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मृतक के पिता ने जमीन के विवाद से किया इनकार

Sat, 22 Jul 2017 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई Updated Sat, 22 Jul 2017 11:24 PM IST
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Father of the deceased denied land dispute
पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे अल्मापुर निवासी मृतक किशोर के परिजन। - फोटो : amarujala

बिलग्राम। चचेरे भाई के जानलेवा हमले में घायल मां-बेटे का लखनऊ में इलाज चल रहा है।  दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने शनिवार को हत्यारोपी को जेल भेज दिया। उधर, मृतक के पिता ने जमीन क ी रंजिश में बेटे की हत्या से इनकार किया है।

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बिलग्राम कोतवाली के अल्मापुर निवासी रामाधार (28) पुत्र भजनलाल, मां नंदरानी (75) व भतीजा सोनू (12) को चचेरे भाई रामलखन उर्फ लखपति पुत्र रूपन ने शुक्रवार को बांके से हमलाकर घायल कर दिया था। इसमें सोनू की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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जबकि रामाधार व नंदरानी को पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने दोनों को लखनऊ रेफर कर दिया था। पुलिस ने शनिवार को सोनू का शव पोस्टमार्टम के बाद  परिजनों को सौंप दिया। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मौजूद ग्रामीणों में हत्याकांड के संबंध में तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।
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यही नहीं मृतक के पिता मेवालाल भी जमीन के टुकड़े की रंजिश में हत्या की बात से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है करीब 10 साल पहले रामलखन ने सदरपुर निवासी युवक के हाथ जमीन बेच दी थी। इसके चार साल बाद प्लॉट भाई रामाधार को बेच दिया था।

मेवालाल का कहना है कि प्लॉट में मकान बनवाने के दौरान थोड़ा विवाद हुआ था। इसके बाद से रामलखन से पारिवारिक संबंध कायम रहे। बताया कि इस दौरान कभी भी जमीन के टुकड़े को लेकर विवाद नहीं हुआ।  कोतवाल सत्येंद्र सिंह ने बताया कि हत्यारोपी रामलखन को रोशनपुर नर्सरी के पास से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।


परिवार की महिला से थीं नजदीकियां
 पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद ग्रामीणों का कहना था कि लगभग छह महीना पहले रामलखन दिल्ली मजदूरी करने गया था। करीब डेढ़ महीना पहले गांव आया था। वह अक्सर रामाधार के घर आता जाता था। हत्याकांड के एक दिन पहले भी वह रामाधार के घर गया था। ग्रामीणों का दबी जुबान कहना था कि रामलखन के परिवार की ही एक महिला से संबंध थे। दिल्ली जाने के बाद महिला की नजदीकियां रामाधार के साथ बढ़ गईं। दिल्ली से लौटने के बाद से महिला उसे तवज्जो नहीं दे रही थी। इसी के चलते रामलखन ने अपने हाथ खून से रंग लिए।

 

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