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Hardoi News: आठ साल से गंज जलालाबाद पीएचसी में हीमोग्लोबिन की जांच तक का इंतजाम नहीं
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फोटो-30-गंजजलालाबाद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
मल्लावां। पांच करोड़ की लागत से आठ साल पहले गंज जलालाबाद में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हीमोग्लोबिन तक की जांच नहीं हो पाती है। ऐसे में गंज जलालाबाद और इसके आसपास के गांवों की लगभग 20 हजार की आबादी को मल्लावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दौड़ लगानी पड़ती है। पीएचसी में पैथोलॉजी का कक्ष बना है लेकिन लैब टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। तैनाती होती भी तो यहां जांच के कोई उपकरण नहीं हैं। ग्रामीण इलाकों के लोगों को मामूली समस्याएं होने पर नगर और जिला मुख्यालय तक की दौड़ से बचाने की कवायद में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए थे।
इसी क्रम में गंज जलालाबाद में भी पांच करोड़ रुपये की लागत से चार बेड का पीएचसी बनवाया गया था। गंज जलालाबाद ही नहीं, सराय सुल्तान, परमी, फुलई, नेवादा, अटवारा, खेतरहा समेत कई गांवों के 20 हजार लोग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी स्वास्थ्य केंद्र पर आश्रित हैं। खास बात यह है कि आठ साल बाद भी यहां गंभीर जांचें छोड़िए हीमोग्लोबिन और सामान्य बुखार की जांच भी नहीं हो पाती है। यह जांचें कराने के लिए 14 किलोमीटर दूर सीएचसी मल्लावां जाना पड़ता है। दूसरा विकल्प प्राइवेट पैथोलॉजी है, जहां जांच के लिए फीस भी देनी पड़ती है।
प्रसव कक्ष बना, तैनाती आया तक की नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कक्ष बना है। पीएचसी पर अमूमन प्रसव की व्यवस्था रहती है। इसके उलट यहां न तो किसी आया की तैनाती है और न ही दाई की। एएनएम तो खैर यहां कोई तैनात ही नहीं है। ऐसे में प्रसव पीड़ा होने पर महिलाओं को मल्लावां सीएचसी या फिर उन्नाव जनपद के गंज मुरादाबाद की सीएचसी जाना पड़ता है।
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डॉक्टर आए नहीं, फोन भी रिसीव नहीं हुआ
पीएचसी में डॉ. अजय सोनी की तैनाती है। फार्मासिस्ट पवन शर्मा, वार्ड बॉय अभिषेक और स्वीपर अनुराग भी यहां तैनात हैं। डॉ. अजय सोनी मौजूद नहीं मिले। उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो पता चला कि वह फोन इस्तेमाल नहीं करते। इसके बाद किसी तरह उनका एक नंबर मिला लेकिन इस नंबर पर कॉल जाती रही और फोन रिसीव नहीं हुआ।
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इसी क्रम में गंज जलालाबाद में भी पांच करोड़ रुपये की लागत से चार बेड का पीएचसी बनवाया गया था। गंज जलालाबाद ही नहीं, सराय सुल्तान, परमी, फुलई, नेवादा, अटवारा, खेतरहा समेत कई गांवों के 20 हजार लोग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी स्वास्थ्य केंद्र पर आश्रित हैं। खास बात यह है कि आठ साल बाद भी यहां गंभीर जांचें छोड़िए हीमोग्लोबिन और सामान्य बुखार की जांच भी नहीं हो पाती है। यह जांचें कराने के लिए 14 किलोमीटर दूर सीएचसी मल्लावां जाना पड़ता है। दूसरा विकल्प प्राइवेट पैथोलॉजी है, जहां जांच के लिए फीस भी देनी पड़ती है।
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प्रसव कक्ष बना, तैनाती आया तक की नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कक्ष बना है। पीएचसी पर अमूमन प्रसव की व्यवस्था रहती है। इसके उलट यहां न तो किसी आया की तैनाती है और न ही दाई की। एएनएम तो खैर यहां कोई तैनात ही नहीं है। ऐसे में प्रसव पीड़ा होने पर महिलाओं को मल्लावां सीएचसी या फिर उन्नाव जनपद के गंज मुरादाबाद की सीएचसी जाना पड़ता है।
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डॉक्टर आए नहीं, फोन भी रिसीव नहीं हुआ
पीएचसी में डॉ. अजय सोनी की तैनाती है। फार्मासिस्ट पवन शर्मा, वार्ड बॉय अभिषेक और स्वीपर अनुराग भी यहां तैनात हैं। डॉ. अजय सोनी मौजूद नहीं मिले। उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो पता चला कि वह फोन इस्तेमाल नहीं करते। इसके बाद किसी तरह उनका एक नंबर मिला लेकिन इस नंबर पर कॉल जाती रही और फोन रिसीव नहीं हुआ।

फोटो-30-गंजजलालाबाद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद

फोटो-30-गंजजलालाबाद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद