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हरदोई की सूरत पर बदनुमा दाग लगा रहीं अवैध होर्डिंगें
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प्रचार होर्डिंगों ने कुछ इस तरह पाटा नवीन गल्ला मंडी का मुख्यद्वार। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। राहगीरों को असुविधा न हो, इसके लिए चौराहों पर होर्डिंग न लगाने का नियम है लेकिन जिले में अधिकांश चौराहे होर्डिंग से पटे नजर आ रहे हैं। बेतरतीब ढंग से लगे ये होर्डिंग शहर की सूरत बिगाड़ रहे हैं। नगर पालिका नियम के विपरीत होने पर भी इस पर ध्यान नहीं दे रही। जिम्मेदार ठेकेदारों का पक्ष लेते दिख रहे हैं।
शहर के सिनेमा चौराहा, नुमाइश चौराहा, पिहानी चुंगी, बिलग्राम चुंगी, सोल्जर बोर्ड चौराहा, कलक्ट्रेट यहां तक कि सरकारी भवनों के आसपास भी होर्डिंग्स लगा दी गईं हैं। ठेकेदार से मिलकर कहीं भी विज्ञापन, राजनीतिज्ञों या अन्य प्रचार संबंधित होर्डिंग लगा दी जाती हैं। खास बात यह है कि होर्डिंग लगाने की नियमावली नगर पालिका के पास है लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा। ठेकेदार ही पूरे साल होर्डिंग लगाता है और पैसा वसूलता है। नगर पालिका सदर में प्रति वर्ष तीन से साढ़े तीन लाख का ठेका होता है।
ठेका होने के बाद होर्डिंग कहां, कैसे व कब लगी, इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। सूत्रों की माने तो ठेका तो बस तीन लाख का उठता है पर कमाई करोड़ तक पहुंच जाती है। हर चौराहे होर्डिंग से पटे हैं। प्रमुख चौराहों पर होर्डिंग लगवाने के लिए काफी शुल्क देना होता है।
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इस बार हुआ तीन लाख 44 हजार का ठेका
इस बार भी नगर पालिका ने होर्डिंग को लेकर तीन लाख 44 हजार 500 रुपये का ठेका दिया है। पिछले सालों में भी करीब तीन लाख का ही ठेका उठाया जाता रहा है।
प्रचार-प्रसार में भूले नियम
कई कंपनियां प्रचार-प्रसार के लिए शहर के मुख्य चौराहों व मार्गों पर कुछ जगह चिह्नित कर वहां होर्डिंग तान देती हैं। जिन जगहों का चयन किया गया है, वहां होर्डिंग लगाने के नियमों का पालन नहीं किया गया। कहीं सरकारी बिल्डिंग के सामने तो मंडी गेट व कलक्ट्रेट गेट पर ही होर्डिंग तान दिए गए हैं। कई चौराहों पर होर्डिंग लगी होने के कारण वाहन चालकों का ध्यान भी भटक जाता है। जिससे आए दिन दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
नगर पालिका ईओ रविशंकर शुक्ल का कहना है कि नियमों को देखकर ही होर्डिंग संबंधित ठेकेदार लगवाता है। नियमावली भी बनी है। कितनी अवैध लगीं, कितनी कार्रवाई हुईं, यह वह नहीं बता सके।
ठेकेदार जाने
पटल बाबू कमल का कहना था यह सब ठेकेदार जाने, उन्हें जानकारी नहीं है। ठेका उठ गया बस।
यह हैं नियम
- सड़क किनारे निर्धारित दूरी पर चिह्नित स्थानों पर होर्डिंग लगाने की अनुमति है।
- पर्यावरण व यातायात को प्रभावित करने वाली होर्डिंग नहीं लगेंगी।
- शिक्षण संस्थानों, ऐतिहासिक स्थलों, मूर्तियों के पास होर्डिंग लगाना प्रतिबंधित है।
- होर्डिंगों पर जीपीएस आधारित मास्टर प्लान बनाकर रखी जानी है नजर।
- होर्डिंग के लिए नगर पालिका के सक्षम अधिकारी से कराना होगा पंजीयन।
- अपनी बिल्डिंग पर होर्डिंग लगवाने के लिए भी पंजीयन जरूरी है।
- नियमों का उल्लंघन होने पर लाइसेंस निरस्त होगा।
- सड़क के रैंप पर, रोड के ऊपर, ओवरहेड होर्डिंग, चौराहे-तिराहे या मार्ग संगम से 25 मीटर से कम दूरी वाले, संपत्ति स्वामी की अनुमति के बिना होर्डिंग अवैध माने जाएंगे।
- विज्ञापन जोन का वर्गीकरण होगा। बाजारों और दूर-दराज के इलाकों में अलग-अलग दरें होंगी।
इनको किया जा रहा नजरअंदाज
- मोटर व्हीकल एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा है।
