एजीबी के 237 जनधन खाते ब्लाक
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ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त की जिले में मेन ब्रांच सहित 68 बैंक शाखाएं है। इनमें जनधन के 1 लाख से अधिक खाते खोले गए है। नोटबंदी से पहले अधिकतर जनधन खातों में शून्य बैलेंस था।
8 दिसंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद शुरू के दिनों में इन खातों में 2 से 2.5 लाख रुपये तक जमा किए गए है। इसके अलावा हजारों की संख्या में जनधन खातों में 49-49 हजार रुपये जमा हैं।
हालांकि इन खातों को ब्लाक नहीं किया गया है। जिन जनधन खातों में नोटबंदी के बाद 50 हजार से अधिक रुपया है उन्हें चिह्नित कर लिया गया है। जिसमें जिले भर के 237 खाते चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें ब्लाक कर दिया गया है।
इन खातों में करीब 3 करोड़ जमा हुआ है। रीजनल आफिस के मैनेजर जितेंद्र कुमार ने बताया कि जिन जनधन खातों में अभी तक एक भी रुपया नहीं था उनमें एकाएक रुपया जमा हुआ है।
जिसमें कई ऐसे खाते हैं जिनमें दो से ढाई लाख रुपया जमा हुआ था। जिसके चलते 237 जनधन खातों के लेनदेन के खातों पर रोक लगा दी गई है। जनधन खातों पर केंद्र सरकार की नजर है।
केंद्र सरकार ने जनधन खातों में रुपये जमा करने की 50 हजार की सीमा रखी है। इसका फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ लोगों ने खूब उठाया। जनधन खातों का दुरुपयोग हुआ। जिन खातों में शून्य बैलेंस था उनमें लोगों ने सीमा तो 50 हजार रखी, लेकिन कई बार पैसा निकाला और जमा किया। जनधन खातों की सीमा तो बरकरार रही, लेकिन इसमें हजारों रुपये का लेनदेन हो गया।