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100 शैय्या अस्पताल में मिलेगी सिजेरियन की सुविधाएं
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फोटो-18- 100 बेड हॉस्पिटल
- फोटो : HARDOI
हरदोई। 100 शैया अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को जल्द ही प्रसव की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। अस्पताल प्रबंधन ने यहां पर 10 बेड का वार्ड बनाकर स्त्री रोग विशेषज्ञ और नर्सों की तैनाती कर दी है।
अभी तक यहां आने वाली प्रसूताओं को टरका दिया जाता था। उनके परिजन मजबूरन निजी अस्पताल ले जाकर प्रसव कराते थे, इसमें उन्हें काफी पैसा खर्च करना पड़ता था।
हरदोई-लखनऊ मार्ग स्थित नयागांव के सीएमओ कार्यालय परिसर में करीब 34 करोड़ की लागत से 100 शैया संयुक्त अस्पताल बना है। इसकी शुरुआत एक जनवरी 2019 से हो गई थी।
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अस्पताल में ओपीडी होती थी, लेकिन मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे थे। अस्पताल में प्रसव की सुविधा भी नहीं मिल रही थी। यहां आने वाली प्रसूताओं को अस्पताल में तैनात कर्मी महिला अस्पताल या फिर निजी अस्पताल लेकर जाने की सलाह देकर टरका रहे थे।
अब शासन स्तर पर अस्पताल में एक गॉयनोकोलॉजिस्ट (स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ) और चार स्टाफ नर्स की तैनाती हो गई है। ऐसे में यहां प्रसूताओं को सामान्य प्रसव के साथ ही सीजेरियन की सुविधा भी मिल सकेगी। डॉक्टर और नर्सों की तैनाती होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने यहां पर 10 बेड का एक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस वार्ड बनाया है।
सीजेरियन केस के लिए बनेगा वरदान
100 शैया संयुक्त चिकित्सालय में प्रसव की सुविधा शुरू होने से ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को प्रसव के लिए मुख्यालय की भागदौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। खास बात यह है कि विशेषज्ञ डॉक्टर होने और मरीजों की संख्या कम होने से सीजेरियन मामलों के लिए यहां की सुविधाएं वरदान साबित होंगी।
महिला अस्पताल में सीजेरियन केस से बचते जिम्मेदार
जिला महिला अस्पताल में अधिकतर सीएचसी/पीएचसी से गंभीर केस रेफर होकर आते हैं। ऐसे में यहां पर कभी बेहोशी के चिकित्सक की तैनाती न होने या कभी कोई अन्य स्टाफ न होने की बात कहकर ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी सीजेरियन केस की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं।
बंद होगा आशाओं का निजी अस्पताल से मेल
महिला अस्पताल में सीजेरियन केस को टरकाने का बड़ा कारण यहां पर 24 घंटेे मौजूद रहने वाली कुछ आशा कार्यकर्ता व अन्य महिलाएं हैं। इन आशा कार्यकर्ता और महिलाओं को निजी अस्पतालों से मोटा कमीशन मिलता है। अब इस खेल के रुकने की उम्मीद है।
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अभी तक यहां आने वाली प्रसूताओं को टरका दिया जाता था। उनके परिजन मजबूरन निजी अस्पताल ले जाकर प्रसव कराते थे, इसमें उन्हें काफी पैसा खर्च करना पड़ता था।
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हरदोई-लखनऊ मार्ग स्थित नयागांव के सीएमओ कार्यालय परिसर में करीब 34 करोड़ की लागत से 100 शैया संयुक्त अस्पताल बना है। इसकी शुरुआत एक जनवरी 2019 से हो गई थी।
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अस्पताल में ओपीडी होती थी, लेकिन मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे थे। अस्पताल में प्रसव की सुविधा भी नहीं मिल रही थी। यहां आने वाली प्रसूताओं को अस्पताल में तैनात कर्मी महिला अस्पताल या फिर निजी अस्पताल लेकर जाने की सलाह देकर टरका रहे थे।
अब शासन स्तर पर अस्पताल में एक गॉयनोकोलॉजिस्ट (स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ) और चार स्टाफ नर्स की तैनाती हो गई है। ऐसे में यहां प्रसूताओं को सामान्य प्रसव के साथ ही सीजेरियन की सुविधा भी मिल सकेगी। डॉक्टर और नर्सों की तैनाती होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने यहां पर 10 बेड का एक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस वार्ड बनाया है।
सीजेरियन केस के लिए बनेगा वरदान
100 शैया संयुक्त चिकित्सालय में प्रसव की सुविधा शुरू होने से ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को प्रसव के लिए मुख्यालय की भागदौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। खास बात यह है कि विशेषज्ञ डॉक्टर होने और मरीजों की संख्या कम होने से सीजेरियन मामलों के लिए यहां की सुविधाएं वरदान साबित होंगी।
महिला अस्पताल में सीजेरियन केस से बचते जिम्मेदार
जिला महिला अस्पताल में अधिकतर सीएचसी/पीएचसी से गंभीर केस रेफर होकर आते हैं। ऐसे में यहां पर कभी बेहोशी के चिकित्सक की तैनाती न होने या कभी कोई अन्य स्टाफ न होने की बात कहकर ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी सीजेरियन केस की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं।
बंद होगा आशाओं का निजी अस्पताल से मेल
महिला अस्पताल में सीजेरियन केस को टरकाने का बड़ा कारण यहां पर 24 घंटेे मौजूद रहने वाली कुछ आशा कार्यकर्ता व अन्य महिलाएं हैं। इन आशा कार्यकर्ता और महिलाओं को निजी अस्पतालों से मोटा कमीशन मिलता है। अब इस खेल के रुकने की उम्मीद है।