{"_id":"c02d221e14042069f1201a29098dde13","slug":"flowers-of-love-mnderaange-beetle-spring-start-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुष्पों पर मंडराएंगे भंवरे प्यार से, वसंतोत्सव शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुष्पों पर मंडराएंगे भंवरे प्यार से, वसंतोत्सव शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sat, 24 Jan 2015 12:38 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय संस्कृति के मुताबिक प्रेम रस में पगे त्योहार
विज्ञापन
वसंतोत्सव की शुरुआत शनिवार से हो रही है। कहना गलत न होगा कि इसी दिन से
ऋतु करवट करवट लेती नजर आएगी। मधुुमास की मादकता मौसम में छाएगी। जानकारों
की माने तो भंवरों के अब पुष्पों पर मंडराने का वक्त आ गया है।
हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। मां सरस्वती के इस प्राकट्य पर्व को सर्व सिद्धिदायक पर्व माना जाता है। वसंत पंचमी 24 जनवरी को है। माघ माह में जब सूर्य देवता उत्तरायण रहते हैं, ऐसे में गुप्त नवरात्रि के मध्य पंचमी तिथि को लोक प्रसिद्ध स्वयं सिद्ध मुहूर्त के रूप में माना जाता है।
बुजुर्गाें की मानें तो इस दिन यानी वसंतोत्सव से कामदेव तरकश से बाण निकाल मानव के दिलो दिमाग को बेधने लगते हैं, इसलिए वसंत पंचमी को रति एवं कामदेव की उपासना का पर्व भी कहा जाता है। ऋतुओं का तो यौवन काल होता ही है तो पुष्पों की बहार होती है।
हिंदू शास्त्रों में 24 फरवरी से वसंत शुरू हो जाएगी। वसंत उत्सव को भी हिंदू संस्कृति में प्रेम के रूप में ही मनाया जाता है। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार यह दिन हर शुभ कार्यों के लिए अतिश्रेष्ठ माना जाता है।
प्रकृति के चित्र, साहित्य मनीषियों और कवियों ने इस दिन को अपने अपने तरीके से परिभाषित किया है। यह विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा अर्चना का दिन है। इस तिथि को वागीश्वरी जयंती व श्रीपंचमी नाम से भी जाना जाता है। वसंत ऋतु में पंचमी का उत्सव मां सरस्वती के जन्मदिन के रूप में संपूर्ण भारत में मनाया जाता है।
यह पर्व सभी के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन शुभ्रवसना, वीणावादिनी, मंद मंद मुस्कुराती, हंस पर विराजमान होकर मां सरस्वती मानव जीवन के अज्ञान को दूर कर ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करती है। इस दिन वीणा वादिनी का यदि पूर्ण विधान से पूजन किया जाए तो जातक को उतना ही फल मिलता है।
शास्त्री का कहना है कि वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का ऊं शारदा माता ईश्वरी मै नित सुमरि तोय हाथ जोड़ अरजी करूं विद्या वर दे मोय....। का जाप कर सकते हैं।
हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। मां सरस्वती के इस प्राकट्य पर्व को सर्व सिद्धिदायक पर्व माना जाता है। वसंत पंचमी 24 जनवरी को है। माघ माह में जब सूर्य देवता उत्तरायण रहते हैं, ऐसे में गुप्त नवरात्रि के मध्य पंचमी तिथि को लोक प्रसिद्ध स्वयं सिद्ध मुहूर्त के रूप में माना जाता है।
बुजुर्गाें की मानें तो इस दिन यानी वसंतोत्सव से कामदेव तरकश से बाण निकाल मानव के दिलो दिमाग को बेधने लगते हैं, इसलिए वसंत पंचमी को रति एवं कामदेव की उपासना का पर्व भी कहा जाता है। ऋतुओं का तो यौवन काल होता ही है तो पुष्पों की बहार होती है।
हिंदू शास्त्रों में 24 फरवरी से वसंत शुरू हो जाएगी। वसंत उत्सव को भी हिंदू संस्कृति में प्रेम के रूप में ही मनाया जाता है। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार यह दिन हर शुभ कार्यों के लिए अतिश्रेष्ठ माना जाता है।
प्रकृति के चित्र, साहित्य मनीषियों और कवियों ने इस दिन को अपने अपने तरीके से परिभाषित किया है। यह विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा अर्चना का दिन है। इस तिथि को वागीश्वरी जयंती व श्रीपंचमी नाम से भी जाना जाता है। वसंत ऋतु में पंचमी का उत्सव मां सरस्वती के जन्मदिन के रूप में संपूर्ण भारत में मनाया जाता है।
यह पर्व सभी के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन शुभ्रवसना, वीणावादिनी, मंद मंद मुस्कुराती, हंस पर विराजमान होकर मां सरस्वती मानव जीवन के अज्ञान को दूर कर ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करती है। इस दिन वीणा वादिनी का यदि पूर्ण विधान से पूजन किया जाए तो जातक को उतना ही फल मिलता है।
शास्त्री का कहना है कि वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का ऊं शारदा माता ईश्वरी मै नित सुमरि तोय हाथ जोड़ अरजी करूं विद्या वर दे मोय....। का जाप कर सकते हैं।