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इमरजेंसी में नहीं थे डॉक्टर, थमीं सांसें

Thu, 03 Feb 2022 10:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 10:15 PM IST
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imarajensee mein nahin the doktar, thameen saansen
हरदोई। जिला अस्पताल की बदहाल इमरजेंसी सेवाओं में बृहस्पतिवार को एक और दाग लग गया। सुबह कक्ष से दो घंटे तक डॉक्टर नदारद रहे, जिससे इलाज के अभाव में वृद्धा की जान चली गई।
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परिजन अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसते हुए शव लेकर घर चले गए। मझिला थाना क्षेत्र के ग्राम पारा कलॉ निवासी बिटिया सिंह (65) सांस रोगी थी। बृहस्पतिवार को सुबह तबीयत बिगड़ गई।
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परिजन निजी वाहन से जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाए। यहां पर सुबह आठ बजे से सर्जन डॉ. अशोक प्रियदर्शी व मेडिकल कॉलेज की जेआर की ड्यूटी थी।
रात की शिफ्ट की ड्यूटी कर डॉक्टर दूसरे डॉक्टर का एक घंटे तक इंतजार कर कक्ष से चले गए। नौ बजे के बाद से इमरजेंसी में डॉक्टरों की कुर्सी खाली रही।
इस दौरान बिटिया सिंह को कर्मचारियों ने ऑक्सीजन लगा दी, लेकिन उसका इलाज नहीं शुरू हो सका। दो घंटे तक डॉक्टर का इंतजार करने के बाद भी डॉक्टर नहीं आए।
इससे खफा परिजनों ने इमरजेंसी कक्ष में बैठे कर्मचारियों से गुहार लगाई। जिस पर कर्मचारियों व तीमारदारों में झड़प शुरू हो गई। मामला तूल पकड़ता इसके पहले डॉक्टर मौके पर आए।
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डॉक्टर ने नब्ज देखकर वृद्धा को मृत घोषित कर दिया। वृद्धा की मौत के बाद से आक्रोशित परिजन शव लेकर चले गए। इस संबंध में डॉक्टरों का कहना था कि वृद्धा की हालत पहले से गंभीर थी।
भर्ती होने के आधे घंटे बाद उसने दम तोड़ दिया था। उधर, डॉ. प्रियदर्शी की ड्यूटी इमरजेंसी में थी। सुबह नौ से लगभग 11 बजे तक ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। तीमारदारों के मुताबिक, वह इमरजेंसी की ड्यूटी छोड़कर ओपीडी में बैठे रहे।
मर गई थी, फिर भी देते रहे ऑक्सीजन
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी से एक मरीज की जान चली गई। इमरजेंसी में स्टाफ की अनदेखी कहें या लापरवाही कि मरीज की मौत के बाद भी ऑक्सीजन चालू रही।
हद तो तब हो गई जब वृद्धा के मरने के बाद डॉक्टर के आने तक परिजनों से मौत को छुपाने के लिए कर्मी ऑक्सीजन से सांसें देते रहे।
कैंसर पीड़ित महिला भी दर्द से कराहती रही
सुरसा थाना क्षेत्र घमोहिया निवासी रामदुलारी (50) कैंसर से पीड़ित थी। बृहस्पतिवार को सुबह उसके पेट में दर्द शुरू हो गया। परिजन उसे जिला अस्पताल के इमरजेंसी में लाए।
महिला के पति राम सिंह ने बताया कि सुबह नौ बजे से कोई डॉक्टर नहीं था। जिससे उसे इलाज नहीं मिल सका। आखिर में दर्द से कराहती रामदुलारी कौन सुने भगवान कहकर दर्द सहती रही।
इमरजेंसी में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने की जिम्मेदारी सीएमएस की है। सीएमएस को राउंड कर व्यवस्थाएं देखने के निर्देश दिए गए। अगर इमरजेंसी में डॉक्टर ड्यूटी से नदारद रहे हैं, तो सीएमएस से जानकारी कर स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा।

डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
बृहस्पतिवार को सुबह इमरजेंसी ड्यूटी के साथ ओपीडी में भी ड्यूटी थी। जिसके चलते इमरजेंसी में तैनात फार्मासिस्ट को बताकर चले गए थे। मरीज बेहोशी की हालत में था। उसे भर्ती कराकर फार्मासिस्ट से इंजेक्शन लगाने को कहा था।
-डॉ. अशोक प्रियदर्शी
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