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जननी सुरक्षा योजना की प्रगति में डाक्टरों का टोटा
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Sun, 01 May 2016 11:26 PM IST
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प्रसूता
- फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। जिला महिला अस्पताल में सर्जन डाक्टरों के स्टाफ का टोटा होने से जननी सुरक्षा योजना में पानी फेर रहा है। गर्भवती को जांच के उपरांत सामान्य डिलीवरी के आसार होने के बाद ही भर्ती किया जाता है। इस संबंध में प्रभारी सीएमएस एसके गुप्ता ने बताया कि सर्जन डाक्टरों के कुल छह पद सृजित हैं, लेकिन एक डाक्टर ही तैनात है। ऐसे में उक्त डाक्टर के अवकाश अथवा ड्यूटी पर न होने की स्थिति में गंभीर केस आने पर भर्ती न किये जाने की मजबूरी हो जाती है।
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अस्पताल सूत्रों की माने तो डिलीवरी के लिए यहां पर लाई जाने वाली गर्भवती महिलाओं क ो सीधे भर्ती नहीं किया जाता है। प्रसव कराने के लिए ड्यूटी पर तैनात डाक्टर द्वारा पहले उसकी जांच करायी जाती है। यदि प्रसव के दौरान नार्मल डिलीवरी होेने की संभावना होती है, तो प्रसूता को भर्ती कर लिया जाता है, जबकि आपरेशन आदि की नौबत आने की स्थिति होती है तो यह कहकर कि उनके यहां एमएस डाक्टर ड्यूटी पर नहीं है, प्रसूता को अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी जाती है। खास बात यह है कि महिला अस्पताल से प्रसूता को वापस किए जाने के बाद तीमारदारों के सामने निजी अस्पतालों में जाना मजबूरी हो जाता है।
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जिम्मेदारों की लापरवाही का भुगतना पड़ता है खामियाजा
27 अप्रैल को खेतुई ग्राम की आशा बहू सुशीला देवी ने गांव निवासी गर्भवती विमला पत्नी संतोष कुमार क ो प्रसव के लिए भर्ती कराया था। विमला को सामान्य डिलीवरी हो गई। तबितय ठीक होने पर शुक्रवार को आशा बहू व तीमारदारों ने छुट्टी की अर्जी लगाई तथा प्रसूता के खानपान के लिए सरकार की तरफ से दी जाने वाली चेक मांगी। लेकिन ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी द्वारा बताया गया कि चेक उसके परिजनों को दी जा चुकी है। लेकिन चेक न तो तीमारदारों को मिली और न ही आशा के माध्यम से दी गई। जबकि जिम्मेदार मानने को तैयार नहीं है, कि उन्होंने चेक नहीं दी है। इसी के चलते शुक्रवार को तीमारदारों व आशा बहू ने छुट्टी नहीं करायी। उनका आरोप के ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी की लापरवाही के कारण चेक किसी तीसरे व्यक्ति को दे दी गई है।
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