{"_id":"6121078b8ebc3e7a1f5e0713","slug":"hardoi-news-hardoi-news-knp6473666109","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्कृत संस्थान डॉ. मधुलिका को करेगा सम्मानित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्कृत संस्थान डॉ. मधुलिका को करेगा सम्मानित
विज्ञापन
फोटो-28- डॉ. मधुलिका। संवाद
- फोटो : HARDOI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संडीला। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से नगर की बेटी डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव को विशिष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें यह सम्मान गोरक्ष विजयोदयम संस्कृत नाटक की रचना के लिए दिया जाएगा।
नगर के संत कृपाल नगर निवासी संस्कृत के विद्वान आचार्य पुष्यमित्र शास्त्री की बेटी डॉ. मधुलिका ने कानपुर विश्वविद्यालय से संस्कृत में पीएचडी की उपाधि हासिल की है। वर्ष 2017 में डॉ. मधुलिका संस्कृत गीतों पर आधारित मधु गीतांजलि नाम की पुस्तक के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित भी की जा चुकी हैं। इस बार संस्कृत संस्थान ने उन्हें गोरखनाथ के चरित्र एवं योग सिद्धांतों पर आधारित गोरक्ष विजयोदयम संस्कृत नाटक की रचना के लिए चयनित किया है। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से उन्हें विशिष्ट पुरस्कार दिया जाएगा।
डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव ने बताया कि वह देव भाषा संस्कृत के लिए पूर्ण समर्पित हैं, उन्हें इसकी प्रेरणा उनके पिता आचार्य पुष्यमित्र शास्त्री से मिली है। बताया कि वर्तमान में सेंट डॉन भास्कर कॉलेज लखीमपुर में प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर के संत कृपाल नगर निवासी संस्कृत के विद्वान आचार्य पुष्यमित्र शास्त्री की बेटी डॉ. मधुलिका ने कानपुर विश्वविद्यालय से संस्कृत में पीएचडी की उपाधि हासिल की है। वर्ष 2017 में डॉ. मधुलिका संस्कृत गीतों पर आधारित मधु गीतांजलि नाम की पुस्तक के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित भी की जा चुकी हैं। इस बार संस्कृत संस्थान ने उन्हें गोरखनाथ के चरित्र एवं योग सिद्धांतों पर आधारित गोरक्ष विजयोदयम संस्कृत नाटक की रचना के लिए चयनित किया है। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से उन्हें विशिष्ट पुरस्कार दिया जाएगा।
विज्ञापन
डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव ने बताया कि वह देव भाषा संस्कृत के लिए पूर्ण समर्पित हैं, उन्हें इसकी प्रेरणा उनके पिता आचार्य पुष्यमित्र शास्त्री से मिली है। बताया कि वर्तमान में सेंट डॉन भास्कर कॉलेज लखीमपुर में प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं।
विज्ञापन