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Hardoi News: दो बेटियों समेत विवाहिता को जिंदा जला डालने में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास
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फोटो-29-अभियुक्त रामबाबू और हरि प्रकाश। संवाद
हरदोई। पहले दहेज के लिए और फिर दो बेटियों का जन्म होने पर विवाहिता को बेटियों के साथ जिंदा जला डालने के मामले में पिता-पुत्र (मृतका के ससुर और देवर) को दोषी करार दिया गया। अपर जिला जज (कोर्ट संख्या तीन) कुसुमलता ने अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर अभियुक्तों को दो-दो साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम मुकदमे के वादी को देने के आदेश भी अपर जिला जज ने दिए।
बघौली थाना क्षेत्र के महमदपुर निवासी रामतुरंत ने सात मार्च 2014 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उसने अपनी बहन रमाकांती की शादी अरवल थाना क्षेत्र के गोनीपुरवा निवासी रामबहादुर पाल के साथ घटना से पांच साल पहले की थी। आरोप था कि शादी के बाद से ही रामबाबू (ससुर), भिखाना (सास), हरिश्चंद्र (देवर), रीता (देवरानी), पम्मी उर्फ हरिप्रकाश (देवर) और रामबहादुर (पति) दहेज में भैंस की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर प्रताड़ित करते थे। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मांग पूरी की जा सके। बताया कि शादी के कुछ साल बाद बहन के दो पुत्री पारुल व कोमल हुई थीं।
इस कारण ससुरालीजन आए दिन परेशान करते थे। छह मार्च 2014 को रमाकांती, भांजी पारुल व कोमल को आरोपियों ने मिलकर जलाकर मार डाला था। पुलिस ने दहेज हत्या का मामला दर्ज किया था। विवेचना के बाद पुलिस ने भिखाना उर्फ वेदवती, हरिश्चंद्र, रीता व रामबहादुर का नाम आरोप पत्र से निकाल दिया था। रामबाबू उर्फ बाबूराम (ससुर) व पम्मी उर्फ हरि प्रकाश (देवर) के खिलाफ दहेज हत्या की धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों को पेश किया गया। इसके साथ ही 27 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने दोनों को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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बघौली थाना क्षेत्र के महमदपुर निवासी रामतुरंत ने सात मार्च 2014 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उसने अपनी बहन रमाकांती की शादी अरवल थाना क्षेत्र के गोनीपुरवा निवासी रामबहादुर पाल के साथ घटना से पांच साल पहले की थी। आरोप था कि शादी के बाद से ही रामबाबू (ससुर), भिखाना (सास), हरिश्चंद्र (देवर), रीता (देवरानी), पम्मी उर्फ हरिप्रकाश (देवर) और रामबहादुर (पति) दहेज में भैंस की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर प्रताड़ित करते थे। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मांग पूरी की जा सके। बताया कि शादी के कुछ साल बाद बहन के दो पुत्री पारुल व कोमल हुई थीं।
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इस कारण ससुरालीजन आए दिन परेशान करते थे। छह मार्च 2014 को रमाकांती, भांजी पारुल व कोमल को आरोपियों ने मिलकर जलाकर मार डाला था। पुलिस ने दहेज हत्या का मामला दर्ज किया था। विवेचना के बाद पुलिस ने भिखाना उर्फ वेदवती, हरिश्चंद्र, रीता व रामबहादुर का नाम आरोप पत्र से निकाल दिया था। रामबाबू उर्फ बाबूराम (ससुर) व पम्मी उर्फ हरि प्रकाश (देवर) के खिलाफ दहेज हत्या की धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों को पेश किया गया। इसके साथ ही 27 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने दोनों को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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