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Hardoi News: 26 दिनों में 934 बार यात्रियों ने दबाया रोडवेज बसों का पैनिक बटन... हर बार गलती से
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फोटो-13- रोडवेज बस में लगा पैनिक बटन व बैठे यात्री। संवाद
हरदोई। राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में आपात स्थिति में मदद के लिए पैनिक बटन लगाए गए हैं। यूं तो पैनिक बटन का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है लेकिन योजना बनाते समय महिला यात्रियों की सुरक्षा को ही ध्यान में रखा गया था। पैनिक बटन का इस्तेमाल यात्री धोखे से ही कर ले रहे हैं। निगम के आंकड़े इस बात की पुष्टि भी करते हैं। सिर्फ अक्तूबर में ही अब तक 934 बार पैनिक बटन का इस्तेमाल किया गया लेकिन जानकारी करने पर पता चला कि इसका इस्तेमाल गलती से हो गया।
रोडवेज बसों में कुछ साल पहले महिला संबंधी अपराध होने के बाद सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने गंभीरता से मंथन किया। इसके बाद रोडवेज बसों में पैनिक बटन लगाने का निर्णय हुआ। वर्ष 2018 के बाद खरीदी गईं सभी बसों में पैनिक बटन लगाए जाने का निर्देश जारी किया गया। पैनिक बटन लगाने का काम एक नामी निजी कंपनी को सौंपा गया था।
बीएस-6 की बसों में पैनिक बटन लगकर ही आता है। एक बस में औसतन 10-12 पैनिक बटन लगे होते हैं। पैनिक बटन दबते ही यह सीधे लखनऊ मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम को संदेश भेजता है। कंट्रोल रूम से संबंधित बस के चालक और परिचालक से संपर्क कर जानकारी ली जाती है अगर किसी घटना की जानकारी मिलती है तो उसे यूपी 112 को ट्रांसफर कर दिया जाता है। वहां से पुलिस अपने स्तर से कार्रवाई शुरू करती है।
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सिर्फ अक्तूबर में ही अब तक 934 बार पैनिक बटन का इस्तेमाल हरदोई क्षेत्र की बसों में किया जा चुका है। इसके बाद जब भी संबंधित बस के चालक और परिचालक से कंट्रोल रूम से जानकारी ली गई तो पता चला कि बस में सब कुछ सामान्य है और यात्री ने धोखे से या गलती से बटन दबा दिया था। संबंधित इवेंट में यही टिप्पणी दर्ज कर मामले को खत्म कर दिया जाता है।
यात्री समझते हैं इससे बस रुक जाएगी
नाम न छापने के अनुरोध पर एक परिचालक ने बताया कि यात्रियों को पैनिक बटन के इस्तेमाल की जानकारी नहीं है। बड़ी संख्या में यात्री यह समझते हैं कि यह बटन दबाने से चालक या परिचालक को घंटी सुनाई देगी और बस रोक दी जाएगी। इतना ही नहीं कई बार तो टिकट बनवाने के लिए भी यात्री इसी बटन को दबा देते हैं। जब कंट्रोल रूम से सवाल होता है तो सवारियाें से बटन दबाने के बारे में पूछा जाता है। इस दौरान पता चलता है कि टिकट बनवाने के लिए बटन दबाया गया था।
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केस-1
रोडवेज की बस संख्या यूपी 30 एटी 2680 में रविवार को पैनिक बटन दबा। कंट्रोल रूम से संबंधित बस के परिचालक से संपर्क किया गया। बस के परिचालक ने बताया कि यात्री ने बस रुकवाने के लिए बटन दबाया था।
केस-2
रोडवेज की बस संख्या यूपी 78 जेएन 8090 में शनिवार को पैनिक बटन दबा। कंट्रोल रूम से बस के परिचालक से संपर्क साधा गया। परिचालक ने बस में सवार लोगों से पूछा तो पता चला कि बच्चे ने गलती से दबा दिया।
