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Hardoi News: धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के आरोप में तीन बैंक अफसरों पर रिपोर्ट दर्ज
Fri, 08 Aug 2025 10:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Fri, 08 Aug 2025 10:41 PM IST
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हरदोई। न्यायालय के आदेश पर बैंक ऑफ बड़ौदा की शाहाबाद शाखा के दो प्रबंधकों और एक उपप्रबंधक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। तीनों पर फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी करने का आरोप है।
शाहाबाद के अल्हापुर निवासी कफीलयार खां ने बताया कि उसका खाता बैंक ऑफ बड़ौदा की शाहाबाद शाखा में है। आरोप है कि वर्ष 2011 में शाखा प्रबंधक मनुरंजन गोगोई ने उससे लोन कराने के लिए कहा। कफीलयार ने कहा कि लोन लेने के लिए उसके पास न तो संपत्ति है और न ही कोई अन्य सामग्री। दावा है कि इस पर शाखा प्रबंधक ने कहा कि किसी वस्तु को बंधक बनाकर लोन दे देंगे।
इस पर कफीलयार ने 10 लाख रुपये का लोन करा लिया और अपना कारोबार करता रहा। कुछ समय बाद शाखा प्रबंधक ने एक लाख रुपये की एफडी खोल दी। इसके बाद कफीलयार को व्यापार में घाटा हुआ तो वह लोन की किस्त जमा नहीं कर पाया। इसके कारण उसका खाता एनपीए हो गया। शाखा प्रबंधक ने उसे बुलाया और लोन की धनराशि में समझौता करने की बात कही। इस दौरान प्रबंधक ने एनपीए खाते में डेढ़ लाख रुपये जमा किए। बाद में चार लाख छह हजार रुपये जमा कर समझौता करा दिया।
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समझौता पत्र भी कफीलयार को दे दिया। कुछ समय पहले कफीलयार को पता चला कि एक लाख रुपये की जो एफडी कराई गई थी वह फर्जी है। इसकी जांच करने पर पता चला कि लोन खाता अब भी चल रहा है। कुछ समय बाद बैंक से नोटिस आने लगे। नोटिस आने पर कफीलयार जब समझौता पत्र और एफडी लेकर बैंक गया तो उसे बताया गया कि यह सब फर्जी है।
इस पूरे मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व शाखा प्रबंधक वरुण गोयल और उप शाखा प्रबंधक हेमंत मल्होत्रा पर भी फर्जीवाड़े में शामिल होने का आरोप लगाया। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो उसने न्यायालय की शरण ली। शाहाबाद कोतवाल उमेश त्रिपाठी ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर मामले की रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना के दौरान स्थिति स्पष्ट होगी।
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शाहाबाद के अल्हापुर निवासी कफीलयार खां ने बताया कि उसका खाता बैंक ऑफ बड़ौदा की शाहाबाद शाखा में है। आरोप है कि वर्ष 2011 में शाखा प्रबंधक मनुरंजन गोगोई ने उससे लोन कराने के लिए कहा। कफीलयार ने कहा कि लोन लेने के लिए उसके पास न तो संपत्ति है और न ही कोई अन्य सामग्री। दावा है कि इस पर शाखा प्रबंधक ने कहा कि किसी वस्तु को बंधक बनाकर लोन दे देंगे।
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इस पर कफीलयार ने 10 लाख रुपये का लोन करा लिया और अपना कारोबार करता रहा। कुछ समय बाद शाखा प्रबंधक ने एक लाख रुपये की एफडी खोल दी। इसके बाद कफीलयार को व्यापार में घाटा हुआ तो वह लोन की किस्त जमा नहीं कर पाया। इसके कारण उसका खाता एनपीए हो गया। शाखा प्रबंधक ने उसे बुलाया और लोन की धनराशि में समझौता करने की बात कही। इस दौरान प्रबंधक ने एनपीए खाते में डेढ़ लाख रुपये जमा किए। बाद में चार लाख छह हजार रुपये जमा कर समझौता करा दिया।
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समझौता पत्र भी कफीलयार को दे दिया। कुछ समय पहले कफीलयार को पता चला कि एक लाख रुपये की जो एफडी कराई गई थी वह फर्जी है। इसकी जांच करने पर पता चला कि लोन खाता अब भी चल रहा है। कुछ समय बाद बैंक से नोटिस आने लगे। नोटिस आने पर कफीलयार जब समझौता पत्र और एफडी लेकर बैंक गया तो उसे बताया गया कि यह सब फर्जी है।
इस पूरे मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व शाखा प्रबंधक वरुण गोयल और उप शाखा प्रबंधक हेमंत मल्होत्रा पर भी फर्जीवाड़े में शामिल होने का आरोप लगाया। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो उसने न्यायालय की शरण ली। शाहाबाद कोतवाल उमेश त्रिपाठी ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर मामले की रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना के दौरान स्थिति स्पष्ट होगी।