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hardoi news, डिप्टी सीएम के संज्ञान में आने के बाद भी सात अस्पतालों में सीबीसी जांच बंद
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हरदोई। जिले के सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बंद सीबीसी जांच का मामला डिप्टी सीएम तक पहुंचा। उन्होंने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को एक सप्ताह में इन अस्पतालों में जांच शुरू कराने का आदेश दिया। इसके बाद भी मरीजों को यह सुविधा अभी तक नहीं मिल सकी है। उन्हें आज भी जांच के लिए 400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
150 प्रकार की बीमारियों का पता लगाने के लिए सीबीसी जांच होती है। इसमें डब्लूबीसी और प्लेटलेट्स की संख्या भी पता लगती है, लेकिन यह जांच जिले के सात सरकारी अस्पतालों में बंद है।
एक जुलाई को अमर उजाला ने इन अस्पतालों में सीबीसी जांच ठप होने की खबर प्रकाशित की। तब तत्कालीन सीएमओ डॉ. ओपी तिवारी ने चार से छह दिन में खराब मशीनों व अन्य खामियों को दूर कराकर सीबीसी जांच शुरू कराने का दावा किया था।
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इसके साथ ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस खबर को संज्ञान में लेकर सोशल मीडिया पर अपने ऑफिशियल अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर की थी।
इसमें महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को एक सप्ताह में समस्या का समाधान कराकर कार्रवाई की रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। डिप्टी सीएम के आदेश को एक सप्ताह से अधिक हो गया हैं। इसके बाद भी इन सरकारी अस्पतालों में सीबीसी जांच नहीं शुरू हो सकी है।
इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं हो पा रही है सीबीसी जांच
बिलग्राम- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी मशीन कई महीनों से मशीन खराब पड़ी है।
मल्लावां- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी जांच मशीन नहीं है। कई बार पत्र लिखा गया है।
कछौना- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी मशीन है, लेकिन रिजेंट नहीं। इसके लिए सात बार पत्र लिखा गया है।
पिहानी- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन महीने से सीबीसी मशीन खराब पड़ी है।
शाहाबाद- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मशीन है, छह माह से रिजेंट नहीं होने से जांच बंद है।
हरियावां- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी मशीन है, लेकिन जांच नहीं की जा रही है।
कोथावां- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी मशीन है, रिजेंट नहीं होने से जांच शुरू नहीं है।
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150 प्रकार की बीमारियों का पता लगाने के लिए सीबीसी जांच होती है। इसमें डब्लूबीसी और प्लेटलेट्स की संख्या भी पता लगती है, लेकिन यह जांच जिले के सात सरकारी अस्पतालों में बंद है।
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एक जुलाई को अमर उजाला ने इन अस्पतालों में सीबीसी जांच ठप होने की खबर प्रकाशित की। तब तत्कालीन सीएमओ डॉ. ओपी तिवारी ने चार से छह दिन में खराब मशीनों व अन्य खामियों को दूर कराकर सीबीसी जांच शुरू कराने का दावा किया था।
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इसके साथ ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस खबर को संज्ञान में लेकर सोशल मीडिया पर अपने ऑफिशियल अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर की थी।
इसमें महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को एक सप्ताह में समस्या का समाधान कराकर कार्रवाई की रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। डिप्टी सीएम के आदेश को एक सप्ताह से अधिक हो गया हैं। इसके बाद भी इन सरकारी अस्पतालों में सीबीसी जांच नहीं शुरू हो सकी है।
इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं हो पा रही है सीबीसी जांच
बिलग्राम- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी मशीन कई महीनों से मशीन खराब पड़ी है।
मल्लावां- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी जांच मशीन नहीं है। कई बार पत्र लिखा गया है।
कछौना- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी मशीन है, लेकिन रिजेंट नहीं। इसके लिए सात बार पत्र लिखा गया है।
पिहानी- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन महीने से सीबीसी मशीन खराब पड़ी है।
शाहाबाद- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मशीन है, छह माह से रिजेंट नहीं होने से जांच बंद है।
हरियावां- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी मशीन है, लेकिन जांच नहीं की जा रही है।
कोथावां- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी मशीन है, रिजेंट नहीं होने से जांच शुरू नहीं है।