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Hardoi News: हड्डी वार्ड में इंप्लांट का खेल, विभागाध्यक्ष की कुर्सी छिनी

Tue, 07 Jul 2026 11:11 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 11:11 PM IST
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Implant racket in orthopaedic ward; Head of Department stripped of post.
हरदोई। मेडिकल कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में है। हड्डी रोग विभाग में चिकित्सकों के बीच सामंजस्य की कमी अब खुलकर सामने आ गई है। रोज आ रही शिकायतों को देखते हुए विभागाध्यक्ष ने चार्ज वापस ले लिया है। चर्चा यह भी है कि आर्थोपैडिक विभाग में इंप्लांट की खरीद को लेकर डॉक्टर और वेंडर के बीच गठजोड़ की जानकारी मिलने पर भी प्रशासन ने सख्त रुख दिखाया है।
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हड्डी से संबंधित होने वाले ऑपरेशनों में जमकर मनमानी होती है। ऑपरेशन कराने वाले व्यक्ति का अगर कोई इंप्लांट करना होता है तो संबंधित मरीज को महंगे इंप्लांट खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं इंप्लांट के लिए लाया गया उपकरण मरीज और उसके परिजन को देखने को भी नहीं मिलता था और वह सीधे वेंडर के माध्यम से ऑपरेशन थिएटर में पहुंच जाता था। कई बार तो मरीजों ने बताए हुए इंप्लांट के स्थान पर सस्ते इंप्लांट लगाने की शिकायत की है।
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इंप्लांट को लेकर हड्डी रोग विभाग में डॉक्टरों के बीच खींचतान मची हुई है और दो गुटों में आपस में सामंजस्य नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर अभी कुछ दिन पहले आए एक मामले में वेंडर ने तय रेट से अधिक वसूली की और एक डॉक्टर का नाम भी आया। इसी मामले को लेकर प्रधानाचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रह्मप्रकाश की अन्य डॉक्टरों के बीच आपसी सामंजस्य न होने पर हटा दिया है। उनके स्थान पर सीएमएम डॉ. चंद्र कुमार को विभागाध्यक्ष पद पर तैनात किया गया है।
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इंप्लांट में अनियमितता के आ चुके कई मामले
मरीजों के ऑपरेशन के दौरान इंप्लांट में अनियमितता के मामले में कई बार शिकायत हो चुकी है। बता दें कि चीलपुरवा स्थित एक मेडिकल स्टोर से खरीदी की जाती है और उपकरण सीधे ऑपरेशन थिएटर पहुंच जाता है। मरीज के तीमारदार को सिर्फ रुपये जमा करने होते हैं। इसके बाद क्या इंप्लांट किया गया है यह मरीज और उसके तीमारदार को पता नहीं होता है।


केस-1- वैटगंज निवासी परशुराम के पैर का ऑपरेशन किया गया था। इस दौरान मरीज के परिजन को 31,500 रुपये का फिक्सर लगाया गया था। इसी में मरीज ने कीमत से अधिक रुपये लिए जाने की बात कही थी।


केस-2- बावन ब्लॉक के अब्दुलपुरवा मोहल्ला निवासी इशहाक अली ने बताया कि उनके पुत्र हसनैन के बायें पैर की फीमर टूटने पर बताए गए इंप्लांट के स्थान पर दूसरा लगाया जबकि उनसे 14 हजार रुपये जमा कराए गए थे। इसके बाद भी पैर में कोई सुधार नहीं हुआ।



हड्डी रोग विभाग की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, डॉक्टरों के बीच आपस में सामंजस्य भी नहीं बन रहा था। इसलिए विभागाध्यक्ष को हटाकर सीएमएस को चार्ज दिया गया है। साथ ही मामलों की जांच भी करवाई जा रही है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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