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Hardoi News: दवाओं की कमी नहीं पूरी, दर्द भी बाहर से खरीद रहे मरीज
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फोटो-03- दवा काउंटर पर लगी मरीजों की लगी कतार। संवाद
हरदोई। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे लगातार किए जा रहे हैं लेकिन जनपद के स्वास्थ्य विभाग की हकीकत कुछ और है। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने आने वाले मरीजों को सभी जरूरी दवाएं अभी भी नहीं मिल रही हैं। हर पर्चे पर लिखी दो से तीन दवाएं मरीजों को मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी जेब ढीली करना पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर रोज 2000 से 2500 मरीज अलग-अलग चिकित्सकों से इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इनमें हड्डी रोग, सर्दी, खांसी, बुखार, पेट दर्द से पीड़ित मरीज परामर्श लेने आ रहे हैं। इसके अलावा जनरल फिजिशियन, चेस्ट फिजिशियन, बाल रोग और ईएनटी विभाग की ओपीडी में भी मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। मरीज चिकित्सीय परामर्श के बाद अब फार्मेसी में दवा लेने पहुंचते हैं तो अधिकांश को आधी-अधूरी दवाएं ही मिल पा रही हैं।
केस-1- महोलिया शिवपार निवासी छविनाथ ने बताया कि पेट में दर्द होने पर चिकित्सीय परामर्श लिया। पर्चे पर पांच दवाएं लिखी गईं इनमें से तीन दवाएं तो मिलीं लेकिन दो दवाएं काउंटर पर नहीं थीं। कर्मचारियों ने न मिलने वाली दवाओं पर गोला बनाकर पर्चा वापस कर दिया।
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केस-2- बघौली ब्लॉक के हथौड़ा के चेतरपुरवा गांव निवासी कैलाश ने बताया कि गले में दर्द होने पर डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने चार दवाएं लिखीं लेकिन काउंटर पर सिर्फ एक ही दवा मिली। तीन दवाएं बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ीं।
दर्द का ट्यूब तो अब मिलता ही नहीं
मेडिकल कॉलेज की फार्मेसी की हालत यह है कि दर्द का डाइक्लोफेनिक जेल या फिर डाइक्लोप्लस ट्यूब की अनुपलब्धता बीते काफी समय से बनी हुई है। हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को गोलियां तो मिल जाती हैं लेकिन जेल ट्यूब नहीं मिल रहा है। ऐसे में मरीज और तीमारदार प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की उपलब्धता को लेकर लगातार मांग बनाई जा रही है। मांग करते ही दो से तीन दिन में दवा आ जाती है। रोजाना मरीज भी काफी संख्या में आते हैं, ऐसे में कुछ दवाएं कम हो सकती हैं। प्रयास किया जाएगा कि दवाएं समाप्त होने से पहले मंगवा ली जाएं।
-डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर रोज 2000 से 2500 मरीज अलग-अलग चिकित्सकों से इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इनमें हड्डी रोग, सर्दी, खांसी, बुखार, पेट दर्द से पीड़ित मरीज परामर्श लेने आ रहे हैं। इसके अलावा जनरल फिजिशियन, चेस्ट फिजिशियन, बाल रोग और ईएनटी विभाग की ओपीडी में भी मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। मरीज चिकित्सीय परामर्श के बाद अब फार्मेसी में दवा लेने पहुंचते हैं तो अधिकांश को आधी-अधूरी दवाएं ही मिल पा रही हैं।
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केस-1- महोलिया शिवपार निवासी छविनाथ ने बताया कि पेट में दर्द होने पर चिकित्सीय परामर्श लिया। पर्चे पर पांच दवाएं लिखी गईं इनमें से तीन दवाएं तो मिलीं लेकिन दो दवाएं काउंटर पर नहीं थीं। कर्मचारियों ने न मिलने वाली दवाओं पर गोला बनाकर पर्चा वापस कर दिया।
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केस-2- बघौली ब्लॉक के हथौड़ा के चेतरपुरवा गांव निवासी कैलाश ने बताया कि गले में दर्द होने पर डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने चार दवाएं लिखीं लेकिन काउंटर पर सिर्फ एक ही दवा मिली। तीन दवाएं बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ीं।
दर्द का ट्यूब तो अब मिलता ही नहीं
मेडिकल कॉलेज की फार्मेसी की हालत यह है कि दर्द का डाइक्लोफेनिक जेल या फिर डाइक्लोप्लस ट्यूब की अनुपलब्धता बीते काफी समय से बनी हुई है। हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को गोलियां तो मिल जाती हैं लेकिन जेल ट्यूब नहीं मिल रहा है। ऐसे में मरीज और तीमारदार प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की उपलब्धता को लेकर लगातार मांग बनाई जा रही है। मांग करते ही दो से तीन दिन में दवा आ जाती है। रोजाना मरीज भी काफी संख्या में आते हैं, ऐसे में कुछ दवाएं कम हो सकती हैं। प्रयास किया जाएगा कि दवाएं समाप्त होने से पहले मंगवा ली जाएं।
-डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज

फोटो-03- दवा काउंटर पर लगी मरीजों की लगी कतार। संवाद

फोटो-03- दवा काउंटर पर लगी मरीजों की लगी कतार। संवाद