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हरदोईः कागजों पर नहरें साफ, टेल पर खड़ी घास
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फोटो-23- झाड़ियों में विलुप्त माइनर
- फोटो : HARDOI
हरदोई। शारदा नहर के अंतर्गत आने वाले रजबहों और माइनर की सफाई के लिए शासन ने विभाग को हर वर्ष करोड़ों रुपये का बजट दिया। विभागीय अफसर कागजी आंकड़ों में हर वर्ष सभी माइनरों और रजबहों की टेल तक सफाई कराके पूरा बजट खत्म करते रहे।
हकीकत में कई ऐसे माइनर और रजबहे हैं, जिनकी टेल तक दशकों से सफाई नहीं हुई है। ऐसे में कई किलोमीटर तक इनका अस्तित्व ही खत्म हो गया है।
वहीं, कुछ जगहों पर आसपास के किसानों ने रजबहे और माइनर की जमीन को अपने खेतों में मिला लिया है। ऐसे में नहरों से सिंचित करीब 40 फीसदी खेती प्यासी ही रह जाती है।
हरदोई खंड शारदा नहर के अंतर्गत आंकड़ों में करीब 85 माइनर, रजबहा व नाला निकले हैं। इनकी दूरी करीब 751 किलोमीटर है। इस नहर से सदर तहसील, बिलग्राम और शाहाबाद तहसील के अंतर्गत आने वाले गांवों के एक लाख 24 हजार किसानों को मुफ्त सिंचाई योजना का लाभ दिए जाने का दावा किया जा रहा है।
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इसके पीछे सरकार की तरफ से हर वर्ष विभाग को माइनर व रजबहों की सफाई कराने के लिए मिलने वाला करोड़ों का बजट है। विभागीय अफसरों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 में तकरीबन तीन करोड़ 12 लाख रुपये रजबहों और माइनर की सफाई के लिए मिले थे।
इस धनराशि से चंद माइनरों व रजबहों की सफाई करा दी गई। इसी तरह पहले के वित्तीय वर्षों में बजट मिलते ही सभी माइनर व रजबहों की सफाई कराई जाती रही है।
अफसरों के दावों की पोल पिहानी और टड़ियावां ब्लॉक से निकले कुछ रजबहे खोल रहे हैं। इन रजबहों की अंतिम छोर तक दशकों से सफाई नहीं कराई गई है। ऐसे में कई किलोमीटर तक इनका अस्तित्व ही खत्म हो गया है। ऐसे ही हालात अधिकतर ब्लॉकों से निकले रजबहों और माइनरों के हैं।
बोले किसान
टडियावां ब्लॉक के अजीजपुर निवासी किसान राजेंद्र कुमार, बच्चन तिवारी, नोखेलाल, सरैंया निवासी कुछ किसानों ने बताया कि उनके यहां माइनर की दशकों से सफाई नहीं हुई। इसके चलते यहां पर रजबहा का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है।
वर्जन
पिछले वित्तीय वर्ष में माइनर व रजबहों की सफाई के लिए बजट नहीं मिला था। उसके पहले करीब तीन करोड़ का बजट मिला था। इससे सभी रजबहों व माइनरों की टेल तक सफाई करा दी गई थी। बजट कम पड़ने पर कुछ जगह सफाई नहीं हो सकी थी। किसी भी जगह रजबहे या माइनर का अस्तित्व समाप्त होने की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो जांच कराएंगे। यदि कहीं पर इस तरह की स्थिति मिलती है तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - अखिलेश गौतम, अधीक्षण अभियंता, शारदा नहर
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हकीकत में कई ऐसे माइनर और रजबहे हैं, जिनकी टेल तक दशकों से सफाई नहीं हुई है। ऐसे में कई किलोमीटर तक इनका अस्तित्व ही खत्म हो गया है।
वहीं, कुछ जगहों पर आसपास के किसानों ने रजबहे और माइनर की जमीन को अपने खेतों में मिला लिया है। ऐसे में नहरों से सिंचित करीब 40 फीसदी खेती प्यासी ही रह जाती है।
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हरदोई खंड शारदा नहर के अंतर्गत आंकड़ों में करीब 85 माइनर, रजबहा व नाला निकले हैं। इनकी दूरी करीब 751 किलोमीटर है। इस नहर से सदर तहसील, बिलग्राम और शाहाबाद तहसील के अंतर्गत आने वाले गांवों के एक लाख 24 हजार किसानों को मुफ्त सिंचाई योजना का लाभ दिए जाने का दावा किया जा रहा है।
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इसके पीछे सरकार की तरफ से हर वर्ष विभाग को माइनर व रजबहों की सफाई कराने के लिए मिलने वाला करोड़ों का बजट है। विभागीय अफसरों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 में तकरीबन तीन करोड़ 12 लाख रुपये रजबहों और माइनर की सफाई के लिए मिले थे।
इस धनराशि से चंद माइनरों व रजबहों की सफाई करा दी गई। इसी तरह पहले के वित्तीय वर्षों में बजट मिलते ही सभी माइनर व रजबहों की सफाई कराई जाती रही है।
अफसरों के दावों की पोल पिहानी और टड़ियावां ब्लॉक से निकले कुछ रजबहे खोल रहे हैं। इन रजबहों की अंतिम छोर तक दशकों से सफाई नहीं कराई गई है। ऐसे में कई किलोमीटर तक इनका अस्तित्व ही खत्म हो गया है। ऐसे ही हालात अधिकतर ब्लॉकों से निकले रजबहों और माइनरों के हैं।
बोले किसान
टडियावां ब्लॉक के अजीजपुर निवासी किसान राजेंद्र कुमार, बच्चन तिवारी, नोखेलाल, सरैंया निवासी कुछ किसानों ने बताया कि उनके यहां माइनर की दशकों से सफाई नहीं हुई। इसके चलते यहां पर रजबहा का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है।
वर्जन
पिछले वित्तीय वर्ष में माइनर व रजबहों की सफाई के लिए बजट नहीं मिला था। उसके पहले करीब तीन करोड़ का बजट मिला था। इससे सभी रजबहों व माइनरों की टेल तक सफाई करा दी गई थी। बजट कम पड़ने पर कुछ जगह सफाई नहीं हो सकी थी। किसी भी जगह रजबहे या माइनर का अस्तित्व समाप्त होने की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो जांच कराएंगे। यदि कहीं पर इस तरह की स्थिति मिलती है तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - अखिलेश गौतम, अधीक्षण अभियंता, शारदा नहर