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पैनिक बटन का इस्तेमाल आपात या अप्रिय स्थिति में करना चाहिए। यह सही है कि अधिकांश लोगों को पैनिक बटन कब इस्तेमाल करना है या क्यों इस्तेमाल करना है की जानकारी नहीं है। यही वजह है कि ज्यादातर लोग बेवजह ही पैनिक बटन दबा देते हैं। जब संबंधित बस के परिचालक से काॅल की जाती है तो पता चलता है कि गलती से दबा दिया। -गौरव वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज
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रोडवेज बसों में कुछ साल पहले महिला संबंधी अपराध होने के बाद सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने गंभीरता से मंथन किया। इसके बाद रोडवेज बसों में पैनिक बटन लगाने का निर्णय हुआ। वर्ष 2018 के बाद खरीदी गईं सभी बसों में पैनिक बटन लगाए जाने का निर्देश जारी किया गया। पैनिक बटन लगाने का काम एक नामी निजी कंपनी को सौंपा गया था।
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बीएस-6 की बसों में पैनिक बटन लगकर ही आता है। एक बस में औसतन 10-12 पैनिक बटन लगे होते हैं। पैनिक बटन दबते ही यह सीधे लखनऊ मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम को संदेश भेजता है। कंट्रोल रूम से संबंधित बस के चालक और परिचालक से संपर्क कर जानकारी ली जाती है अगर किसी घटना की जानकारी मिलती है तो उसे यूपी 112 को ट्रांसफर कर दिया जाता है। वहां से पुलिस अपने स्तर से कार्रवाई शुरू करती है।
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सिर्फ अक्तूबर में ही अब तक 934 बार पैनिक बटन का इस्तेमाल हरदोई क्षेत्र की बसों में किया जा चुका है। इसके बाद जब भी संबंधित बस के चालक और परिचालक से कंट्रोल रूम से जानकारी ली गई तो पता चला कि बस में सब कुछ सामान्य है और यात्री ने धोखे से या गलती से बटन दबा दिया था। संबंधित इवेंट में यही टिप्पणी दर्ज कर मामले को खत्म कर दिया जाता है।
यात्री समझते हैं इससे बस रुक जाएगी
नाम न छापने के अनुरोध पर एक परिचालक ने बताया कि यात्रियों को पैनिक बटन के इस्तेमाल की जानकारी नहीं है। बड़ी संख्या में यात्री यह समझते हैं कि यह बटन दबाने से चालक या परिचालक को घंटी सुनाई देगी और बस रोक दी जाएगी। इतना ही नहीं कई बार तो टिकट बनवाने के लिए भी यात्री इसी बटन को दबा देते हैं। जब कंट्रोल रूम से सवाल होता है तो सवारियाें से बटन दबाने के बारे में पूछा जाता है। इस दौरान पता चलता है कि टिकट बनवाने के लिए बटन दबाया गया था।
केस-1
रोडवेज की बस संख्या यूपी 30 एटी 2680 में रविवार को पैनिक बटन दबा। कंट्रोल रूम से संबंधित बस के परिचालक से संपर्क किया गया। बस के परिचालक ने बताया कि यात्री ने बस रुकवाने के लिए बटन दबाया था।
केस-2
रोडवेज की बस संख्या यूपी 78 जेएन 8090 में शनिवार को पैनिक बटन दबा। कंट्रोल रूम से बस के परिचालक से संपर्क साधा गया। परिचालक ने बस में सवार लोगों से पूछा तो पता चला कि बच्चे ने गलती से दबा दिया।
पैनिक बटन का इस्तेमाल आपात या अप्रिय स्थिति में करना चाहिए। यह सही है कि अधिकांश लोगों को पैनिक बटन कब इस्तेमाल करना है या क्यों इस्तेमाल करना है की जानकारी नहीं है। यही वजह है कि ज्यादातर लोग बेवजह ही पैनिक बटन दबा देते हैं। जब संबंधित बस के परिचालक से काॅल की जाती है तो पता चलता है कि गलती से दबा दिया। -गौरव वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज