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Hardoi News: लाल-नीली बत्ती लगे वाहन से आए डीपीओ, चर्चा का विषय बने
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हरदोई। वीआईपी कल्चर खत्म होता नहीं दिख रहा है। जिला स्तरीय अधिकारी वीआईपी कल्चर से नहीं उबर पा रहे हैं। शनिवार को जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) मनोज कुमार राव लाल-नीली बत्ती लगे निजी वाहन से विकास भवन आए। चर्चा का विषय बना रहा।
विकास भवन में लखनऊ के पंजीकरण नंबर के लाल-नीली बत्ती लगे वाहन को देखकर पहले तो अधिकारियों-कर्मचारियों और लोगों ने समझा कि किसी विभाग के मंडलीय या शासन स्तर के अधिकारी निरीक्षण में आए होंगे। बाद में पता चला कि लाल-नीली बत्ती लगा वाहन डीपीओ का निजी वाहन है। लाल-नीली बत्ती लगी होने से लोगों में वीआईपी कल्चर को लेकर चर्चा होती रही।
वहीं प्रधानमंत्री की तरफ से मंत्रियों सहित अधिकारियों से वाहनों पर लाल-नीली बत्ती का उपयोग और वीआईपी कल्चर न अपनाने के आह्वान के बाद बत्ती और हूटर के उपयोग पर कुछ हद तक विराम लगा था। आकस्मिक सेवाओं और पुलिस को छोड़कर लाल-नीली बत्ती के उपयोग की मनाही है।
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यह है नियम :
केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के मुताबिक, किसी भी निजी वाहन पर लाल-नीली बत्ती लगाने की मनाही है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता हुआ पकड़ा जाता है, तो ट्रैफिक पुलिस खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है। साल 2017 में सरकार ने वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए बड़ा फैसला लिया था, इसके तहत मंत्रियों और अधिकारियों की गाड़ियों से भी लाल-नीली बत्ती हटा दी गई थी। इसका उद्देश्य सड़क पर समानता बनाए रखना और लोगों में डर या भ्रम की स्थिति को खत्म करना था।
सरकारी वाहन खराब होने से मरम्मत के लिए गैराज गया था। इसलिए पीसीएस अधिकारी दोस्त के वाहन से आए थे। यह मेरा निजी वाहन नहीं है।
-मनोज कुमार राव, डीपीओ
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विकास भवन में लखनऊ के पंजीकरण नंबर के लाल-नीली बत्ती लगे वाहन को देखकर पहले तो अधिकारियों-कर्मचारियों और लोगों ने समझा कि किसी विभाग के मंडलीय या शासन स्तर के अधिकारी निरीक्षण में आए होंगे। बाद में पता चला कि लाल-नीली बत्ती लगा वाहन डीपीओ का निजी वाहन है। लाल-नीली बत्ती लगी होने से लोगों में वीआईपी कल्चर को लेकर चर्चा होती रही।
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वहीं प्रधानमंत्री की तरफ से मंत्रियों सहित अधिकारियों से वाहनों पर लाल-नीली बत्ती का उपयोग और वीआईपी कल्चर न अपनाने के आह्वान के बाद बत्ती और हूटर के उपयोग पर कुछ हद तक विराम लगा था। आकस्मिक सेवाओं और पुलिस को छोड़कर लाल-नीली बत्ती के उपयोग की मनाही है।
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यह है नियम :
केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के मुताबिक, किसी भी निजी वाहन पर लाल-नीली बत्ती लगाने की मनाही है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता हुआ पकड़ा जाता है, तो ट्रैफिक पुलिस खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है। साल 2017 में सरकार ने वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए बड़ा फैसला लिया था, इसके तहत मंत्रियों और अधिकारियों की गाड़ियों से भी लाल-नीली बत्ती हटा दी गई थी। इसका उद्देश्य सड़क पर समानता बनाए रखना और लोगों में डर या भ्रम की स्थिति को खत्म करना था।
सरकारी वाहन खराब होने से मरम्मत के लिए गैराज गया था। इसलिए पीसीएस अधिकारी दोस्त के वाहन से आए थे। यह मेरा निजी वाहन नहीं है।
-मनोज कुमार राव, डीपीओ