फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   hardoi news,Good news: now 100 beds will get delivery facilities in the hospital

100 शैय्या अस्पताल में मिलेगी सिजेरियन की सुविधाएं

Mon, 16 May 2022 10:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 16 May 2022 10:30 PM IST
विज्ञापन
hardoi news,Good news: now 100 beds will get delivery facilities in the hospital
फोटो-18- 100 बेड हॉस्पिटल - फोटो : HARDOI
हरदोई। 100 शैया अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को जल्द ही प्रसव की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। अस्पताल प्रबंधन ने यहां पर 10 बेड का वार्ड बनाकर स्त्री रोग विशेषज्ञ और नर्सों की तैनाती कर दी है।
विज्ञापन

अभी तक यहां आने वाली प्रसूताओं को टरका दिया जाता था। उनके परिजन मजबूरन निजी अस्पताल ले जाकर प्रसव कराते थे, इसमें उन्हें काफी पैसा खर्च करना पड़ता था।
विज्ञापन

हरदोई-लखनऊ मार्ग स्थित नयागांव के सीएमओ कार्यालय परिसर में करीब 34 करोड़ की लागत से 100 शैया संयुक्त अस्पताल बना है। इसकी शुरुआत एक जनवरी 2019 से हो गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

अस्पताल में ओपीडी होती थी, लेकिन मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे थे। अस्पताल में प्रसव की सुविधा भी नहीं मिल रही थी। यहां आने वाली प्रसूताओं को अस्पताल में तैनात कर्मी महिला अस्पताल या फिर निजी अस्पताल लेकर जाने की सलाह देकर टरका रहे थे।
अब शासन स्तर पर अस्पताल में एक गॉयनोकोलॉजिस्ट (स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ) और चार स्टाफ नर्स की तैनाती हो गई है। ऐसे में यहां प्रसूताओं को सामान्य प्रसव के साथ ही सीजेरियन की सुविधा भी मिल सकेगी। डॉक्टर और नर्सों की तैनाती होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने यहां पर 10 बेड का एक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस वार्ड बनाया है।
सीजेरियन केस के लिए बनेगा वरदान
100 शैया संयुक्त चिकित्सालय में प्रसव की सुविधा शुरू होने से ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को प्रसव के लिए मुख्यालय की भागदौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। खास बात यह है कि विशेषज्ञ डॉक्टर होने और मरीजों की संख्या कम होने से सीजेरियन मामलों के लिए यहां की सुविधाएं वरदान साबित होंगी।
महिला अस्पताल में सीजेरियन केस से बचते जिम्मेदार
जिला महिला अस्पताल में अधिकतर सीएचसी/पीएचसी से गंभीर केस रेफर होकर आते हैं। ऐसे में यहां पर कभी बेहोशी के चिकित्सक की तैनाती न होने या कभी कोई अन्य स्टाफ न होने की बात कहकर ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी सीजेरियन केस की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं।

बंद होगा आशाओं का निजी अस्पताल से मेल
महिला अस्पताल में सीजेरियन केस को टरकाने का बड़ा कारण यहां पर 24 घंटेे मौजूद रहने वाली कुछ आशा कार्यकर्ता व अन्य महिलाएं हैं। इन आशा कार्यकर्ता और महिलाओं को निजी अस्पतालों से मोटा कमीशन मिलता है। अब इस खेल के रुकने की उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed