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रात को कफ्र्यू का डर तो भोर से ही चीखने चिल्लाने लगी हर डगर
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हरदोई। शहर के हालात बताते हैं कि कोरोना संक्रमण का भय कम लोगों को चौराहों पर पुलिस व चालान का भय ज्यादा सताता है। उसी का नतीजा है कि रविवार रात भले ही शहर शांत हो पर सोमवार सुबह होते ही एक बार फिर से चौराहों पर वाहनों का शोर गुल सुनाई देने लगा। आइए आपको भी दिखाते हैं कि कोरोना कर्फ्यू की दिन और रात में शहर में क्या हालात देखने को मिले....
दवा की दुकानें भी बंद हो जाने के बाद रात नौ बजे तक शहर के सिनेमा चौराहे पर ऐसा सन्नाटा छाया कि जनमानस तो छोड़िए एक मवेशी भी नहीं दिखा। इधर पंचायत चुनाव की मतगणना में लगे होने के कारण शहर के चौराहों पर पुलिस भी नदारद है।
शहर का सबसे व्यस्ततम मार्ग होने के चलते दिन हो या रात सिनेमा रोड कभी इतना शांत नहीं होता। रविवार रात नौ बजकर पांच मिनट पर इस रोड की सभी दुकानें खासकर दवाओं की दुकानें बंद होने से लोगों का इधर आना जाना नहीं हुआ जिसके चलते यह मार्ग भी बिल्कुल सन्नाटे में दिखा।
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सोमवार सुबह नौ बजे शहर के नुमाइश चौराहे पर एक बार फिर कोरोना कर्फ्यू में रोकने टोकने वाले न तो पुलिस कर्मी थे न यातायात कर्मी। जिसके बाद लोगों की हलचल इस मार्ग पर दिखने लगी। वाहनों का आना जाना इस मार्ग पर जारी रहा।
बावन चुंगी के निकट सुबह 10 बजे के करीब मार्ग पर साइकिल से लेकर चौपहिया वाहनों की ऐसी कतार दिखाई दी कि उसे देखकर लगा ही नहीं कि शहर में कोरोना कर्फ्यू भी लगा है।
यह भी खूब रही। लोग नियम का पालन अपने को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए नहीं बल्कि चालान से बचने के लिए ज्यादा करते हैं। सांडी रोड पर ई रिक्शे पर बैठे चालक व सवारियों को ही देख लीजिए। मुंह पर कोरोना से बचाव के लिए मास्क तो है पर सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए। मानकों से कहीं अधिक भरे ई रिक्शा में एक भी संक्रमित हुआ तो सोंच कर देखिए संक्रमण कहां कहां दौड़ेगा।
सांडी रोड पर सवारियों को लेकर जा रहे इस डाले को देखकर मुंह से यही पंक्ति निकलती है कि दीन दुनिया से बेखबर आखिर कहां जाना चाहता है अपना शहर। डाले में एक तो खचाखच सवारियां भरी हुई हैं तो दूसरे किसी के मुंह पर मास्क नहीं है। वहां से गुजर रहे लोगों ने एक ही बात कही कि आखिर यह सब क्यों संक्रमण को बुलावा दे रहे हैं।
नियम आखिर सभी के लिए बराबर है क्योंकि जान तो सभी की कीमती है। घंटाघर रोड पर परिवार के अन्य सदस्य जहां मास्क लगाए दिखे। वहीं महिला व बच्ची बिना मास्क लगाए दिखे। जिसे देखकर अन्य लोगों के मुंह से एक ही बात निकली कि मास्क लगाने के नियम सभी के लिए बराबर हैं।
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दवा की दुकानें भी बंद हो जाने के बाद रात नौ बजे तक शहर के सिनेमा चौराहे पर ऐसा सन्नाटा छाया कि जनमानस तो छोड़िए एक मवेशी भी नहीं दिखा। इधर पंचायत चुनाव की मतगणना में लगे होने के कारण शहर के चौराहों पर पुलिस भी नदारद है।
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शहर का सबसे व्यस्ततम मार्ग होने के चलते दिन हो या रात सिनेमा रोड कभी इतना शांत नहीं होता। रविवार रात नौ बजकर पांच मिनट पर इस रोड की सभी दुकानें खासकर दवाओं की दुकानें बंद होने से लोगों का इधर आना जाना नहीं हुआ जिसके चलते यह मार्ग भी बिल्कुल सन्नाटे में दिखा।
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सोमवार सुबह नौ बजे शहर के नुमाइश चौराहे पर एक बार फिर कोरोना कर्फ्यू में रोकने टोकने वाले न तो पुलिस कर्मी थे न यातायात कर्मी। जिसके बाद लोगों की हलचल इस मार्ग पर दिखने लगी। वाहनों का आना जाना इस मार्ग पर जारी रहा।
बावन चुंगी के निकट सुबह 10 बजे के करीब मार्ग पर साइकिल से लेकर चौपहिया वाहनों की ऐसी कतार दिखाई दी कि उसे देखकर लगा ही नहीं कि शहर में कोरोना कर्फ्यू भी लगा है।
यह भी खूब रही। लोग नियम का पालन अपने को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए नहीं बल्कि चालान से बचने के लिए ज्यादा करते हैं। सांडी रोड पर ई रिक्शे पर बैठे चालक व सवारियों को ही देख लीजिए। मुंह पर कोरोना से बचाव के लिए मास्क तो है पर सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए। मानकों से कहीं अधिक भरे ई रिक्शा में एक भी संक्रमित हुआ तो सोंच कर देखिए संक्रमण कहां कहां दौड़ेगा।
सांडी रोड पर सवारियों को लेकर जा रहे इस डाले को देखकर मुंह से यही पंक्ति निकलती है कि दीन दुनिया से बेखबर आखिर कहां जाना चाहता है अपना शहर। डाले में एक तो खचाखच सवारियां भरी हुई हैं तो दूसरे किसी के मुंह पर मास्क नहीं है। वहां से गुजर रहे लोगों ने एक ही बात कही कि आखिर यह सब क्यों संक्रमण को बुलावा दे रहे हैं।
नियम आखिर सभी के लिए बराबर है क्योंकि जान तो सभी की कीमती है। घंटाघर रोड पर परिवार के अन्य सदस्य जहां मास्क लगाए दिखे। वहीं महिला व बच्ची बिना मास्क लगाए दिखे। जिसे देखकर अन्य लोगों के मुंह से एक ही बात निकली कि मास्क लगाने के नियम सभी के लिए बराबर हैं।