{"_id":"69ebb1bdae1c82825b07a495","slug":"farmers-should-exercise-caution-amid-rising-temperatures-risk-of-cyanide-poisoning-in-green-fodder-hardoi-news-c-213-1-hra1001-148622-2026-04-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: बढ़ती गर्मी में किसान बरतें सावधानी, हरे चारा में साइनाइड जहर की आशंका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: बढ़ती गर्मी में किसान बरतें सावधानी, हरे चारा में साइनाइड जहर की आशंका
विज्ञापन
किसान बरतें सावधानी, बढ़ते तापमान से हरे चारे में सायनाइड जहर की आशंका
सिंचाई के अभाव में मार्च-अप्रैल में बोई गई चरी हो जाती है जहरीली
संवाद न्यूज़ एजेंसी
हरदोई। अप्रैल माह में ही तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पार हो गया है। गर्मियों में मवेशियों के लिए हरे चारे की व्यवस्था जुटाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। मार्च और अप्रैल माह में बोई गई चरी पानी-सिंचाई के अभाव में जहरीली भी हो जाती है। पशुपालक ने यदि सावधानी नहीं बरती गई तो, यह मवेशियों के जानलेवा तक साबित होती है।
वैशाख माह में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान होने आमजन के साथ ही मवेशी, पशु-पक्षी सभी बेहाल हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने पशुपालकों को हरा चारा दिए की सलाह दी है। बताया कि मार्च और अप्रैल माह में बोई गई चरी मवेशियों को खिलाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बताया कि सिंचाई के अभाव में हरे चारे की पत्तियों में विषैला पदार्थ पनप जाता है।
बताया कि ज्वार में प्रूसिक एसिड नामक विषैला पदार्थ पाया जाता है। ऐसे में छोटी अवस्था में ज्वार को मवेशियों को नहीं खिलाना चाहिए। चरी में सायनाइड नामक जहर पनप जाता है। इसे खिलाने से मवेशियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता और कई बार तो मवेशी की जान तक चली जाती है।
विज्ञापन
पशुपालकों को चरी और हरे चारे वाले खेतों की नियमित सिंचाई करनी चाहिए और खेतों में नमी बनाए रखनी चाहिए। इससे तेज धूप के कारण पनपने वाला विषैलापन जड़ों के माध्यम से जमीन में उतर जाता है। मवेशी में बुखार और हांफने जैसे लक्षण दिखने में फोटोग्राफर की दुकान पर मिलने वाले 100 ग्राम हाइपो को पानी में घोल बनाकर पीड़ित मवेशी को दिए जाने से जल्द स्वास्थ्य लाभ मिलने लगता है।
विज्ञापन
सिंचाई के अभाव में मार्च-अप्रैल में बोई गई चरी हो जाती है जहरीली
संवाद न्यूज़ एजेंसी
हरदोई। अप्रैल माह में ही तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पार हो गया है। गर्मियों में मवेशियों के लिए हरे चारे की व्यवस्था जुटाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। मार्च और अप्रैल माह में बोई गई चरी पानी-सिंचाई के अभाव में जहरीली भी हो जाती है। पशुपालक ने यदि सावधानी नहीं बरती गई तो, यह मवेशियों के जानलेवा तक साबित होती है।
वैशाख माह में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान होने आमजन के साथ ही मवेशी, पशु-पक्षी सभी बेहाल हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने पशुपालकों को हरा चारा दिए की सलाह दी है। बताया कि मार्च और अप्रैल माह में बोई गई चरी मवेशियों को खिलाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बताया कि सिंचाई के अभाव में हरे चारे की पत्तियों में विषैला पदार्थ पनप जाता है।
विज्ञापन
बताया कि ज्वार में प्रूसिक एसिड नामक विषैला पदार्थ पाया जाता है। ऐसे में छोटी अवस्था में ज्वार को मवेशियों को नहीं खिलाना चाहिए। चरी में सायनाइड नामक जहर पनप जाता है। इसे खिलाने से मवेशियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता और कई बार तो मवेशी की जान तक चली जाती है।
विज्ञापन
पशुपालकों को चरी और हरे चारे वाले खेतों की नियमित सिंचाई करनी चाहिए और खेतों में नमी बनाए रखनी चाहिए। इससे तेज धूप के कारण पनपने वाला विषैलापन जड़ों के माध्यम से जमीन में उतर जाता है। मवेशी में बुखार और हांफने जैसे लक्षण दिखने में फोटोग्राफर की दुकान पर मिलने वाले 100 ग्राम हाइपो को पानी में घोल बनाकर पीड़ित मवेशी को दिए जाने से जल्द स्वास्थ्य लाभ मिलने लगता है।