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मंदिरों में गूंजे कूष्मांडा के जयकारे
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 23 Mar 2015 11:53 PM IST
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हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु में...। मंत्रों की पंक्तियां सोमवार
को घरों से लेकर मंदिरों तक में सुनाई देती रही। इसके अलावा श्रद्धालुओं के
जयघोष से वातावरण पूरे दिन भक्तिमय बना रहा।
नवरात्र में भक्ताें ने सोमवार को कूष्मांडा माता की पूजा की। भक्तों ने पूरे उत्साह से इन माता का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। इस दिन भी शहर के लगभग सभी मंदिरों में मां के दर्शनों व पूजा को लाइन लगी रही। भक्तों की लंबी चौड़ी भीड़ और मां के दर्शनों में आ रही दिक्कतों के बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई।
दुर्गा देवी मंदिर में शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि कूष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं, जो प्रसन्न होेने पर अपने भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य का वरदान देती हैं। उधर, नवरात्र माता आराधना क ा सबसे बड़ा पर्व है। नवरात्रि के दौरान कन्याओं को भोजन कराने का भी प्रचलन है।
शास्त्रों के अनुसार नवरात्र में पूजन का अलग ही महत्व है। संख्या के आधार पर कन्याओं का पूजन श्रद्धालु को ऐश्वर्य से लेकर प्रभुत्व तक प्रदान करती है। शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात् माता का स्वरूप मानी जाती है।
शास्त्रों के मुताबिक, नवरात्र में कन्याओं का पूजन कर उनका भोजन कराने का अलग ही लाभ श्रद्धालु को प्राप्त होता है। एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो की पूजा से भोग व मोल, तीन क न्याओं के पूजन अर्चन से धर्म, अर्थ की प्राप्ति, चार कन्याओं के पूजन से राज्यपद, पांच से विद्या एवं छह कन्याओं के पूजन से सिद्धि, सात से राज्य एवं आठ से संपदा एवं नौ कन्याओं के पूजन से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।
शास्त्री ने बताया कि तीन साल से लेकर नौ साल तक की ही कन्याओं के पूजन का प्रावधान है। कम या ज्यादा उम्र पूर्णतया वर्जित है। नवरात्र के अंतिम दिन उनके पूजन व भोज को इससे पूर्व उनको आमंत्रित करें। उन्हें पंक्ति में बैठाकर ऊं कुमाये नम: मंत्र से पूजन करें। इसके बाद उनको भोजन कराए।
ध्यान यह रखा जाए कि भोजन में मीठा अवश्य रखा जाए। भोजन के बाद पैर धुलाकर कुमकुम से तिलक करें और दक्षिणा दें। उधर, डाल सिंह मेमोरियल स्कूल के रामजानकी हनुमत धाम में श्रीमद् देवी भागवत कथा सुनाते हुए कथा व्यास आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि सच्चे मन से मां की पूजा करने से मन की सारी मुरादें पूरी होती हैं।
धन व संतान की प्राप्ति होती है। मां की सच्चे मन से पूजा करनी चाहिए। आचार्य विपिन पांडे, आनंद पांडे, श्याम पाल ने वैदिक विधि से कूष्मांडा मां का पूजन अर्चन किया व राम रक्षा स्रोत का पाठ कर सर्व कल्याण की मंगल कामना की। मुख्य यजमान अखिलेश सिंह व पूर्णिमा सिंह ने देवी भागवत का पूजन किया।
नवरात्र में भक्ताें ने सोमवार को कूष्मांडा माता की पूजा की। भक्तों ने पूरे उत्साह से इन माता का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। इस दिन भी शहर के लगभग सभी मंदिरों में मां के दर्शनों व पूजा को लाइन लगी रही। भक्तों की लंबी चौड़ी भीड़ और मां के दर्शनों में आ रही दिक्कतों के बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई।
दुर्गा देवी मंदिर में शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि कूष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं, जो प्रसन्न होेने पर अपने भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य का वरदान देती हैं। उधर, नवरात्र माता आराधना क ा सबसे बड़ा पर्व है। नवरात्रि के दौरान कन्याओं को भोजन कराने का भी प्रचलन है।
शास्त्रों के अनुसार नवरात्र में पूजन का अलग ही महत्व है। संख्या के आधार पर कन्याओं का पूजन श्रद्धालु को ऐश्वर्य से लेकर प्रभुत्व तक प्रदान करती है। शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात् माता का स्वरूप मानी जाती है।
शास्त्रों के मुताबिक, नवरात्र में कन्याओं का पूजन कर उनका भोजन कराने का अलग ही लाभ श्रद्धालु को प्राप्त होता है। एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो की पूजा से भोग व मोल, तीन क न्याओं के पूजन अर्चन से धर्म, अर्थ की प्राप्ति, चार कन्याओं के पूजन से राज्यपद, पांच से विद्या एवं छह कन्याओं के पूजन से सिद्धि, सात से राज्य एवं आठ से संपदा एवं नौ कन्याओं के पूजन से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।
शास्त्री ने बताया कि तीन साल से लेकर नौ साल तक की ही कन्याओं के पूजन का प्रावधान है। कम या ज्यादा उम्र पूर्णतया वर्जित है। नवरात्र के अंतिम दिन उनके पूजन व भोज को इससे पूर्व उनको आमंत्रित करें। उन्हें पंक्ति में बैठाकर ऊं कुमाये नम: मंत्र से पूजन करें। इसके बाद उनको भोजन कराए।
ध्यान यह रखा जाए कि भोजन में मीठा अवश्य रखा जाए। भोजन के बाद पैर धुलाकर कुमकुम से तिलक करें और दक्षिणा दें। उधर, डाल सिंह मेमोरियल स्कूल के रामजानकी हनुमत धाम में श्रीमद् देवी भागवत कथा सुनाते हुए कथा व्यास आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि सच्चे मन से मां की पूजा करने से मन की सारी मुरादें पूरी होती हैं।
धन व संतान की प्राप्ति होती है। मां की सच्चे मन से पूजा करनी चाहिए। आचार्य विपिन पांडे, आनंद पांडे, श्याम पाल ने वैदिक विधि से कूष्मांडा मां का पूजन अर्चन किया व राम रक्षा स्रोत का पाठ कर सर्व कल्याण की मंगल कामना की। मुख्य यजमान अखिलेश सिंह व पूर्णिमा सिंह ने देवी भागवत का पूजन किया।