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कोयला भट्ठियों के प्रदूषण से पेड़ों पर दोहरी मार
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फोटो-34- कोयले की भट्ठियां
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। अतरौली थाना क्षेत्र में गुरुवार को अवैध कोयले की भट्ठियों को ढहाने का अभियान तो चलाया गया, लेकिन कार्रवाई कुछ भट्ठियां पर ही की गई। ज्यादातर पर मेहरबानी दिखाई गई। ये भट्ठियां शुक्रवार को भी धधकती रहीं। इनका असर बागवानी और फसलों पर पड़ रहा है।
अतरौली के नरियाखेड़ा क्षेत्र में अभी भी सौ से अधिक कोयला भट्ठियां धधक रही हैं। भट्ठियों के उड़ते धुएं और धूल के गुबार से पेड़ों को दोहरी मार पड़ रही है। कोयले के काले कारोबार में लिप्त लोग 1000 से 500 रुपये के लिए जीवनदाता पेड़ों को ही बलि चढ़ा रहे हैं। इसमें पुलिस और वन विभाग का संरक्षण है। एक ओर जहां हर माह दस हजार पेड़ कोयला भट्ठियों की भेंट चढ़ रहे हैं तो दूसरी ओर इनके धुएं से आम की बागवानी बर्बाद हो रही है।
लोगों का कहना है कि क्षेत्र में 50 से अधिर्क इंट भट्ठा होने के साथ ही इन कोयला भट्ठियों के धुएं से फसलों पर प्रभाव पड़ रहा है। आम की फसल में रोग लगने से आम माटी मोल बेचना पड़ता है। भट्ठी में काम करने वाले एक मजदूर ने बताया कि एक कोयला भट्ठी में करीब 100 से 110 क्विंटल लकड़ी भरी जाती है।
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10 से 12 दिनों में कोयला तैयार हो जाता है। इसमें करीब 30 क्विंटल कोयला तैयार होता है। यहां तैयार कोयले को व्यापारी खरीद कर लखनऊ, कानपुर, बनारस, प्रयागराज, बरेली, आगरा जैसे बड़े शहरों में सप्लाई करते हैं। बताया कि कभी-कभी भट्ठी में गैस बनने से विस्फोट हो जाता है। कई बार आगजनी में मजदूर घायल हो चुके हैं। खेतों में बनी भट्ठियों से गेहूं की फसल में आग लगने का डर बना रहता है।
भट्ठियों के लाइसेंस अक्तूबर में निरस्त कर दिए गए थे। गुरुवार को खाली भट्ठियां गिरा दी गयी हैं। अपेक्षित पुलिस प्रशासन व फायर ब्रिगेड न मिलने की वजह से चालू हालत में चालीस भट्ठियां रह गई हैं। इनको नष्ट किया जाता तो आग लगने का खतरा था। एक सप्ताह बाद भट्ठियां ढहा दी जाएंगी। -इरफान खान, वन रक्षक संडीला।
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अतरौली के नरियाखेड़ा क्षेत्र में अभी भी सौ से अधिक कोयला भट्ठियां धधक रही हैं। भट्ठियों के उड़ते धुएं और धूल के गुबार से पेड़ों को दोहरी मार पड़ रही है। कोयले के काले कारोबार में लिप्त लोग 1000 से 500 रुपये के लिए जीवनदाता पेड़ों को ही बलि चढ़ा रहे हैं। इसमें पुलिस और वन विभाग का संरक्षण है। एक ओर जहां हर माह दस हजार पेड़ कोयला भट्ठियों की भेंट चढ़ रहे हैं तो दूसरी ओर इनके धुएं से आम की बागवानी बर्बाद हो रही है।
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लोगों का कहना है कि क्षेत्र में 50 से अधिर्क इंट भट्ठा होने के साथ ही इन कोयला भट्ठियों के धुएं से फसलों पर प्रभाव पड़ रहा है। आम की फसल में रोग लगने से आम माटी मोल बेचना पड़ता है। भट्ठी में काम करने वाले एक मजदूर ने बताया कि एक कोयला भट्ठी में करीब 100 से 110 क्विंटल लकड़ी भरी जाती है।
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10 से 12 दिनों में कोयला तैयार हो जाता है। इसमें करीब 30 क्विंटल कोयला तैयार होता है। यहां तैयार कोयले को व्यापारी खरीद कर लखनऊ, कानपुर, बनारस, प्रयागराज, बरेली, आगरा जैसे बड़े शहरों में सप्लाई करते हैं। बताया कि कभी-कभी भट्ठी में गैस बनने से विस्फोट हो जाता है। कई बार आगजनी में मजदूर घायल हो चुके हैं। खेतों में बनी भट्ठियों से गेहूं की फसल में आग लगने का डर बना रहता है।
भट्ठियों के लाइसेंस अक्तूबर में निरस्त कर दिए गए थे। गुरुवार को खाली भट्ठियां गिरा दी गयी हैं। अपेक्षित पुलिस प्रशासन व फायर ब्रिगेड न मिलने की वजह से चालू हालत में चालीस भट्ठियां रह गई हैं। इनको नष्ट किया जाता तो आग लगने का खतरा था। एक सप्ताह बाद भट्ठियां ढहा दी जाएंगी। -इरफान खान, वन रक्षक संडीला।