- सड़क किनारे तान दिए जा रहे हैं होर्डिंग।
- होर्डिंग स्ट्रक्चर के नियम ताक पर रख दिए गए हैं।
- बिल्डिंगों की छत का दस के बजाए 80 प्रतिशत तक एरिया होर्डिंग से कवर किया जा रहा है।
- प्रतिबंधित स्थलों जैसे फुटपाथ, सरकारी भवनों में भी होर्डिंग लगाए गए हैं।
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शहर के सिनेमा चौराहा, नुमाइश चौराहा, पिहानी चुंगी, बिलग्राम चुंगी, सोल्जर बोर्ड चौराहा, कलक्ट्रेट यहां तक कि सरकारी भवनों के आसपास भी होर्डिंग्स लगा दी गईं हैं। ठेकेदार से मिलकर कहीं भी विज्ञापन, राजनीतिज्ञों या अन्य प्रचार संबंधित होर्डिंग लगा दी जाती हैं। खास बात यह है कि होर्डिंग लगाने की नियमावली नगर पालिका के पास है लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा। ठेकेदार ही पूरे साल होर्डिंग लगाता है और पैसा वसूलता है। नगर पालिका सदर में प्रति वर्ष तीन से साढ़े तीन लाख का ठेका होता है।
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ठेका होने के बाद होर्डिंग कहां, कैसे व कब लगी, इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। सूत्रों की माने तो ठेका तो बस तीन लाख का उठता है पर कमाई करोड़ तक पहुंच जाती है। हर चौराहे होर्डिंग से पटे हैं। प्रमुख चौराहों पर होर्डिंग लगवाने के लिए काफी शुल्क देना होता है।
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इस बार हुआ तीन लाख 44 हजार का ठेका
इस बार भी नगर पालिका ने होर्डिंग को लेकर तीन लाख 44 हजार 500 रुपये का ठेका दिया है। पिछले सालों में भी करीब तीन लाख का ही ठेका उठाया जाता रहा है।
प्रचार-प्रसार में भूले नियम
कई कंपनियां प्रचार-प्रसार के लिए शहर के मुख्य चौराहों व मार्गों पर कुछ जगह चिह्नित कर वहां होर्डिंग तान देती हैं। जिन जगहों का चयन किया गया है, वहां होर्डिंग लगाने के नियमों का पालन नहीं किया गया। कहीं सरकारी बिल्डिंग के सामने तो मंडी गेट व कलक्ट्रेट गेट पर ही होर्डिंग तान दिए गए हैं। कई चौराहों पर होर्डिंग लगी होने के कारण वाहन चालकों का ध्यान भी भटक जाता है। जिससे आए दिन दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
नगर पालिका ईओ रविशंकर शुक्ल का कहना है कि नियमों को देखकर ही होर्डिंग संबंधित ठेकेदार लगवाता है। नियमावली भी बनी है। कितनी अवैध लगीं, कितनी कार्रवाई हुईं, यह वह नहीं बता सके।
ठेकेदार जाने
पटल बाबू कमल का कहना था यह सब ठेकेदार जाने, उन्हें जानकारी नहीं है। ठेका उठ गया बस।
यह हैं नियम
- सड़क किनारे निर्धारित दूरी पर चिह्नित स्थानों पर होर्डिंग लगाने की अनुमति है।
- पर्यावरण व यातायात को प्रभावित करने वाली होर्डिंग नहीं लगेंगी।
- शिक्षण संस्थानों, ऐतिहासिक स्थलों, मूर्तियों के पास होर्डिंग लगाना प्रतिबंधित है।
- होर्डिंगों पर जीपीएस आधारित मास्टर प्लान बनाकर रखी जानी है नजर।
- होर्डिंग के लिए नगर पालिका के सक्षम अधिकारी से कराना होगा पंजीयन।
- अपनी बिल्डिंग पर होर्डिंग लगवाने के लिए भी पंजीयन जरूरी है।
- नियमों का उल्लंघन होने पर लाइसेंस निरस्त होगा।
- सड़क के रैंप पर, रोड के ऊपर, ओवरहेड होर्डिंग, चौराहे-तिराहे या मार्ग संगम से 25 मीटर से कम दूरी वाले, संपत्ति स्वामी की अनुमति के बिना होर्डिंग अवैध माने जाएंगे।
- विज्ञापन जोन का वर्गीकरण होगा। बाजारों और दूर-दराज के इलाकों में अलग-अलग दरें होंगी।
इनको किया जा रहा नजरअंदाज
- मोटर व्हीकल एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा है।
- सड़क किनारे तान दिए जा रहे हैं होर्डिंग।
- होर्डिंग स्ट्रक्चर के नियम ताक पर रख दिए गए हैं।
- बिल्डिंगों की छत का दस के बजाए 80 प्रतिशत तक एरिया होर्डिंग से कवर किया जा रहा है।
- प्रतिबंधित स्थलों जैसे फुटपाथ, सरकारी भवनों में भी होर्डिंग लगाए गए हैं।