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सीएचसी पर कराह रही जननी सुरक्षा योजना
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Thu, 13 Aug 2015 12:02 AM IST
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जननी सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार तमाम जतन कर रही
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है। दूसरी ओर सीएचसी पर चिकित्सक व कर्मचारियों ने जननी सुरक्षा योजना को
मजाक बना रखा है।
आलम यह है कि यहां तीन महिला चिकित्सक तथा चार स्टाफ नर्स तैनात हैं, फिर भी प्रसूताओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्हें प्रसव के लिए मजबूरन नर्सिंगहोम के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जनरेटर न चलने से प्रसव कक्ष में प्रसूताएं मारे गर्मी की बेहाल रहती हैं। ऐसे में हाथ का पंखा ही सहारा बना हुआ है। बुधवार को सीएचसी का जायजा लेने पर कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया।
अपराह्न 1:30 बजे सीएचसी पर चिलचिलाती गर्मी के बीच प्रसूता कक्ष जैसे उबल रहा था। तीमारदार हाथ का पंखा झलकर किसी तरह मरीज का पसीना सुखाने की कोशिश कर रहे थे। प्रसव कक्ष के बाहर धूप में एक गर्भवती फर्र्श पर पड़ी तड़प रही थी, तीमारदार डाक्टर के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
पूछने पर उन्होंने बताया कि तीन घंटे पहले प्रसव के लिए सीएचसी पर लाए थे लेकिन महिला चिकित्सक अभी तक नहीं आईं हैं। स्टाफ नर्स कह रही हैं कि डाक्टर आकर देखेंगी। उसके बाद ही कुुछ बताएंगी। अगर जल्दी हो तो किसी नर्सिंगहोम में ले जाकर प्रसव करा लो।
उधर, पंखे न चलने के बारे में जब स्टाफ नर्स से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सीएचसी अधीक्षक से कई बार जनरेटर चलवाने के लिए कहा गया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। सीएचसी पर दो महिला चिकित्सक तैनात हैं।
वहां पर मौजूद लोगों ने बताया कि महिला चिकित्सक कभी-कभी ही सीएचसी पर आती हैं। जननी सुरक्षा स्टाफ नर्स के भरोसे ही चल रही है। सीएचसी अधीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि जो भी संसाधन उपलब्ध हैं उनसे मरीजों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। यदि किसी को कोई कठिनाई है तो उसे दूर कराया जाएगा।
ओपीडी में डाक्टरों के न आने से अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। डाक्टर की कुर्सियों पर जमी धूल बता रही थी कि इन पर हफ्तों से कोई नहीं बैठा है। दो दिन पहले आया दवाई का स्टाक बाहर गेट के पास ही लगा हुआ था। सीएचसी अधीक्षक सहित ज्यादातर डाक्टर नदारद थे।
सीएचसी पर महिला चिकित्सक शीला वर्मा व अंजू गुप्ता और डा. विनोद कुमार, डा. सोबर चतुर्वेदी, डा. आशुतोष सिंह, डा. अभिमन्यु चौधरी, डा. दिलीप यादव सहित एक दर्जन डाक्टर व फर्मासिस्ट तैनात हैं।
डाक्टरों की गैरमौजूदगी से मरीज घंटों बैठकर चिकित्सकों का इंतजार करते हैं और फिर गिने चुने कर्मचारी लाल पीली गोली देकर खानापूरी कर देते हैं। मरीजों को पीने का साफ पानी भी मुहैया नहीं हो पा रहा है।
आलम यह है कि यहां तीन महिला चिकित्सक तथा चार स्टाफ नर्स तैनात हैं, फिर भी प्रसूताओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्हें प्रसव के लिए मजबूरन नर्सिंगहोम के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जनरेटर न चलने से प्रसव कक्ष में प्रसूताएं मारे गर्मी की बेहाल रहती हैं। ऐसे में हाथ का पंखा ही सहारा बना हुआ है। बुधवार को सीएचसी का जायजा लेने पर कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया।
अपराह्न 1:30 बजे सीएचसी पर चिलचिलाती गर्मी के बीच प्रसूता कक्ष जैसे उबल रहा था। तीमारदार हाथ का पंखा झलकर किसी तरह मरीज का पसीना सुखाने की कोशिश कर रहे थे। प्रसव कक्ष के बाहर धूप में एक गर्भवती फर्र्श पर पड़ी तड़प रही थी, तीमारदार डाक्टर के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
पूछने पर उन्होंने बताया कि तीन घंटे पहले प्रसव के लिए सीएचसी पर लाए थे लेकिन महिला चिकित्सक अभी तक नहीं आईं हैं। स्टाफ नर्स कह रही हैं कि डाक्टर आकर देखेंगी। उसके बाद ही कुुछ बताएंगी। अगर जल्दी हो तो किसी नर्सिंगहोम में ले जाकर प्रसव करा लो।
उधर, पंखे न चलने के बारे में जब स्टाफ नर्स से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सीएचसी अधीक्षक से कई बार जनरेटर चलवाने के लिए कहा गया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। सीएचसी पर दो महिला चिकित्सक तैनात हैं।
वहां पर मौजूद लोगों ने बताया कि महिला चिकित्सक कभी-कभी ही सीएचसी पर आती हैं। जननी सुरक्षा स्टाफ नर्स के भरोसे ही चल रही है। सीएचसी अधीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि जो भी संसाधन उपलब्ध हैं उनसे मरीजों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। यदि किसी को कोई कठिनाई है तो उसे दूर कराया जाएगा।
ओपीडी में डाक्टरों के न आने से अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। डाक्टर की कुर्सियों पर जमी धूल बता रही थी कि इन पर हफ्तों से कोई नहीं बैठा है। दो दिन पहले आया दवाई का स्टाक बाहर गेट के पास ही लगा हुआ था। सीएचसी अधीक्षक सहित ज्यादातर डाक्टर नदारद थे।
सीएचसी पर महिला चिकित्सक शीला वर्मा व अंजू गुप्ता और डा. विनोद कुमार, डा. सोबर चतुर्वेदी, डा. आशुतोष सिंह, डा. अभिमन्यु चौधरी, डा. दिलीप यादव सहित एक दर्जन डाक्टर व फर्मासिस्ट तैनात हैं।
डाक्टरों की गैरमौजूदगी से मरीज घंटों बैठकर चिकित्सकों का इंतजार करते हैं और फिर गिने चुने कर्मचारी लाल पीली गोली देकर खानापूरी कर देते हैं। मरीजों को पीने का साफ पानी भी मुहैया नहीं हो पा रहा है।