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत टोडरपुर में मल्टीपर्पज सीड स्टोर एवं टेक्नालॉजी डिसेमिनेशन सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। 80 लाख 14 हजार रुपये की लागत से बन रहे इस भवन के लिए शासन ने उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ की लखनऊ इकाई को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।
सहकारी संघ ने इस कार्य का ठेका मेसर्स अमित एसोसिएट्स, 104 कबीर अपार्टमेंट, कबीर मार्ग जिला लखनऊ को दिया है। दो फरवरी की रात भवन में लिंटर डालने के लिए सरियों का जाल डाला गया था। इस पर जब निर्माण सामग्री डाली गई तो शटरिंग समेत सरियों का जाल नीचे जा गिरा।
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डीएम अविनाश कुमार ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट माया शंकर यादव, लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र चौधरी और उपनिदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र की टीम गठित की थी। सूत्रों के मुताबिक टीम ने मानक के विपरीत और गलत डिजाइनिंग के कारण घटना होने की बात जांच रिपोर्ट में लिखी है। समिति के मुताबिक एसपी साइड स्टोर के हॉल की छत ढलाई के लिए लगाए गए सपोर्ट पर्याप्त नहीं थे और शटरिंग की मजबूती उपयुक्त नहीं थी।
सपोर्ट के नीचे भूमि की सतह पर बिना किसी उपायुक्त पैडेस्टल के ही लगाए गए थे। इस कारण ढलाई जा रही कंकरीट के वजन से पूरी शटरिंग सपोर्ट सहित जमीन में धसने के कारण सरियों का जाल भी ढह गया। सपोर्ट न लगाए जाने के कारण हुई इस घटना के लिए ठेकेदार को दोषी मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि शटरिंग के कार्य में लापरवाही की गई है। इसके अलावा आरसीसी के कार्य में वायब्रेटर का उपयोग समय से न होने के कारण गुणवत्ता भी खराब है। बीज गोदाम के हाल के बीच की सपोर्ट में भी खामी मिली है।
कार्यदायी संस्था के सहायक और अवर अभियंता भी लापरवाह
जांच रिपोर्ट के मुताबिक सहायक अभियंता और अवर अभियंता को आरसीसी की ढलाई से पहले शटरिंग व सपोर्ट की मजबूती का आंकलन स्थलीय निरीक्षण से कर लेना चाहिए था। दोनों ने ही यह कार्य नहीं किया। इसके कारण घटना हुई। ऐसे में सहायक और अवर अभियंता के विरुद्ध भी कार्यवाई की संस्तुति की गई है।
आरसीसी की ढलाई करें डिस्मेंटल, दोबारा हो कार्य
जांच रिपोर्ट में आरसीसी की ढलाई को भी मानकविहीन माना गया है। ऐसे में आरसीसी की ढलाई को डिस्मेंटल (जमींदोज) करने के साथ ही दोबारा तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में कार्य कराने की संस्तुति की गई है।
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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत टोडरपुर में मल्टीपर्पज सीड स्टोर एवं टेक्नालॉजी डिसेमिनेशन सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। 80 लाख 14 हजार रुपये की लागत से बन रहे इस भवन के लिए शासन ने उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ की लखनऊ इकाई को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।
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सहकारी संघ ने इस कार्य का ठेका मेसर्स अमित एसोसिएट्स, 104 कबीर अपार्टमेंट, कबीर मार्ग जिला लखनऊ को दिया है। दो फरवरी की रात भवन में लिंटर डालने के लिए सरियों का जाल डाला गया था। इस पर जब निर्माण सामग्री डाली गई तो शटरिंग समेत सरियों का जाल नीचे जा गिरा।
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डीएम अविनाश कुमार ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट माया शंकर यादव, लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र चौधरी और उपनिदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र की टीम गठित की थी। सूत्रों के मुताबिक टीम ने मानक के विपरीत और गलत डिजाइनिंग के कारण घटना होने की बात जांच रिपोर्ट में लिखी है। समिति के मुताबिक एसपी साइड स्टोर के हॉल की छत ढलाई के लिए लगाए गए सपोर्ट पर्याप्त नहीं थे और शटरिंग की मजबूती उपयुक्त नहीं थी।
सपोर्ट के नीचे भूमि की सतह पर बिना किसी उपायुक्त पैडेस्टल के ही लगाए गए थे। इस कारण ढलाई जा रही कंकरीट के वजन से पूरी शटरिंग सपोर्ट सहित जमीन में धसने के कारण सरियों का जाल भी ढह गया। सपोर्ट न लगाए जाने के कारण हुई इस घटना के लिए ठेकेदार को दोषी मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि शटरिंग के कार्य में लापरवाही की गई है। इसके अलावा आरसीसी के कार्य में वायब्रेटर का उपयोग समय से न होने के कारण गुणवत्ता भी खराब है। बीज गोदाम के हाल के बीच की सपोर्ट में भी खामी मिली है।
कार्यदायी संस्था के सहायक और अवर अभियंता भी लापरवाह
जांच रिपोर्ट के मुताबिक सहायक अभियंता और अवर अभियंता को आरसीसी की ढलाई से पहले शटरिंग व सपोर्ट की मजबूती का आंकलन स्थलीय निरीक्षण से कर लेना चाहिए था। दोनों ने ही यह कार्य नहीं किया। इसके कारण घटना हुई। ऐसे में सहायक और अवर अभियंता के विरुद्ध भी कार्यवाई की संस्तुति की गई है।
आरसीसी की ढलाई करें डिस्मेंटल, दोबारा हो कार्य
जांच रिपोर्ट में आरसीसी की ढलाई को भी मानकविहीन माना गया है। ऐसे में आरसीसी की ढलाई को डिस्मेंटल (जमींदोज) करने के साथ ही दोबारा तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में कार्य कराने की संस्तुति की गई है।