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11 आयुर्वेदिक हेल्थ वेलनेस सेंटरों में बनेगी हर्बल वाटिका
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हरदोई। कोरोना काल में आयुर्वेदिक इलाज काफी कारगर साबित रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए 11 आयुर्वेदिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में हर्बल वाटिका बनाने की तैयारी है। शासन के निर्देशानुसार आयुष विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। वाटिका में अलग-किस्म के 20 औषधीय पौधे रोपे जाएंगे। लोगों को इन औषधियों की उपयोगिता बताई जाएगी।
जिले में 45 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। कोरोना काल में आयुर्वेदिक औषधि संजीवनी साबित हो रही है। इसके बाद से लोगों में इसके प्रति जागरुकता बढ़ी है। आयुर्वेदिक अस्पतालों मेें 11 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले गए। इनमें हर प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इन सेंटरों के संचालन के लिए फार्मासिस्ट, चिकित्सक व एएनएम की तैनाती की गई है। अब यहां हर्बल वाटिका बनाई जाएंगी। इसमें आंवला, गिलोय, नीम, अश्वगंधा, ऐलोवेरा सहित 20 किस्म के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी ने बताया कि कोरोना काल में यही पौधे संजीवनी साबित हुए हैं।
इन अस्पतालों में होगा निर्माण
जिले में 45 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। इनमें 11 निजी भवन में चल रहे हैं। इन्हें ही हर्बल वाटिका के लिए चिह्नित किया गया है। सदरपुर, अयारी, माधौगंज, राघौपुर, बिरौली, समुखा, दौलतपुर, चठिया, भदैंचा, सैतियापुर, गौसगंज अस्पताल इसके लिए चयनित हैं।
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उच्चाधिकारियों से अनुमति मिलने पर हर्बल वाटिका बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे लोगों को आयुर्वेदिक औषधियों की उपयोगिता के बारे में जानकारी मिलेगी। - डॉ. आशा रावत, जिला आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी
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जिले में 45 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। कोरोना काल में आयुर्वेदिक औषधि संजीवनी साबित हो रही है। इसके बाद से लोगों में इसके प्रति जागरुकता बढ़ी है। आयुर्वेदिक अस्पतालों मेें 11 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले गए। इनमें हर प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इन सेंटरों के संचालन के लिए फार्मासिस्ट, चिकित्सक व एएनएम की तैनाती की गई है। अब यहां हर्बल वाटिका बनाई जाएंगी। इसमें आंवला, गिलोय, नीम, अश्वगंधा, ऐलोवेरा सहित 20 किस्म के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी ने बताया कि कोरोना काल में यही पौधे संजीवनी साबित हुए हैं।
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इन अस्पतालों में होगा निर्माण
जिले में 45 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। इनमें 11 निजी भवन में चल रहे हैं। इन्हें ही हर्बल वाटिका के लिए चिह्नित किया गया है। सदरपुर, अयारी, माधौगंज, राघौपुर, बिरौली, समुखा, दौलतपुर, चठिया, भदैंचा, सैतियापुर, गौसगंज अस्पताल इसके लिए चयनित हैं।
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उच्चाधिकारियों से अनुमति मिलने पर हर्बल वाटिका बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे लोगों को आयुर्वेदिक औषधियों की उपयोगिता के बारे में जानकारी मिलेगी। - डॉ. आशा रावत, जिला आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी