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Hardoi News: पांच साल पहले हुई युवक की हत्या में दोषी को आजीवन कारावास
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हरदोई। बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र में पांच साल पहले हुई युवक की हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी कोर्ट संख्या-2) ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने गवाही और अभिलेखीय साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
शहबादपुर निवासी सतपाल ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उनका भाई बुद्धराम उर्फ नन्हूं दो मार्च 2021 की रात मकान के बाहर खड़ा था। इस दौरान गांव निवासी संजय वहां आकर गाली-गलौज करने लगा। विरोध करने पर संजय ने सब्जी काटने वाली धारदार चाकू जेब से निकालकर बुद्धराम के सीने में घोंप दी। गंभीर रूप से घायल बुद्धराम को जिला अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। एक अप्रैल 2021 को आरोप पत्र दाखिल हुआ। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। मृतक के भाई सत्यपाल और प्रत्यक्षदर्शी भतीजी खुशबू की गवाही को न्यायालय ने महत्वपूर्ण माना।
घटनास्थल का नक्शा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी और विवेचना से जुड़े अभिलेख भी अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने रंजिश और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का तर्क दिया लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूत के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई।
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शहबादपुर निवासी सतपाल ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उनका भाई बुद्धराम उर्फ नन्हूं दो मार्च 2021 की रात मकान के बाहर खड़ा था। इस दौरान गांव निवासी संजय वहां आकर गाली-गलौज करने लगा। विरोध करने पर संजय ने सब्जी काटने वाली धारदार चाकू जेब से निकालकर बुद्धराम के सीने में घोंप दी। गंभीर रूप से घायल बुद्धराम को जिला अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। एक अप्रैल 2021 को आरोप पत्र दाखिल हुआ। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। मृतक के भाई सत्यपाल और प्रत्यक्षदर्शी भतीजी खुशबू की गवाही को न्यायालय ने महत्वपूर्ण माना।
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घटनास्थल का नक्शा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी और विवेचना से जुड़े अभिलेख भी अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने रंजिश और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का तर्क दिया लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूत के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई।
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