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बर्फीली हवाओं से कंपकंपाए शहरी
अमर उजाला ब्यूरो हरदोई।
Updated Sat, 16 Jan 2016 12:56 AM IST
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सर्दी के अंतिम पड़ाव पर शुक्रवार को ठंडी हवाओं के झोंकों ने लोगों को कंपकंपाया। तापमान भले ही कुछ डिग्री ऊपर नीचे हो रहा हो लेकिन हवा में घुली ठंड ने जनजीवन की रफ्तार धीमी कर दी है। शहर में छाए कोहरे के चलते सड़क पर वाहन रेंगे।
शुक्रवार को ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू किया। सुबह छाए कोहरे से जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त रहा। बच्चों से लेकर बूढ़े तक कंपकंपाएं बगैर न रह सके। सड़क पर फुटपाथ पर सोने वाले फटी लिपटी शालों से ही अपने आप का बचाव करते ठिठुरते देखे गए। मौसम वैज्ञानिक जयशंकर मिश्र ने बताया कि दोपहर बाद सूर्य ने दर्शन दिए हैं तब तक कोहरे की धुंध आसमान में छाई रही। अधिकतम तापमान 22 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 10 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने बताया कि पूरब से आने वाली बर्फीली हवाओं ने ठंड को बढ़ाने का काम किया है।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप व दमा पीड़ितों को अधिक देखभाल की जरूरत
वरिष्ठ चिकित्सक सीपी कटियार ने बताया कि बच्चों व बुजुर्गों का शरीर मौसम के बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। रोगियों में प्रतिरोधी क्षमता की कमी होती है। ऐसे में बच्चे, बुजुर्गों में रोगों के बढ़ने का खतरा अधिक रहता है। लापरवाही में जान पर बन सकती है। दमा रोगियों के मामले में गौर करें तो ठंड उन्हें अधिक प्रभावित करती है। ठंड से बचाव के लिए शरीर खुद को संकुचित करता है ऐसा ही रक्त नलिकाओं के साथ ही होता है। इससे रक्तदाब बढ़ जाता है और उच्च रक्तचाप के रोगियों को आघात की संभावना बढ़ जाती है। ठंड बढ़ने से सर्दी, जुखाम, खांसी, बुखार, डायरिया, ब्रांकाइटिस आदि का संक्रमण बढ़ जाता है। ठंडी हवा के साथ वायरस श्वांस नली में प्रवेश कर जाते हैं। बच्चों में संक्रमण से डायरिया, निमोनिया की संभावना रहती है। खुजली व शरीर में लाल चकत्ते भी पड़ सकते हैं।
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शुक्रवार को ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू किया। सुबह छाए कोहरे से जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त रहा। बच्चों से लेकर बूढ़े तक कंपकंपाएं बगैर न रह सके। सड़क पर फुटपाथ पर सोने वाले फटी लिपटी शालों से ही अपने आप का बचाव करते ठिठुरते देखे गए। मौसम वैज्ञानिक जयशंकर मिश्र ने बताया कि दोपहर बाद सूर्य ने दर्शन दिए हैं तब तक कोहरे की धुंध आसमान में छाई रही। अधिकतम तापमान 22 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 10 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने बताया कि पूरब से आने वाली बर्फीली हवाओं ने ठंड को बढ़ाने का काम किया है।
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मधुमेह, उच्च रक्तचाप व दमा पीड़ितों को अधिक देखभाल की जरूरत
वरिष्ठ चिकित्सक सीपी कटियार ने बताया कि बच्चों व बुजुर्गों का शरीर मौसम के बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। रोगियों में प्रतिरोधी क्षमता की कमी होती है। ऐसे में बच्चे, बुजुर्गों में रोगों के बढ़ने का खतरा अधिक रहता है। लापरवाही में जान पर बन सकती है। दमा रोगियों के मामले में गौर करें तो ठंड उन्हें अधिक प्रभावित करती है। ठंड से बचाव के लिए शरीर खुद को संकुचित करता है ऐसा ही रक्त नलिकाओं के साथ ही होता है। इससे रक्तदाब बढ़ जाता है और उच्च रक्तचाप के रोगियों को आघात की संभावना बढ़ जाती है। ठंड बढ़ने से सर्दी, जुखाम, खांसी, बुखार, डायरिया, ब्रांकाइटिस आदि का संक्रमण बढ़ जाता है। ठंडी हवा के साथ वायरस श्वांस नली में प्रवेश कर जाते हैं। बच्चों में संक्रमण से डायरिया, निमोनिया की संभावना रहती है। खुजली व शरीर में लाल चकत्ते भी पड़ सकते हैं।
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