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Hardoi News: सत्यापन में खेल...प्राइवेट ऑपरेटर पूछता था ओटीपी, लेखपाल बता देते थे

Tue, 20 Jan 2026 12:07 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 12:07 AM IST
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Game in verification...Private operator used to ask for OTP, Lekhpal used to tell
- लालच और कंप्यूटर ऑपरेटर पर भरोसे ने लिखी धान खरीद में गड़बड़ी की इबारत
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- 11 गांवों के 1380 फर्जी किसानों से खरीद लिया गया 150061 क्विंटल धान
संवाद न्यूज एजेंसीहरदोई। लालच और प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर पर भरोसे ने धान खरीद में गड़बड़ी की इबारत लिख दी। संडीला तहसील में तैनात एक प्राइवेट ऑपरेटर लेखपालों से ओटीपी पूछता रहा। लेखपाल ओटीपी बताते रहे और मौके पर गए बिना ही सत्यापन होता चला गया। लेखपालों का आलम यह था कि जो गांव चकबंदी प्रक्रिया में थे ही नहीं, वहां के भी सत्यापन लेखपालों ने करने में हामी भर दी।
धान खरीद में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शासन ने कई नियम बनाए हैं। सरकारी केंद्रों पर धान बेचने के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है। इस पंजीकरण में गाटा संख्या का उल्लेख भी करना होता है। सत्यापन लेखपाल करते हैं। जो गांव चकबंदी में हैं, उनका सत्यापन चकबंदी के लेखपाल करते हैं। बाकी सत्यापन राजस्व विभाग के लेखपाल करते हैं।
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ऑनलाइन पंजीकरण में जब लेखपाल सत्यापन कर देते हैं तब इसको इनके उच्चाधिकारी सत्यापित करते हैं। राजस्व लेखपालों का सत्यापन एसडीएम करते हैं, जबकि चकबंदी लेखपालों का सत्यापन चकबंदी अधिकारी करते हैं। कुल 11 गांवों में जमीन दिखाकर फर्जी किसानों का सत्यापन कराया गया। इनमें से एक भी सत्यापन करने के लिए संबंधित लेखपाल गए ही नहीं।
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इसकी पुष्टि जांच में भी हो चुकी है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि जाजूपुर और मलेहरा में चकबंदी का कार्य खत्म हो चुका है। दोनों गांवों में चकबंदी का प्रकाशन भी हो गया है। इसके बाद भी दोनों गांवों में चकबंदी लेखपाल सत्यापन करते रहे। संडीला तहसील में तैनात प्राइवेट ऑपरेटर नीरज कुमार सत्यापन का काम करता था। सत्यापन के दौरान ओटीपी संबंधित लेखपाल के मोबाइल पर जाता था। इसके फौरन बाद नीरज संबंधित लेखपाल को कॉल कर ओटीपी पूछता था। इसके बाद सत्यापन कर देता था।

इनसेट
एक किसान के सत्यापन पर ले लिए जाते 1600 रुपये तक
किसानों का फर्जी सत्यापन यूं ही नहीं हो जाता। एक किसान का फर्जी सत्यापन करने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर संबंधित किसान तक पर 1600 रुपये खर्च होते हैं। किसानों को राजी करने, उनके अभिलेख लेने से लेकर सत्यापन कराने तक की जिम्मेदारी बिचौलिए उठाते हैं। बिचौलियों को इन किसानों के नाम पर धान बेचने के बाद खासा मुनाफा होता है।

इनसेट
सत्यापित अभिलेख लेकर आते थे, इसलिए हो जाती थी खरीद
धान खरीद में सबसे बड़ी गड़बड़ी सत्यापन में ही हुई। दरअसल नियम यह है कि धान क्रय केंद्र पर आने वाले लोगों से केंद्र प्रभारी सत्यापित अभिलेख देखते हैं। इसकी ऑनलाइन पावती भी धान बेचने वाले के पास होती है। क्रय केंद्र प्रभारी सत्यापन के अभिलेख देखकर धान की खरीद कर लेते हैं। यही वजह रही कि सत्यापित अभिलेख लेकर आने वाले लोगों से धान की खरीद होती रही। क्रय केंद्र प्रभारियों के पास ऐसी कोई व्यस्था है भी नहीं कि वह खेत और किसान या बटाईदार का सत्यापन कर पाएं।


इनसेट
कहां कितने फर्जी किसानों से हुई खरीद
. टिकारी के 298 फर्जी किसानों से 29,185 क्विंटल धान की खरीद हुई
. राभा के 48 फर्जी किसानों से 5327 क्विंटल धान खरीदा गया
. भटपुर के पांच फर्जी किसानों से 572 क्विंटल धान की खरीद हुई
. मलेहरा के 175 फर्जी किसानों से 21,418 क्विंटल धान की खरीद हुई
. जाजूपुर के 137 फर्जी किसानों से 12,868 क्विंटल धान की खरीद हुई। महमूदपुर सरैंया के 100 फर्जी किसानों से 9751 क्विंटल धान की खरीद हुई। वाजिदनगर के 207 फर्जी किसानों से 34473 क्विंटल धान की खरीद हुई। अंदा इब्राहिमपुर के 36 फर्जी किसानों से 5806 क्विंटल धान की खरीद हुई। दत्योनापुर के 6 फर्जी किसानों से 512 क्विंटल धान की खरीद हुई। रसूलपुर आंट के 179 फर्जी किसानों से 12798 क्विंटल धान की खरीद हुई। भीखपुर ऐमा के 189 फर्जी किसानों से 17351 क्विंटल धान की खरीद हुई
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