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कूड़े की बीमारी, मनमाजी का मर्ज

Sun, 06 Mar 2022 11:26 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2022 11:26 PM IST
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Garbage disease, arbitrariness
हरदोई। शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर पिछले कई वर्षों में करोड़ों रुपये की धनराशि व्यय हो चुकी है।
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इसके बाद भी कूड़े कचरे की बीमारी से जूझते शहर का यह मर्ज दूर नहीं हो पा रहा है। शहर को साफ और स्वच्छ रखने के लिए न तो शहर के लोग जागरूक हो रहे हैं और न ही नगर पालिका का सिस्टम दुरुस्त हो पा रहा है।
इससे आंकड़ों में शहर साफ और स्वच्छ है, तो हकीकत कुछ और ही है।
शहर में 26 वार्ड और लगभग 27 हजार मकानों के बीच लगभग सवा लाख की आबादी वाले शहर में पिछले कुछ वर्षों में नालों की साफ-सफाई से लेकर कूड़ाघर, कूड़ादान आदि पर 10 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की गई।
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इसके अलावा ड्रेनेज निर्माण पर भी पांच करोड़ रुपये से अधिक नगर पालिका ने खर्च की हैं। इसके बाद भी बारिश के दिनों में कई जगह घरों में पानी भर जाता है।
इतना ही नहीं नगर पालिका द्वारा हर साल 50 लाख रुपये से अधिक का खर्च शहर की नालों की सफाई पर किया जाता है। कूड़ा कचरा उठाने के लिए करोड़ों रुपये के जेसीबी एवं लोडर खरीदे गए, जिन पर हर साल लाखों रुपये डीजल का खर्च होता है।
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इसके बाद भी शहर के किसी भी इलाके में निकल जाइए, न तो समय से कूड़ा कचरा उठता है न ही कूड़ा कचरा निस्तारण के लिए प्लांट लगा है। ऐसे में कई स्थानों पर खुले में कूड़ा डाल दिया जाता है।
इससे जहां बीमारियों के फैलने का अंदेशा बना हुआ है, वहीं उठने वाली दुर्गंध से लोगों का जीना दूभर है।
नालों को पाट कर बना लिया ठिकाना
शहर के एक प्रमुख मार्ग पर बड़े नाले को पाटकर दो व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बीच रास्ता बना लिया गया है, जिससे इस नाले की सफाई नहीं हो पाती और ड्रेनेज व्यवस्था चोक हो जाती है।
इसकी शिकायत भी हो चुकी है, लेकिन नगर पालिका का सिस्टम इस ओर लाचार नजर आता है। अभी तक पालिका के अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
शहर के एक मोहल्ले में नालों को पाटकर लोगों ने अपनी दुकानें तक बना लीं और कुछ लोगों ने अस्थायी बैठक के ठिकाने बना लिए। इसके बाद भी इसको लेकर नगर पालिका के जिम्मेदार पूरी तरह से बेखबर बने हुए हैं।
शहर के अधिकांश नालों के ऊपर पत्थर डालकर ढका नहीं गया है। इसके अलावा नालों में पॉलिथीन को रोकने के लिए चेेंबरों पर जाली नहीं लगाई गई है। इससे सड़कों पर आने वाला कूड़ा नालों में जाकर चोक कर देता है।
शहर के घंटाघर रोड और बावन चुंगी आदि स्थानों पर बनाए गए सीमेंटेड कूड़ाघरों की चहारदीवारी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे कूड़ा करकट फैलकर सड़कों तक आ जाता है, जिससे लोगों को काफी दुर्गंध का सामना करना पड़ता है।
शहर के घरों के बाहर छोटे-छोटे प्लास्टिक के डस्टबीन लगाने के नाम पर खरीद तो हुई, लेकिन अधिकांश मोहल्लों तक यह डस्टबीन कागजों पर सीमित रह गए हैं। इससे घरों का कूड़ा सड़क पर फेंका जाता है।
अफसरों की बेपरवाही की हद
बेपरवाही की भी हद होती है। जी हां, कूड़ा कचरा को लेकर शहर के अधिकांश लोग इस ओर इस कदर बेपरवाही करते हैं कि शहर की साफ स्वच्छ तस्वीर की तकदीर की लकीर ही बिगड़ती जा रही है।
घरों के बाहर कूड़ा डालने के लिए ज्यादातर लोग नियम नहीं मान रहे हैं।
नियमानुसार घरों के बाहर कूड़ा डस्टबीन में डालने के लिए सड़कों एवं गलियों में झाडू़ लगने से पहले सुबह छह बजे से डाल देना चाहिए, ताकि समय से उठ जाए, लेकिन लोग इस नियम को नजर अंदाज कर रहे हैं। अधिकांश दुकानदार भी इसका पालन नहीं कर रहे हैं।

सुधरेगी व्यवस्था, होगी कार्रवाई
शहर में प्रतिदिन करीब चालीस टन कूड़ा निकलता है। कूड़ा निस्तारण के लिए इटौली के पास प्लांट लगने जा रहा है। निर्माण कार्य चल रहा है। इससे अभी कुछ स्थानों पर लगे रहने वाले कूड़े के ढेरों से निजात मिलेगी।
नालों की सफाई का कार्य अगले वित्तीय वर्ष में होगा। जहां कहीं अतिक्रमण है उसे हटाया जाएगा। जो लोग खुले में कूड़ा फेकेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- रविशंकर, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
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